जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान' की पूर्व ब्रांड अंबेसडर परिणिति चोपड़ा के नागरिकता संशोधन बिल पर आए ट्वीट के बाद राजनीतिक घमासान मच गया। कहा गया कि परिणिति के ट्वीट के बाद हरियाणा सरकार ने उन्‍हें ब्रांड अंबेसडर के पद से हटा दिया, जबकि यह सच नहीं है। हमने भी इसे लेकर एक खबर प्रकाशित की थी। अब नई जानकारी आई है कि परिणिति सिर्फ मई 2016 से लेकर अप्रैल 2017 तक ही बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रांड अंबेसडर थीं। अप्रैल 2017 के बाद से परिणिति चोपड़ा 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान' की ब्रांड अंबेसडर नहीं हैं।

महिला व बाल कल्‍याण विभाग के प्रवक्‍ता ने बताया कि हरियाणा सरकार ने 2016 में एक साल के लिए परिणिति चोपड़ा से एक एमओयू साइन किया था। इसकी अवधि मई 2016 से लेकर अप्रैल 2017 तक ही थी। इसे अप्रैल 2017 के बाद कभी भी नवीनीकृत नहीं किया गया।

परिणिति के ट्वीट के बाद जागरण ने हरियाणा में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के प्रोजेक्ट डायरेक्टर योगेंद्र मलिक से पूछा था तो उन्होंने कहा कि आप बहुत पुरानी बात कर रहे हैं। जहां तक मेरी जानकारी है और मैं इस विभाग को देख रहा हूं, अब परिणिति चोपड़ा हमारी ब्रांड अंबेसडर (Brand ambassador) नहीं है। हालांकि कोई यह नहीं बता रहा कि परिणिति को हटाया कब गया।

परिणिति के जिस ट्वीट पर बवाल हो रहा है, उसमें उन्होंने नागरिकता संशोधन बिल के विरोध और प्रदर्शनकारियों के समर्थन में ट्वीट कर बल प्रयोग को बर्बर तक बता दिया। परिणिति का ट्वीट सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है और इस पर व्यापक बहस छिड़ी हुई है।

डिस्‍क्‍लेमर : दैनिक जागरण अखबार ने 19 दिसंबर को ''बवाल के बाद परिणिति चोपड़ा से सरकार ने झाड़ा पल्‍ला, कहा - अब हमारी ब्रांड अंबेसडर नहीं'' हेडिंग से एक खबर प्रकाशित की थी। इस खबर में दावा किया गया था कि हरियाणा सरकार ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान' की ब्रांड अंबेसडर परिणिति चोपड़ा से पल्‍ला झाड़ लिया। खबर से ऐसा लगा कि सरकार ने यह कदम परिणिति के नागरिकता संशोधन बिल पर किए गए एक ट्वीट के बाद उठाया। यह सूचना सही नहीं थी। एक जिम्मेदार मीडिया संस्थान होने के नाते Jagran.com इस त्रुटिपूर्ण खबर को वापस ले रहा है। पाठकों की असुविधा के लिए हमें खेद है।

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