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    सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, महिला अनुयायियों की मौत मामले में उम्रकैद की सजा पर रोक

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 08:56 PM (IST)

    सतलोक आश्रम बरवाला के प्रमुख रामपाल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। 2014 में आश्रम के भीतर महिला अनुयायियों की मौत के मामले में उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी गई है क्योंकि मेडिकल साक्ष्यों को लेकर गंभीर मुद्दे हैं और मृतका के परिजनों ने भी अभियोजन का समर्थन नहीं किया।

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    सतलोक आश्रम बरवाला के प्रमुख रामपाल की उम्रकैद की सजा पर रोक (फाइल फोटो)

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। सतलोक आश्रम बरवाला के विवादित प्रमुख रामपाल को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2014 में आश्रम के भीतर महिला अनुयायियों की मौत के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे रामपाल की सजा पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।

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    रामपाल पिछले 10 साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं। हाई कोर्ट के आदेश से रामपाल को एक बड़ी राहत मिली है व बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।

    हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता/अपीलकर्ता के खिलाफ यह आरोप जरूर है कि उन्होंने महिलाओं को आश्रम में बंद रखा था, लेकिन मेडिकल साक्ष्यों को लेकर गंभीर बहस योग्य मुद्दे मौजूद हैं।

    अदालत ने यह भी माना कि रामपाल की उम्र 74 वर्ष है और वे पहले ही 10 साल 27 दिन की वास्तविक सजा काट चुके हैं।

    साथ ही मृतका के पति और सास ने भी अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया। ऐसे हालात में अदालत ने उनकी सजा को मुख्य अपील लंबित रहने तक निलंबित करने का आदेश दिया।

    यह आदेश जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस दीपिंदर सिंह नलवा की खंडपीठ ने रामपाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।

    रामपाल ने अक्टूबर 2018 में सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को चुनौती देते हुए सजा निलंबन की मांग की थी। उन्हें आईपीसी की धारा 343, 302 और 120-बी के तहत दोषी ठहराया गया था।

    रामपाल की तरफ से उसके वकील अर्जुन श्योराण ओर से दलील दी गई कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और यह मामला दरअसल प्राकृतिक मौत का है।

    डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार मृतका की मौत ‘न्यूमोनिया’ से हुई थी। यहां तक कि मृतका के पति और सास ने भी अदालत में स्वीकार किया कि मृतका एक माह से न्यूमोनिया से पीड़ित थी।

    बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि 13 अन्य सह-आरोपी पहले ही जमानत पर रिहा हो चुके हैं, इसलिए रामपाल को भी समान आधार पर राहत मिलनी चाहिए।

    वहीं, राज्य सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मृतका समेत कई महिलाओं को रामपाल के आश्रम में कैद कर रखा गया था, जहां उन्हें न तो पर्याप्त भोजन दिया जाता था और न ही रहने की सुविधा।

    सरकार का दावा था कि महिलाओं की मौत दम घुटने के कारण हुई। फिलहाल, हाईकोर्ट ने रामपाल की शेष सजा पर रोक लगा दी है और यह आदेश मुख्य अपील के निपटारे तक लागू रहेगा।

    कोर्ट ने स्योर्टी बॉन्ड भरने व मजिस्ट्रेट के संतुष्टि पर रामपाल को रिहा करने का भी आदेश दिया अगर वह किसी अन्य मामले वांछित नहीं है तो।