हरियाणा की नई कपड़ा नीति तैयार, टेक्सटाइल पार्क बनेंगे, गारमेंट्स इंडस्ट्री को मिलेगी मजबूती
हरियाणा में नई कपड़ा नीति तैयार है। एक दिसंबर को होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में नई टेक्सटाइल नीति को मंजूरी दी जा सकती है। इसमें चार से पांच हजार करोड़ के निवेश की संभावना है और बीस हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। लंबे मंथन और उद्यमियों के सुझाव के बाद हरियाणा की टेक्सटाइल (कपड़ा) नीति तैयार हो गई है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम श्रेणी के उद्यमियों की जरूरत और आम जनता के फायदे को ध्यान में रखकर तैयार की गई इस नीति के तहत प्रदेश में कलस्टर बनाकर टैक्सटाइल पार्क बनाए जाएंगे।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पास होने की वजह से चूंकि हरियाणा में जमीन काफी महंगी है, इसलिए कपड़ा उद्योग स्थापित करने वाले उद्यमियों को सरकार अलग-अलग प्लाट देने के हक में नहीं हैं। जमीन की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर सरकार की मंशा उद्यमियों को कम लागत पर अधिक से अधिक उत्पादन इकाइयां खोलने के लिए प्रेरित करने की है, जिसके लिए टेक्सटाइल पार्क फायदे का सौदा नजर आ रहे हैं।
हरियाणा मंत्रिमंडल की एक दिसंबर को होने वाली बैठक में राज्य की टेक्सटाइल नीति 2022 को मंजूरी मिलने की संभावना है। इस नीति का पूरा नाम ‘हरियाणा आत्मनिर्भर कपड़ा नीति 2022’ होगा। टेक्सटाइल नीति तीन साल के लिए यानी 2025 तक होगी, जिसमें प्रारंभिक तौर पर चार से पांच हजार करोड़ रुपये के निवेश के साथ लगभग 20 हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
उद्योग एवं वाणिज्य तथा एमएसएमई मंत्रालय उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के पास है। टेक्सटाइल नीति तैयार करने के लिए उन्होंने एनसीआर के प्रमुख जिलों के साथ-साथ उस बेल्ट के उद्यमियों के साथ लगातार बैठकें की, जहां कपड़े का कारोबार सबसे अधिक है। गारमेंट्स निर्माण और उसके निर्यात के लिहाज से हरियाणा देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हैं, जबकि पानीपत के टेक्सटाइल उद्योग की विदेश तक में पहचान है।
पिछले केंद्रीय बजट में सरकार ने देश में सात बड़े टेक्सटाइल पार्क बनाने की घोषणा की थी। करनाल के भाजपा सांसद संजय भाटिया ने एक टेक्सटाइल पार्क हरियाणा खासकर पानीपत में बनाने की मांग लोकसभा में उठाई थी।
उसके बाद राज्य सरकार को लगने लगा कि प्रदेश में कलस्टर बनाकर अधिक से अधिक टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जाएंस, ताकि राज्य का कपड़ा उद्योग खासकर गारमेंट्स का काम व्यापक स्तर पर गति पकड़ सके। प्रदेश के सिरसा, फतेहाबाद और हिसार जिले ऐसे हैं, जहां सबसे अधिक कपास उत्पादन होता है। टेक्सटाइल पालिसी में कपास की खेती को प्रोत्साहित करने की संभावनाओं का भी ध्यान रखा गया है।
सिंथेटिक व रीजनरेटेड फाइबर इकाइयों को प्रोत्साहित करेंगे
प्रदेश की टेक्सटाइल पालिसी में एमएसएमई के माध्यम से पदमा योजना के तहत वन स्टाप सेंटर बनाकर भी टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा। अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार मिल सके, इसके प्रविधान कपड़ा नीति में किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन की योजनाओॆ और लक्ष्यों का भी ध्यान रखा गया है। नीति के अंतर्गत तकनीकी टेक्सटाइल को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा। सिंथेटिक फाइबर व रीजनरेटेड फाइबर इकाइयों को प्रोत्साहित करने की सरकार की योजना है।
वन ब्लाक-वन उत्पाद योजना का भी रखा जाएगा ध्यान
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला का कहना है कि हरियाणा की कपड़ा नीति बनकर तैयार है। इसे काफी मंथन और सुझाव लेने के बाद तैयार किया गया है। छोटे-छोटे उद्यमियों को प्रोत्साहित करने की सरकार की य़ोजना है। तमिलनाडू के त्रिपुर के बाद हरियाणा ऐसा राज्य है, जो गारमेंट्स निर्माण में सर्वोपरि है। इसलिए यहां कपड़ा उद्योग के प्रभावी तरीके से विकसित होने की भरपूर संभावना है। हम टेक्सटाइल पार्क भी बनाएंगे और वन स्टाप सेंटर भी बनेंगे। पदमा योजना के तहत वन ब्लाक-वन उत्पाद योजना का भी इस नीति के क्रियान्वयन में ध्यान रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद कपड़ा नीति को सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
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