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    Haryana Politics: CM नायब की कुर्सी पर मंडराया खतरा? दुष्यंत चौटाला ने पत्र लिखकर राज्यपाल से की फ्लोर टेस्ट की मांग

    Updated: Thu, 09 May 2024 01:15 PM (IST)

    Haryana Politics हरियाणा की सियासत में एक बार फिर से उधेड़बुन शुरू हो गई है। मंगलवार को जैसे ही भाजपा सरकार से तीन निर्दलीय विधायकों ने समर्थन वापस लिया। उसके बाद से ही प्रदेश की सियासत में खींचतान शुरू हो गई। भाजपा सरकार के पास मौजदा समय में 43 सीटें हैं जबकि बहुमत के लिए 45 सीटें चाहिए। ऐसे में दुष्यंत चौटाला ने फ्लोर टेस्ट की मांग की है।

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    Haryana Politics: दुष्यंत चौटाला ने पत्र लिखकर राज्यपाल से की फ्लोर टेस्ट की मांग

    डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। Haryana Politics: हरियाणा में सियासी उठापटक का दौर जारी है। बीते मंगलवार को भाजपा सरकार को समर्थन देने वाले तीन निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान, रणधीर गोलन और नीलोखेड़ी ने समर्थन वापस ले लिया। जिसके बाद सरकार अल्पमत में आ गई।

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    चौटाला ने राज्यपाल को लिखा पत्र

    इसी क्रम में जजपा नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला (Dushyant Chautala) ने हरियाणा के राज्यपाल को पत्र लिखा है। चौटाला ने राज्यपाल से विधानसभा का सत्र बुलाकर फ्लोर टेस्ट (Floor Test in Haryana) की मांग की है।

    दुष्यंत ने कहा कि हम मौजूदा सरकार का समर्थन नहीं करते और हरियाणा में किसी भी दूसरे राजनीतिक दल द्वारा सरकार बनाने में समर्थन के लिए हमारे दरवाजे खुले हैं।

    मौजूदा सदन में 88 विधायक

    दुष्यंत चौटाला ने पत्र में लिखा दो विधायकों के इस्तीफे के बाद सदन की संख्या 88 है। ऐसे में देखा जाए तो भाजपा के पास 40 विधायक हैं, कांग्रेस के पास 30, जेजेपी के 10, हलोपा के पास एक और इनेलो के पास भी एक विधायक है। वहीं, मौजूदा समय में निर्दलीय विधायकों की संख्या छह हैं।

    इनमें तीन निर्दलीय विधायकों ने सरकार से समर्थन वापस लिया है। दुष्यंत चौटाला ने राज्यपाल से पत्र में मांग की है कि सरकार के पास विश्वास मत नहीं रहा। इसलिए विधानसभा का सत्र बुलाया जाए और सरकार फ्लोर टेस्ट पास करे।

    तीन निर्दलीय विधायकों ने खींचा समर्थन

    बता दें कि बीते मंगलवार को भाजपा सरकार से तीन निर्दलीय विधायक ने समर्थन वापस खींच लिया। इनमें  दादरी से सोमबीर सांगवान, पुंडरी से रणधीर गोलन और नीलोखेड़ी से धर्मपाल गोंदर शामिल थे।

    विधायकों के जाने के बाद भाजपा के पास हलोपा और दो निर्दलीय विधायकों को मिलाकर कुल संख्या 43 बैठ रहा है, जबकि बहुमत के लिए 45 सीटें चाहिए। ऐसे में सरकार और विपक्ष के बीच सरकार बनाने और गिराने को लेकर खींचतान जारी है।

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