Haryana Rain: 1.79 लाख एकड़ में फसलें डूबीं, 728 करोड़ का नुकसान; खेतों में घुसा नदियों का पानी
हरियाणा में इस साल मानसून की भारी वर्षा ने नदियों को उफान पर ला दिया है जिससे जींद रोहतक हिसार और पानीपत समेत कई जिलों में 1.79 लाख एकड़ फसलें डूब गई हैं। किसानों को लगभग 728 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है और यह आंकड़ा बढ़ने की संभावना है। सरकार ने क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला है जहाँ किसान नुकसान की जानकारी अपलोड कर सकते हैं।

जागरण टीम, हिसार/पानीपत। प्रदेश में इस साल मानसून की वर्षा जोरों से हो रही है। पिछले साल के मुकाबले जून, जुलाई और अगस्त में ज्यादा वर्षा हुई है। वर्ष 2024 में मानसून में 95 प्रतिशत यानी 409.4 एमएम वर्षा हुई थी, जो सामान्य से पांच प्रतिशत कम थी।
इस बार नदियों और वर्षा से 1.79 लाख एकड़ में फसलें डूब गई हैं। इससे किसानों को 728 करोड़ का नुकसान होने की आशंका है। यह नुकसान बढ़ने की पूरी संभावना है।
इस साल जून से अगस्त तक 23 प्रतिशत अधिक वर्षा हो चुकी हैं। मैदान और पहाड़ों में हुई वर्षा से यमुना, घग्गर, सोम, मारकंडा और टांगरी नदी का पानी खेतों और गांवों में घुस गया। इससे जींद, रोहतक, हिसार, अंबाला, फतेहाबाद, भिवानी सिरसा, पानीपत समेत कई जिलों में फसलें डूब गई हैं। धान, कपास, धान, बाजरा, मूंगफली और सब्जियों की फसलें खराब हो गई हैं।
सरकार ने क्षतिपूर्ति पोर्टल खोल दिया है। क्षतिपूर्ति पोर्टल पर शुक्रवार सात बजे तक प्रदेश के 766 गांवों के एक लाख 79 हजार एकड़ में पानी भरने का आंकड़ा किसानों ने अपलोड किया है। यह आंकड़ा इससे काफी ज्यादा हैं।
मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, इस साल सामान्य से सात से आठ प्रतिशत अधिक वर्षा मानसून के अंत तक हो सकती हैं। मौसम विज्ञानियों ने अभी सितंबर में भी अिधक वर्षा होने की संभावना व्यक्त की है।
किसानों को भारी नुकसान
नदियों और वर्षा के पानी से फसलें डूब गई हैं। किसानों को 728 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की संभावना है। दूसरी ओर, पानी से यह फसल तो खराब होने के कगार पर पहुंच गई है, यदि पानी नहीं सूखा तो अगली फसल की बिजाई पर भी संकट आना तय है।
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