चंडीगढ़। रेल बजट में हरियाणा को उम्मीद के अनुरूप नहीं मिली। हरियाणा से राज्यसभा के सदस्य होने के कारण रेल मंत्री सुरेश प्रभू से लोगों काे काफी आस थी, लेकिन मिली तो बस एक रेल लाइन। इसके अलावा, एक प्रस्तावित रेल लाइन के सर्वे के लिए राश्ाि बढ़ाई गई है। राज्य को कोई नई ट्रेन नहीं मिली है ओर न ही कोई रेल परियोजना ही उसके हिस्से में आया है। सबसे निराशाजनक प्रदेश में कुछ साल पहले रेल कोच फैक्टरी लगाने के बारे में चर्चा न होना रहा। वहीं, प्रदेश में चार ओवरब्रिज भी बनाएं जाएंगे।

पानीपत-मेरठ लाइन को मिली हरी झंडी

रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने प्रदेश की झोली में कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं दिया, लेकिन हरियाणा को उत्तर प्रदेश से जोड़ने के लिए पानीपत-मेरठ रेल लाइन को हरी झंडी दे दी है। लंबे अरसे से पानीपत-मेरठ लाइन को बिछाने के लिए मांग की जा रही थी। इस लाइन का सर्वे भी हो चुका है। इस रेल लाइन को मुनाफे का सौदा माना गया है।

इसके साथ ही चंडीगढ़-नारायणगढ़ वाया जगाधरी रेल लाइन का बजट आवंटन भी बढ़ा दिया है। इस रेल लाइन को भले ही रेलवे ने घाटे का सौदा माना, लेकिन इसके सर्वे के लिए रेलमंत्री ने एक लाख की बजट राश्ाि सीधे 25 करोड़ कर दिया।

सूत्रों के अनुसार, 2010-11 के रेल बजट में ममता बनर्जी ने भी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के लोगों की दिक्कताें को देखते हुए पानीपत-मेरठ के बीच रेल लाइन बिछाने की घोषणा की थी। घोषणा के बाद रेलवे बोर्ड ने इसकी लागत और खर्चा का पता करवाया। पानीपत-मेरठ लाइन ऐसी है जिसमें करोड़ों रुपयों का मुनाफा होने के बावजूद इसकी शुरूआत नहीं की गई थी।

इसकी सर्वे रिपोर्ट की फाइल एक टेबल से दूसरे टेबल तक घूमती रही, लेकिन इसका काम नहीं बढ़ा। पानीपत- मेरठ के बीच करीब 104 किलोमीटर रेल लाइन बिछाने के लिए रेलवे ट्रक,स्टेशनाें की बिल्डिंग, ब्रिज, जमीन आदि पर आने वाले खर्च का आंकलन 947 करोड़ 86 लाख रुपये का किया गया था। सर्वे में पाया गया कि सौ रुपये में 4 रुपये 70 पैसे रेलवे को मुनाफा होगा। यानी की पानीपत-मेरठ लाइन बिछाने के बाद रेलवे को सालाना करीब 44 करोड़ 53 लाख छह हजार दो सौ रुपये मुनाफा होना था।

परियोजना से रेलवे को मुनाफा होने था, लेकिन फाइल ठंडे बस्ते में पड़ी थी। अब रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इस लाइन को बिछवाने के लिए हरी झंडी दे दी है। इसी प्रकार चंडीगढ़ वाया नारायणगढ़ जगाधरी तक लाइन बिछाने की घोषणा हो चुकी है। इस बार सुरेश प्रभु ने एक लाख के बजट को 25 करोड़ तक पहुंचा दिया।

इस लाइन में करीब 875 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसके लिए अब नए सिरे से सर्वे होगा कि लाइन कहां से कहां तक किस रूट से बिछाई जाएगी। इसमें कितनी जमीन अधिग्रहण करनी होगी, कितने पुल बनेंगे इसमें लागत क्या आएगी।

रेल कोच फैक्टरी की उम्मीद काे लगा झटका

हरियाणा अन्य राज्यों के मुकाबले इस बार रेल बजट में अधिक मिलने की उम्मीद कर रहा था। प्रदेश में पहली बार भाजपा की सरकार बनी है। पूर्व यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान यहां रेल कोच फैक्टरी स्थापित किए जाने की घोषणा की गई थी, लेकिन उस पर आज तक अमल नहीं हो सका है। ऐसे में प्रदेश के लोगों का मानना था कि रेल मंत्री इस बारे में बजट में इसका उल्लेख जरूर करेंगे। लेकिन, इस बार भी प्रभू की इस पर कृपा नहीं हुई।

प्रदेश के लोगों को उम्मीद थी कि रेल बजट में रेवाड़ी से चंडीगढ़ के बीच नई फास्ट रेल सेवाओं की शुरुआत और रेवाड़ी-दिल्ली के बीच नई ट्रेन की उम्मीदें थीं। छोटी काशी कहेे जाने वाले भिवानी से हरिद्वार, सूरत व मुंबई के लिए सीधे ट्रेन के लिए इंतजार इस बार भी खत्म नहीं हुआ।

Posted By: Sunil Kumar Jha