राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने कहा कि भगवान राम हिंदू और मुसलमान दोनों के पूर्वज हैं। उन्हें मुस्लिम समुदाय के बहुत से ऐसे लोग मिलते हैं, जो स्वीकार करते हैं कि भगवान राम ही उनके पूर्वज हैं। सभी का प्राचीन इतिहास एक समान और इकट्ठा है। कुछ लोग हिंदू बन गए और कुछ मुसलमान। 

मुख्यमंत्री मनोहर लाल की कैबिनेट में सीनियर मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने यह बात स्कूली पाठ्यक्रम में गीता को शामिल करने के विपक्ष के विरोध पर कही। यह अलग बात है कि गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने का दावा पिछली मनोहर सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने किया था। उन्हें यह दावा करते-करते पांच साल बीत गए, मगर गीता स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल नहीं हुई। अब कंवरपाल गुर्जर को शिक्षा मंत्री बने दो साल हो गए, लेकिन वह भी गीता को पाठ्यक्रम में शामिल नहीं करा पाए। पिछले सात साल से यह दावे तो बहुत हो रहे हैं कि गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करेंगे, लेकिन कब किया जाएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। यह स्थिति तब है, जब हरियाणा सरकार हर साल इंटरनेशनल गीता जयंती महोत्सव का आयोजन कर रही है।

शिक्षा व पर्यटन मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने शिक्षा के भगवाकरण के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गीता से हमारी पहचान है। गीता में कहीं कोई ऐसी बात नहीं लिखी है, जिससे सांप्रदायिकता बढ़ती है। उसमें जीवन का सार है। हमारी पहचान और कल्चर ही भगवा है। भगवा का मतलब पवित्रता और त्याग से है, सांप्रदायिकता से नहीं है। भगवा रंग को सांप्रदायिकता से जोडऩे वाले लोगों की समझ कम है।

कंवरपाल गुर्जर ने कहा, ''मैं किसी भी संप्रदाय के साथ भेदभाव के खिलाफ हूं। मैं धर्म निरपेक्षता शब्द को भी सही नहीं मानता। सही शब्द पंथ निरपेक्षता है। जिस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि पूरा देश उनका है और मुख्यमंत्री मनोहर लाल कहते हैं कि हरियाणा एक-हरियाणवी एक, उसी तरह गीता और भगवा हमें यही सिखाते हैं। शासन की जिम्मेदारी है कि वह सबके साथ एक समान व्यवहार करे, लेकिन अपनी-अपनी कल्चर से समझौता करके नहीं।'' 

कंवरपाल गुर्जर ने कहा कि भगवान राम सबके पूर्वज हैं। मुसलमानों के पूर्वज भी राम हैं। उनका इलाका मुस्लिम बाहुल्य है। बहुत से लोग उन्हें मिलते हैं जो कहते हैं कि हम और आप एक ही खानदान के हैं और हमारे पूर्वज एक समान हैं, इसलिए हिंदू-मुसलमान के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गीता को किसी संप्रदाय के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिये। उससे केवल ज्ञान लेना चाहिये और उसे जीवन में अमल करना चाहिए। हमारे जितने भी महापुरुष हैं, भले ही वह किसी भी संप्रदाय के हैं, गीता के सार से सहमत हैं और उस पर अमल करते हैं।

Edited By: Kamlesh Bhatt