हरियाणा को मिली राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान, प्रदेश के 14 नेताओं ने संभाली दूसरे राज्यों में राज्यपाल की जिम्मेदारी
हरियाणा के 14 नेताओं ने अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमता के दम पर विभिन्न राज्यों में राज्यपाल या उपराज्यपाल का ...और पढ़ें

कर्नाटक की नव नियुक्त राज्यपाल डा सुधा यादव को मिठाई खिलाते हुए हरियाणा भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के पूर्व अध्यक्ष नवीन गोयल फोटो इंटरनेट
HighLights
हरियाणा के 14 नेता बने विभिन्न राज्यों के राज्यपाल
डॉ. सुधा यादव 14वीं नेता, बनीं राज्यपाल
हरियाणा की राजनीतिक प्रतिभा की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। हरियाणा की राजनीति का प्रभाव केवल प्रदेश तक सीमित नहीं है। प्रदेश के कई नेताओं ने अपने राजनीतिक कौशल, प्रशासनिक अनुभव और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका के दम पर दूसरे राज्यों के राजभवन तक का सफर तय किया है।
हरियाणा के ऐसे नेताओं की संख्या 14 हो गई है, जिन्होंने दूसरे राज्यों में राज्यपाल या उपराज्यपाल के रूप में जिम्मेदारी संभाली है। रेवाड़ी जिले के गांव मोतला कलां की रहने वाली भाजपा चुनाव समिति की सदस्य डॉ. सुधा यादव इस सूची में 14वीं नेता हैं, जिन्हें दूसरे राज्य का राज्यपाल बनाया गया है।
लिस्ट में ये नाम
हरियाणा से संबंध रखने वाले कई नेताओं को एक से अधिक राज्यों में राज्यपाल या उपराज्यपाल के रूप में सेवाएं देने का अवसर भी मिला है।
प्रदेश के इन नेताओं का सफर प्रदेश की राजनीति से लेकर राष्ट्रीय राजनीति और संवैधानिक पदों तक फैला हुआ है। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री, सांसद, राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता, शिक्षाविद और सेना के अधिकारी तक शामिल हैं। इन नेताओं ने अलग-अलग समय पर विभिन्न राज्यों में संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाईं और हरियाणा की राजनीतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया।
चरखी दादरी के गांव डालावास की रहने वाली चंद्रावती ने 1990 में पुडुचेरी की उपराज्यपाल बनकर इतिहास रचा था। वह हरियाणा मूल की पहली महिला थीं, जिन्हें उपराज्यपाल बनने का अवसर मिला।
उन्होंने 19 फरवरी 1990 से 18 दिसंबर 1990 तक इस पद पर सेवाएं दीं। इससे पहले वह हरियाणा की राजनीति में सक्रिय रही थीं और सांसद तथा विधायक के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। पानीपत के समालखा के रहने वाले आचार्य देवव्रत हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहने के बाद अब साल 2019 से लगातार गुजरात के राज्यपाल के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
यह भी पढ़ें- हरियाणा के प्राथमिक स्कूलों को सफाई के लिए मिलेंगे ₹8000 प्रति महीना, शिक्षा मंत्री का एलान
पंडित भगवत दयाल शर्मा का भी नाम
झज्जर जिले के बेरी के रहने वाले पंडित भगवत दयाल शर्मा हरियाणा की राजनीति का बड़ा नाम रहे हैं। वह प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे।
मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका निभाई और आगे चलकर ओडिशा तथा मध्य प्रदेश के राज्यपाल बने। उन्होंने 1977 से 1980 तक ओडिशा और 1980 से 1984 तक मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में सेवाएं दीं। उनके नाम पर रोहतक में पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय भी स्थापित है।
अंबाला के चौधरी सूरजभान रहे तीन राज्यों के राज्यपाल
अंबाला जिले के महलांवली गांव में जन्मे चौधरी सूरजभान ने हरियाणा से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। वह उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहे।
इसके अलावा उन्होंने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली और कुछ समय के लिए बिहार के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार उनके पास रहा। वह लोकसभा के उपाध्यक्ष भी रहे और हरियाणा की राजनीति में नेता प्रतिपक्ष तथा मंत्री के रूप में सक्रिय रहे।
सुरजीत सिंह बरनाला ने तय किया लंबा सफर
संयुक्त पंजाब के दौर में हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के अटेली से संबंध रखने वाले सुरजीत सिंह बरनाला का राजनीतिक सफर काफी व्यापक रहा। वह पंजाब के मुख्यमंत्री रहे और बाद में उत्तराखंड तथा तमिलनाडु के राज्यपाल बने।
उन्होंने आंध्र प्रदेश के राज्यपाल के रूप में सेवाएं दीं तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और पुडुचेरी के उपराज्यपाल या प्रशासक की जिम्मेदारी भी संभाली। उनका कार्यकाल इस बात का उदाहरण है कि एक ही नेता को अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में संवैधानिक जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।
यह भी पढ़ें- हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, कर्मचारियों के नियमितीकरण दावों पर छह महीने में होगा विचार
रणजीत दयाल, स्वरूप सिंह और सुल्तान सिंह भी बने राज्यपाल
कुरुक्षेत्र से संबंध रखने वाले लेफ्टिनेंट जनरल रणजीत सिंह दयाल सेना में वरिष्ठ अधिकारी रहे और उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। सैन्य सेवा के बाद उन्होंने पुडुचेरी तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल के रूप में जिम्मेदारी निभाई।
रोहतक जिले के गांव सांघी के रहने वाले डॉ. स्वरूप सिंह शिक्षाविद् और राजनीतिक व्यक्तित्व थे। उन्होंने केरल, गुजरात और राजस्थान में राज्यपाल के रूप में सेवाएं दीं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में उनके नाम पर चेयर भी स्थापित की गई है।
सोनीपत जिले के गांव निजामपुर माजरा के रहने वाले चौधरी सुल्तान सिंह गहलोत त्रिपुरा के राज्यपाल रहे हैं। इसी तरह पलवल जिले के गांव नचारी के रहने वाले ओमप्रकाश शर्मा नागालैंड के राज्यपाल रह चुके हैं। राज्यपाल बनने से पहले ओमप्रकाश शर्मा पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) भी रहे थे।
गणेशी लाल, रणबीर सिंह और हंसराज भारद्वाज का हरियाणा से संबंध
सोनीपत जिले के गांव थैयापुर के रहने वाले चौधरी रणबीर सिंह सिक्किम के राज्यपाल रहे। वहीं, रोहतक जिले के गढ़ी सांपला गांव में जन्मे हंसराज भारद्वाज ने दूसरे राज्यों में राज्यपाल के रूप में सेवाएं दीं।
वह केरल और कर्नाटक के राज्यपाल रहे। राज्यपाल बनने से पहले वह केंद्र सरकार में कानून एवं न्याय मंत्री के रूप में काम कर चुके थे और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी अहम भूमिका रही थी।
सिरसा के रहने वाले प्रोफेसर गणेशी लाल ओडिशा के राज्यपाल रहे। वह हरियाणा में भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे और सिरसा विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी चुने गए थे। उन्होंने 29 मई 2018 को ओडिशा के राज्यपाल का पद संभाला और अक्टूबर 2023 तक इस पद पर रहे।
सेना प्रमुख रहे जनरल वीके सिंह भी बने राज्यपाल
भिवानी जिले के गांव बापोड़ा के रहने वाले जनरल वीके सिंह भी राज्यपाल बनने वालों की सूची में शामिल हैं। सेना प्रमुख के रूप में सेवाएं दे चुके जनरल वीके सिंह बाद में राजनीति में आए और केंद्र सरकार में विदेश राज्य मंत्री रहे। उन्हें मिजोरम का राज्यपाल बनाया गया।
उनका सफर सेना से राजनीति और फिर राज्यपाल पद तक पहुंचने का उदाहरण है। अब इस सूची में रेवाड़ी जिले के गांव मोतला कलां की रहने वाली डा. सुधा यादव का नाम जुड़ने से यह बात साबित हो गई कि हरियाणा के नेताओं की राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिभाओं को पूरे देश में स्वीकार किया जाता है।
