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    'टैरिफ से हरियाणा के उद्योगों को भारी नुकसान', दीपेंद्र हुड्डा ने सब्सिडी की मांग कर BJP को घेरा

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 07:37 PM (IST)

    कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ और सरकार की नीतियों से हरियाणा के उद्योगों को भारी नुकसान हो रहा है। पानीपत के कपड़ा उद्योग पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रभावित उद्योगों को विशेष सब्सिडी और कर में छूट दी जाए साथ ही निर्यातकों के लिए आपात पैकेज की घोषणा की जाए ताकि नौकरियां बचाई जा सकें।

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    अमेरिकी टैरिफ के कारण दीप्रेंद्र हुड्डा ने सरकार से सब्सिडी और कर छूट की मांग की है (फाइल फोटो)

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि अमेरिकी टैरिफ की मार और भाजपा सरकार की कमजोरी से हरियाणा के उद्योगों पर भयंकर चोट पड़ी है।

    प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये के एक्सपोर्ट आधारित उद्योगों पर तालाबंदी और इनसे जुड़े लाखों कामगारों के रोजगार पर खतरे के काले बादल मंडरा रहे हैं। लाखों लोगों की नौकरी छिन जाने का संकट पैदा हो गया है।

    उन्होंने कहा कि अमरीकी टैरिफ का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव पानीपत के कपड़ा उद्योग पर पड़ेगा। पानीपत से अमेरिका को हर साल करीब 12000 करोड़ का निर्यात होता है।

    टैरिफ के बाद लगभग एक तिहाई आर्डर अटक गए हैं। पानीपत, फरीदाबाद, गुरुग्राम, मानेसर प्रमुख गारमेंट और टेक्सटाइल हब हैं, जहां हजारों एक्सपोर्ट यूनिट्स में लाखों लोग काम करते हैं।

    इसके अलावा टैरिफ का दुष्प्रभाव रोहतक, सोनीपत, हिसार, करनाल, अंबाला, रेवाड़ी के उद्योगों पर भी पड़ा है।

    उन्हाेंने मांग की कि अमेरिकी टैरिफ हमले से प्रभावित उद्योगों को विशेष सब्सिडी और कर छूट दी जाए। साथ ही सरकार निर्यातकों के लिए आपात पैकेज की घोषणा करे।

    कांग्रेस सांसद ने कहा कि भारत पर लगे अमेरिकी टैरिफ का सीधा फायदा पाकिस्तान, बांग्लादेश, वियतनाम जैसे देशों को होगा।

    इसी तरह रोहतक की नट-बोल्ट इंडस्ट्री को करीब 4000 करोड़ रुपये, अंबाला के साइंटिफिक इक्विपमेंट्स एक्सपोर्ट को 500-600 करोड़ और करनाल के बासमती एक्सपोर्ट को भी खासा नुकसान उठाना पड़ेगा।

    हरियाणा की टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, फुटवियर, आटो पार्ट्स, स्टील, इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चर, फार्मा समेत अन्य इंडस्ट्री अमेरिकी टैरिफ हमले से बुरी तरह प्रभावित हुई है।

    करीब एक तिहाई आर्डर रद हो चुके हैं। जल्द समाधान नहीं निकला तो कंपनियों में तालाबंदी की नौबत आ जाएगी और बेरोजगारी का भयंकर और विकराल रूप सामने आएगा।

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