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    100 करोड़ में उपराज्यपाल बनाने का सौदा, करोड़ों रुपये का हो चुका था भुगतान; फिर बिगड़ गया खेल, कोर्ट तक पहुंचा मामला

    Updated: Sun, 19 Jan 2025 02:59 PM (IST)

    चंडीगढ़ हाईकोर्ट ने अंडमान और निकोबार के उप राज्यपाल पद के लिए ₹100 करोड़ की रिश्वत मामले में आरोपी दलबीर सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। आरोप है कि दलबीर सिंह और वेंकट रमन मूर्ति ने सुरेंद्र मलिक से उप राज्यपाल नियुक्त करने के लिए ₹100 करोड़ की मांग की थी। इस सौदे के तहत ₹30 करोड़ रुपये अग्रिम देने थे।

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    100 करोड़ में एलजी बनाने के मामले में कोर्ट ने खारिज की आरोपी की याचिका।

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। अंडमान निकोबार के उप राज्यपाल का पद दिलाने के लिए 100 करोड़ रुपये की सौदेबाजी का मामला सामने आया है। इस सौदे के तहत 30 करोड़ रुपये की राशि अग्रिम देनी थी। बाकी राशि काम होने के बाद दी जानी थी।

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    30 करोड़ रुपये की राशि में 10 करोड़ 46 लाख रुपये आरोपित को मिल चुके हैं। इसमें से एक करोड़ रुपये खाते में भेजे गए। बाकी राशि का लेनदेन नकद में हुआ है।

    उप राज्यपाल का पद संवैधानिक पद है। इस पद के लिए सौदेबाजी होने के बाद पुलिस व गुप्तचर एजेंसियां सकते में आ गए। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में यह मामला पहुंचा है। हाईकोर्ट ने 10 करोड़ रुपये लेकर उप राज्यपाल का पद दिलाने का झांसा देने के आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।

    कोर्ट ने कहा कि जब प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, तो जमानत देना जनता में बहुत नकारात्मक संदेश देगा। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्यपाल और उप राज्यपाल का पद भारतीय संविधान के तहत हर राज्य में सर्वोच्च पद है।

    दुर्भाग्यवश शिकायतकर्ता सुरेंद्र मलिक ने सोचा कि पैसे देकर उन्हें यह पद मिल सकता है, जो इस बात का प्रतीक है कि पैसे की ताकत और सही व्यक्ति को ढूंढकर लोग अपनी इच्छाएं पूरी कर सकते हैं।

    आरोपित को मिल चुके थे 10 करोड़ 45 लाख रुपये

    यदि आरोपित दलबीर सिंह को जमानत दे दी जाती है तो यह भारत के लोगों में बहुत नकारात्मक संदेश देगा, इसलिए आरोपित व्यक्ति जमानत का हकदार नहीं है। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणियां दलबीर सिंह नामक व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

    शिकायत के अनुसार दलबीर सिंह और वेंकट रमन मूर्ति ने सुरेंद्र मलिक को अंडमान और निकोबार का उप राज्यपाल नियुक्त करने के लिए 100 करोड़ रुपये की मांग की थी।

    इस सौदे के तहत 30 करोड़ रुपये अग्रिम देने थे, जिसमें से 10 करोड़ 45 लाख रुपये आरोपित को मिल चुके थे। इसमें से एक करोड़ रुपये याचिकाकर्ता दलबीर सिंह के खाते में स्थानांतरित हुए थे।

    खाते में एक करोड़ का हुआ ट्रांसफर

    याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि मुख्य आरोपित वेंकट रमन मूर्ति नहीं है। वेंकट रमन मूर्ति को दलबीर से केवल उसके साले हरियाणा पुलिस के इंस्पेक्टर मनबीर सिंह के माध्यम से परिचित कराया गया था। उसको सिर्फ पैसे के लेन-देन के लिए इस्तेमाल किया गया है।

    शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि भले ही वेंकट रमन मूर्ति की भूमिका छोटी हो, लेकिन उसने अपने खाते में एक करोड़ रुपये प्राप्त किए और पूरे घोटाले के बारे में वह जानकार था। सभी स्थितियों पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि तस्वीरें, वाट्सएप चैट और जांच से यह साबित होता है कि सुरेंद्र मलिक ने पैसे दिए थे।

    रमन मूर्ति के खाते में एक करोड़ रुपये का ट्रांसफर भी इसे प्रमाणित करता है। कोर्ट ने कहा कि याचिका में याचिकाकर्ता के खाते में इतनी बड़ी रकम मिलने पर कोई स्पष्टता नहीं है।

    हालांकि, सुरेंद्र मलिक का नौ जून 2023 को निधन हो गया, लेकिन उनके निधन से यह धोखाधड़ी समाप्त नहीं हो जाती। कोर्ट ने यह भी कहा कि अपराध के प्रभाव को देखते हुए अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा। इस आधार पर दलबीर की याचिका खारिज कर दी गई।

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