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    जीवन प्रमाणपत्र के लिए अब बुजुर्गों को नहीं खाने पड़ेंगे धक्के, पेंशनरों का घर बैठे हो सकेगा वेरिफिकेशन

    Updated: Mon, 14 Jul 2025 06:55 PM (IST)

    हरियाणा सरकार पेंशनभोगियों के लिए फेस एप लॉन्च करने जा रही है जिससे उन्हें जीवन प्रमाण पत्र जमा करने में आसानी होगी। पायलट प्रोजेक्ट अगस्त में पंचकूला और अंबाला में शुरू होगा जिससे 36 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा। इस एप से विभागों में रिकॉर्ड अपडेट होगा और मृत लोगों के नाम हटाने में मदद मिलेगी। यह पहल राजस्थान और तमिलनाडु के डिजिटल कल्याण मॉडल से प्रेरित है।

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    प्रस्तुति के लिए प्रयोग की गई तस्वीर

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में सरकारी पेंशन भोगियों तथा सामाजिक सुरक्षा के तहत पेंशन लेने वाले लाभार्थियों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें सत्यापन के लिए बैंकों तथा सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्रदेश सरकार बहुत जल्द फेस एप लॉन्च करने जा रही है। लाभार्थी इस एप के जरिए अपना जीवन प्रमाणपत्र (लाइफ सर्टिफिकेट) जमा कर सकेंगे।

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    एप का परीक्षण अंतिम चरण में है। प्रदेश में 21 लाख 96 हजार वरिष्ठ नागरिक वृद्धावस्था सम्मान भत्ता प्राप्त करते हैं। इसके अलावा आठ लाख 88 हजार विधवाएं और दो लाख नौ हजार दिव्यांग जन पेंशन योजना का लाभ उठा रहे हैं। बौने, किन्नरों, निराश्रित बच्चों और दुर्लभ बीमारियों से ग्रस्त रोगियों को भी सहायता राशि दी जाती है।

    संभावना है कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आगामी अगस्त में दो जिलों पंचकूला और अंबाला में इस एप को लॉन्च किया जाएगा। फिर इसे राज्य के अन्य 20 जिलों में भी शुरू कर दिया जाएगा। पूरी तरह से लागू होने पर राज्य भर में 36 लाख से ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिलेगा।

    फेस एप को लॉन्च करने की पहली वजह यह है कि विभागों में इसके जरिए रिकार्ड अपडेट होगा। वर्तमान में हरियाणा के अधिकतर विभागों का डेटा ऑनलाइन हो रहा है। सरकार चाह रही है कि इस साल के अंत तक सभी विभागों का डेटा अपडेट करने के साथ ही मृत लोगों का डेटा भी अपडेट करना चाह रही है।

    अभी कई विभागों में ऐसे लोगों के नाम दर्ज हैं, जिनकी मौत हो चुकी है, लेकिन उनके नाम से परिवार के अन्य लोग आर्थिक लाभ ले रहे हैं। फेस एप के लॉन्च होने के बाद अपडेट डेटा होने से ऐसे मृत लोगों के नाम हटाने में मदद मिलेगी।

    सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक प्रशांत पंवार ने सोमवार को बताया कि यह पहल राजस्थान और तमिलनाडु के समान डिजिटल कल्याण मॉडल से प्रेरित है। हरियाणा की टीम ने फरवरी में राजस्थान का दौरा किया था। तभी से हम अपने लाभार्थियों के लिए इस एप्लिकेशन को विकसित करने पर काम कर रहे हैं।