विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मेरठ से 9 घंटे पहले अंबाला में सुलगी थी 1857 की क्रांति, 10 मिनट में 135 जवान हुए शहीद; अब बना एशिया का सबसे बड़ा स्मारक

Published: Sat, 31 Oct 2026 10:34 AM (IST)

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 5 नवंबर को अंबाला छावनी में 1857 की क्रांति के शहीद स्मारक का लोकार्पण करेंगे।

मेरठ से 9 घंटे पहले अंबाला में सुलगी थी 1857 की क्रांति (फोटो- सोशल मीडिया)

मेरठ से 9 घंटे पहले अंबाला में सुलगी थी 1857 की क्रांति (फोटो- सोशल मीडिया)

HighLights

  1. अमित शाह 5 नवंबर को अंबाला शहीद स्मारक का लोकार्पण करेंगे

  2. 1857 की क्रांति अंबाला में मेरठ से 9 घंटे पहले शुरू हुई

  3. यह एशिया का सबसे बड़ा संग्रहालय, 700 शहीदों के नाम

 

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। देश की आजादी की पहली लड़ाई यानी 1857 की क्रांति के इतिहास में अंबाला छावनी की भूमिका अब राष्ट्रीय स्तर पर नए सिरे से सामने आने वाली है।

अंबाला छावनी में करीब 22 एकड़ में तैयार किए गए "आजादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक-1857" का पांच नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोकार्पण करेंगे।

हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने स्मारक से जुड़े शोध और सरकारी अभिलेखों के हवाले से कई ऐसे ऐतिहासिक तथ्य सामने रखे हैं, जो 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंबाला छावनी की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हैं।

मेरठ से नौ घंटे पहले अंबाला में हुई थी क्रांति

इतिहासकार डॉ. केसी यादव के शोध और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अनिल विज ने जानकारी दी कि 10 मई 1857 को मेरठ से करीब नौ घंटे पहले अंबाला छावनी में क्रांति की शुरुआत हो चुकी थी।

राष्ट्रीय अभिलेखागार के एक दस्तावेज के हवाले से अनिल विज ने बताया कि सितंबर 1857 में परेड ग्राउंड पर 135 भारतीय सैनिकों को महज 10 मिनट में गोलियों से भून दिया गया था। 33 सैनिक बंदी बनाए गए थे, जबकि 40 भागने में सफल रहे।

एशिया का सबसे बड़ा संग्रहालय अनिल विज के अनुसार, 1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने बंगाल आर्मी की 74 नियमित नेटिव इन्फैंट्री रेजिमेंटों में से 54 को भंग कर दिया था।

15 को निहत्था कर दिया गया और केवल तीन को वफादार माना गया। सभी 10 नियमित लाइट कैवेलरी रेजिमेंट भी भंग कर दी गईं। अंबाला की 5वीं और 60वीं नेटिव इन्फैंट्री तथा चौथी कैवेलरी को भी विद्रोही मानते हुए भंग किया गया था।

कैबिनेट मंत्री के अनुसार, अंबाला-दिल्ली रोड पर करीब 22 एकड़ में फैले स्मारक में 22 गैलरियां बनाई गई हैं। इनमें अंबाला से लेकर थानेसर, रोहतक, रेवाड़ी, मेरठ, दिल्ली और झांसी तक के क्रांतिकारी घटनाक्रम आधुनिक तकनीक और दृश्य माध्यमों से प्रदर्शित होंगे।

राव तुलाराम, रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे सहित अनेक क्रांतिकारियों के संघर्ष को स्थान मिलेगा। उन्होंने बताया कि यह एशिया का सबसे बड़ा संग्रहालय बनाया गया है।

यह भी पढ़ें- विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में हरियाणा की मनीषा भनवाला ने रचा इतिहास, बनीं पहली भारतीय महिला गोल्ड मेडलिस्ट


विद्यार्थियों को सरकारी खर्च पर कराया जाएगा भ्रमण

हरियाणा सरकार ने प्रदेश के कॉलेजों, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों सहित शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को सरकारी खर्च पर स्मारक दिखाने का निर्णय लिया है।

इसके लिए प्रतिदिन करीब 50 बसें लाने की योजना है। स्कूली विद्यार्थियों को भी भ्रमण कराया जाएगा। अनिल विज ने बताया कि पांच नवंबर को लोकार्पण के साथ अंबाला छावनी के गांधी मैदान में अमित शाह की जनसभा भी होगी।

स्मारक का उद्देश्य 1857 के उन गुमनाम बलिदानियों को इतिहास में सम्मानजनक स्थान दिलाना है, जिनकी कुर्बानियां लंबे समय तक व्यापक पहचान से वंचित रहीं।

शहीद स्मारक की प्रमुख विशेषताएं

  • करीब 700 शहीदों के नाम, पिता और गांव के नाम सहित, सुनहरे अक्षरों में अंकित होंगे।
  • गुमनाम क्रांतिकारियों के लिए विशेष गैलरी बनाई गई है। 
  • श्रद्धांजलि देने पर विशेष तकनीक से ज्योति प्रज्ज्वलित होगी और श्रद्धांजलि देने वाले का नाम दर्ज होगा। 
  • परिसर में 63 मीटर ऊंचा कमल का फूल, दो हाईस्पीड लिफ्ट, स्काई कैफे, फूड कोर्ट और हेलीपैड बनाया गया है।

 

 

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।