नई दिल्ली, [बिजेंद्र बंसल]। हरियाणा में खनन विभाग भी आबकारी की तरह राजस्व बढ़ोतरी का बड़ा स्रोत बनेगा। इसके लिए हरियाणा सरकार ने अवैध खनन रोकने के लिए खनन माफिया पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही प्रतिबंध के दायरे से मुक्त क्षेत्रों में वैध खनन की अनुमति देने की प्रक्रिया का भी सरलीकरण कर दिया गया है।

अवैध खनन रोकने को विभाग ने किया खनन माफिया पर फोकस

फिलहाल हरियाणा में अवैध खनन से राजस्व का भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसके एक नहीं अनेक उदाहरण पिछले तीन माह में सामने आए हैं। राज्य में खनन और परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने तीन माह पहले जब अपने परिवहन विभाग की तरफ से ओवरलोडिंग डंपरों पर शिकंजा कसना शुरू किया तो तथ्य सामने आए कि पत्थर सहित अन्य निर्माण सामग्री के ओवरलोडिंग डंपर परिवहन विभाग से ज्यादा राजस्व का चूना खनन विभाग को लगा रहे हैं।

इसके बाद विधानसभा सत्र के दौरान खनन विभाग पर महालेखा नियंत्रक एवं परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट आ गई। इसमें तथ्य सामने आए कि हरियाणा में वैध खनन की अनुमति लेने वाले ठेकेदार भी महज 25 फीसद के भुगतान के बाद किसी न किसी कारण के चलते कोर्ट चले जाते हैं और तब तक कोर्ट में केस लड़ते रहते हैं जब तक उनके ठेके की समयावधि खत्म नहीं हो जाती।

ठेके की समयावधि खत्म होने के बाद ठेकेदार अपना केस वापस ले लेते हैं और विभाग के अधिकारी बकाया 75 फीसद की वसूली की ओर ध्यान ही नहीं देते। कैग रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार ने 84 में 69 ठेकेदारों के खिलाफ बकाया वसूली के लिए कोई कदम ही नहीं उठाया। इन ठेकेदारों ने एक वर्ष की अवधि में राज्य सरकार को 347 करोड़ रुपये का चूना लगाया।

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कैग रिपोर्ट में हैं हैरान करने वाले तथ्य

कैग रिपोर्ट राज्य विधानसभा पटल पर 31 मार्च 2018 को समाप्त हुए वित्त वर्ष की रिपोर्ट नवंबर 2019 में आई तो यह तथ्य भी सामने आए कि खनन माफिया पूरी तरह बेलगाम है और कई जगह खनन माफिया ने अपने फायदे के लिए यमुना नदी का बहाव ही बदल दिया। इसके चलते एक वर्ष की अवधि में खनन विभाग को 1476 करोड़ रुपये की चपत लगी। बेशक कैग ने यह रिपोर्ट भी स्वयं मौका मुआयना करके बनाई मगर अब जब खनन विभाग के मंत्री मूलचंद शर्मा स्वयं इस जांच में लगे तो उन्हें कैग की रिपोर्ट में तनिक अंतर नहीं मिला।

पिछले दिनों हरियाणा-उत्तर प्रदेश सीमा पर यमुना में चल रहे यमुना रेत के खनन को देखने पहुंचे तो हैरान रह गए। उन्होंने देखा कि जो लोग खनन कर रहे थे वे उत्तर प्रदेश के प्रशासन को यह कहकर छूट जाते कि हरियाणा की सीमा में खनन कर रहे हैं और हरियाणा प्रशासन को यह कहते कि उत्तर प्रदेश की सीमा में खनन कर रहे हैं। अधिकारियों के पास यूं तो समस्त रिकॉर्ड है मगर खनन माफिया से कहीं न कहीं उनकी भी मिलीभगत थी। इसके चलते वे कार्रवाई नहीं करते और न ही दोनों राज्यों के खनन अधिकारी आपस में समन्वय करते।

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चार जिलों में 35 डंपर जब्त कर किया 25 लाख जुर्माना

शुक्रवार रात आठ बजे से शनिवार सुबह चार बजे तक खनन और परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा जब फरीदाबाद, नूंह, गुरुग्राम तक ओवरलोडिंग डंपरों पर शिकंजा कसने निकले तो उन्हें इसमें खनन माफिया की भी मिलीभगत देखने को मिली। इस दौरान मंत्री ने अधिकारियों की टीम के साथ निरीक्षण में पाया कि ओवरलोडिंग डंपरों के अलावा अवैध खनन करके भी रातों रात पत्थरों के डंपर निकलते हैं।

इतना ही नहीं इन डंपरों को रोकने या पकडऩे के लिए कोई विशेष छापामार दल तो सड़कों पर नहीं है इसके बचाव के लिए भी एक गैंग काम करता है। हालांकि मंत्री के साथ चल रहे दल ने न सिर्फ तीन गाडिय़ां को जब्त किया बल्कि उनमें बैठे छह संदिग्ध लोगों को भी हिरासत में हिरासत में लिया। फरीदाबाद, गुरुग्राम, नूंह जिलों में निरीक्षण के दौरान मंत्री के साथ छापामार दल ने 35 गाडिय़ों को ओवरलोडिंग के तहत जब्त कर 25 लाख रुपये जुर्माना लगाया और 11 अवैध खनन की सामग्री से लदी पकड़ी।

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'' ओवर लोडिंग डंपरों की जांच में कुछ अवैध खनन के मामले भी सामने आए हैं। हम अवैध खनन रोककर विभाग का राजस्व अगले एक साल में दोगुना करने की नीति बना रहे हैं। विभाग में अभी 22 जिलों में 40 की जगह सिर्फ 14 खनन अधिकारी हैं। सीएम ने हमें बकाया रिक्तियां भी भरने की अनुमति दे दी है।

                                                                                     - मूलचंद शर्मा, खनन,परिवहन मंत्री, हरियाणा।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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