जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार मूल्य आधारित प्राचीन गुरुकुल शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देगी। इसके लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने वाले गुरुकुलों को मुफ्त भूमि मुहैया कराने का निर्णय लिया है। सरकार ऐसे गुरुकुल चलाने के लिए शिक्षकों सहित सभी अन्य आवश्यक प्रबंध कराने में भी सहयोग देगी।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने यह घोषणा पंचनद शोध संस्थान चंडीगढ़ द्वारा 'वर्तमान युग में गुरुकुल प्रणाली की प्रासंगिकता' विषय पर आयोजित कार्यक्रम में की। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों, योग एवं देशभक्ति को शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए ताकि बच्चों का समग्र विकास हो सके।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मुकुल कनितकर ने कहा कि वर्तमान में देश में 4000 से अधिक गुरुकुल काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने शिक्षा प्रणाली में बदलाव के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य के बजट का एक बड़ा हिस्सा बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने पर खर्च किया जा रहा है। अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने प्रो. बीके कुठियाला की अध्यक्षता में 21 सदस्यीय राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद भी गठित की है।

मुख्मयंत्री ने सरकारी विद्यालयों में पहली से आठवीं कक्षा तक के लिए नो डिटेंशन पॉलिसी (किसी को फेल नहीं करना) को समाप्त करने की वकालत करते हुए कहा कि इस प्रणाली ने विद्यार्थियों के पढऩे की आदत पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष गीता जयंती समारोह के कार्यक्रम मॉरीशस और यूनाइटेड किंगडम (इंग्लैंड) में भी आयोजित किए जाएंगे। इस संबंध में दोनों देशों से निमंत्रण प्राप्त हुए हैं। पीजीआइएमइआर चंडीगढ़ के निदेशक डॉ. जगत राम ने गुरुकुल शिक्षा को सर्वश्रेष्ठ शिक्षा प्रणाली बताया। पंचनद शोध संस्थान के निदेशक प्रो. बीके कुठियाला और कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. कृष्ण आर्य ने गुरुकुल शिक्षा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

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Posted By: Kamlesh Bhatt