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    देश में बड़ा मुद्दा बन गई अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान की गिरफ्तारी, समर्थन में जुटे शिक्षाविद व नेता

    Updated: Mon, 19 May 2025 05:33 PM (IST)

    अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद (Professor Ali Khan Mahmoodabad) की हरियाणा पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद विवाद बढ़ गया है। उन पर सेना की महिला अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप है। राज्य महिला आयोग के नोटिस के बाद गिरफ्तारी हुई। अली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जिसकी सुनवाई जल्द होगी।

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    अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की फाइल फोटो

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान सेना की कार्यवाही की मीडिया ब्रीफिंग देने वाली महिला अधिकारियों के विरुद्ध अशोका यूनिवर्सिटी सोनीपत के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद (Ali Khan Mahmudabad) द्वारा की गई टिप्पणियों का मामला तूल पकड़ गया है।

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    राज्य महिला आयोग द्वारा इन टिप्पणियों पर लिए गए संज्ञान के बाद जहां हरियाणा पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया, वहीं यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अली खान अपनी गिरफ्तारी के विरोध में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली, जिस पर अगले एक से दो दिनों के भीतर सुनवाई होने की संभावना है।

    राजनीतिक परिवार से संबंध रखते हैं अली खान

    प्रोफेसर अली खान राजनीतिक परिवार से संबंध रखते हैं। वे आमिर मोहम्मद खान के बेटे हैं। उन्हें राजा साहब महमूदाबाद के नाम से जाना जाता है। करीब दो साल तक महमूदाबाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे। उन्हें अखिलेश यादव के करीबी लोगों में गिना जाता था।

    अली की शादी जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री हसीब द्राबू की बेटी से हुई है। राज्य में प्रोफेसर अली की गिरफ्तारी बड़ा मुद्दा बन चुकी है। इंटरनेट मीडिया पर प्रोफेसर के समर्थन में जहां काफी लोग खड़े हो गए, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर से भाजपा के पूर्व सांसद रितेश पांडेय ने प्रोफेसर की गिरफ्तारी को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।

    इंटरनेट मीडिया पर कहा जा रहा है कि प्रोफेसर अली खान ने पाकिस्तान के विरुद्ध आपरेशन सिंदूर को लेकर सेना अथवा सेना की कार्यवाही के बारे में कुछ भी ऐसा नहीं कहा, जिस पर राज्य महिला आयोग को इसे मुद्दा बनाकर गिरफ्तार करा दिया है।

    प्रोफेसर अली खान पर क्या है आरोप?

    प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद पर आरोप है कि इंटरनेट मीडिया पर अपनी पोस्ट में उन्होंने भारतीय सेना की महिला अधिकारियों का अपमान किया और सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा दिया, जिसके बाद हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उन्हें सात मई को नोटिस जारी किया।

    भाजपा युवा मोर्चा के नेता योगेश जठेरी की तरफ से भी सोनीपत थाने में प्रोफेसर के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराई गई थी। नोटिस मिलने के बाद प्रोफेसर आयोग के सामने पेश नहीं हुए, जिसके बाद उन्हें रेणु भाटिया के आदेश और एफआइआर के आधार पर रविवार को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया था। प्रोफेसर पहले ही सफाई दे चुके कि इस पोस्ट में कहीं भी देश के विपरीत कुछ नहीं है।

    कई शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता प्रोफेसर अली के समर्थन में

    प्रोफेसर की गिरफ्तारी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर पूरे देश में बहस छेड़ दी है। कई शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रोफेसर के समर्थन में आवाज उठाई है, जिसमें 1,100 से अधिक लोगों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर कर उनकी रिहाई की मांग की है।

    यही याचिका सुप्रीम कोर्ट में डाली गई है। लोगों ने गिरफ्तारी को मनमाना बताते हुए इंटरनेट मीडिया पर लिखा है कि मध्य प्रदेश के मंत्री ने भारतीय सेना की महिला अधिकारी पर टिप्पणी की, उसे अभी भी गिरफ्तार नहीं किया गया, जबकि अली खान के विरुद्ध एक पोस्ट के लिए गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई कर दोहरा रवैया अपनाया गया है।

    प्रोफेसर अली खान की पूरी पोस्ट उनके शब्दों में पढ़िये

    प्रोफेसर अली खान ने अपनी पोस्ट में लिखा, कर्नल सोफिया कुरैशी की तारीफ करते हुए इतने सारे दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों को देखकर मुझे खुशी हो रही है, मगर शायद ये लोग मॉब लिंचिंग, मनमाने बुलडोजर और बीजेपी के नफरत फैलाने वाले लोगों के लिए भी इसी तरह आवाज उठा सकते हैं कि इन लोगों को भारतीय नागरिक के तौर पर सुरक्षा दी जानी चाहिए।

    दो महिला सैनिकों के माध्यम से सूचना देने का नजरिया महत्वपूर्ण है, लेकिन इस नजरिए को हकीकत में बदलना चाहिए, नहीं तो यह सिर्फ पाखंड होगा। प्रोफेसर ने इसी पोस्ट में भारत की विविधता की भी तारीफ की।

    उन्होंने लिखा, आम मुसलमानों के लिए जमीनी हकीकत उससे अलग है जो सरकार दिखाने की कोशिश कर रही है, लेकिन साथ ही यह प्रेस कॉन्फ्रेंस (कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की ब्रीफिंग) दिखाती है कि भारत अपनी विविधता में एकजुट है और एक विचार के तौर पर पूरी तरह से मरा नहीं है। प्रोफेसर ने अपनी पोस्ट के आखिर में तिरंगे के साथ जय हिंद भी लिखा।

    प्रोफेसर अली खान के समर्थन में क्या बोले कांग्रेस अध्यक्ष

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रोफेसर अली खान की गिरफ्तारी पर कहा है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सशस्त्र बलों, ब्यूरोक्रेट्स, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और उनके परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है। मैं किसी भी इंसान को बदनाम करने, उसे परेशान करने, बिना वजह गिरफ्तार करने या किसी का कारोबार बर्बाद करने की कड़ी निंदा करता हूं, चाहे ये किसी छोटे गुट ने किया हो या सरकार की ओर से चूक हुई हो।

    अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर की गिरफ्तारी यह दिखाती है कि बीजेपी उन लोगों से डरती है जो उसकी बातों से सहमत नहीं होते। सरकार से सवाल करना देशद्रोह नहीं होता।

    देश के लिए काम करना और सरकार की गलतियों पर सवाल उठाना, दोनों साथ-साथ हो सकते हैं। बीजेपी को ये गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि वह लोकतंत्र के नाम पर तानाशाही चला सकती है। लोकतंत्र को मजबूत बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

    भाजपा नेता एवं पूर्व सांसद रितेश पांडेय ने गिरफ्तारी को ठहराया अवैध

    उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर से पूर्व सांसद और भारतीय जनता पार्टी के नेता रितेश पांडेय ने अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर की गिरफ्तारी को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। उन्होंने अपने एक्स पर प्रोफेसर के समर्थन में अपनी बात रखी और उनकी रिहाई की मांग की।

    रितेश पांडेय ने लिखा कि मैं प्रोफेसर अली खान को व्यक्तिगत रूप से जानता हूं। हम दोनों बहुत समय से मित्र हैं। मैं उनके परिवार से भी अच्छी तरह परिचित हूं। प्रोफेसर एक भले और समझदार व्यक्ति हैं, जिनके राष्ट्र के प्रति समर्पण पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता।

    जिस इंटरनेट मीडिया पोस्ट के आधार पर प्रोफेसर के खिलाफ केस दर्ज किया गया और गिरफ्तारी हुई, उसे उन्होंने पहले ही हटा लिया था। पोस्ट में ऐसी कोई बात नहीं थी, जिसके लिए शिकायत या गिरफ्तारी की जाए। मैं उम्मीद करता हूं कि प्रोफेसर अली खान के साथ शीघ्र न्याय हो।

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