हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, कर्मचारियों के नियमितीकरण दावों पर छह महीने में होगा विचार
हरियाणा सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेशों के बाद कर्मचारियों के सेवा नियमितीकरण के मामलों पर नए सिरे से विचार करने का निर्णय लिया है।

हरियाणा सीएम नायब सिंह सैनी (फाइल फोटो)
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों के सेवा नियमितीकरण से जुड़े मामलों पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेशों के अनुरूप नए सिरे से विचार करने का निर्णय लिया है।
इस संबंध में संबंधित विभागों को कर्मचारियों के दावों पर छह महीने के भीतर कारण सहित आदेश पारित करने होंगे। वहीं, नियमितीकरण का लाभ चाहने वाले कर्मचारियों को हाई कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से दो सप्ताह के भीतर संबंधित सरकारी विभागों में विस्तृत प्रतिवेदन जमा कराना होगा।
हरियाणा सरकार के मानव संसाधन विभाग की ओर से जारी परिपत्र में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों, निगमों एवं प्राधिकरणों के प्रबंध निदेशकों और मुख्य प्रशासकों, मंडल आयुक्तों तथा उपायुक्तों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
परिपत्र में हाई कोर्ट के 23 अप्रैल 2026 के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि नियमितीकरण के दावों पर नए सिरे से विचार करते समय सुप्रीम कोर्ट द्वारा मदन सिंह बनाम अन्य मामले में निर्धारित सिद्धांतों को ध्यान में रखा जाए। संबंधित कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर देते हुए प्रत्येक मामले में अलग-अलग कारण सहित आदेश पारित करना होगा।
परिपत्र के अनुसार, हाई कोर्ट ने 22 जनवरी 2025 को संजीव कुमार बनाम हरियाणा सरकार एवं अन्य मामले में 151 याचिकाओं का निपटारा करते हुए नियमितीकरण से जुड़े विभिन्न निर्देश दिए थे। इसके बाद राज्य सरकार और अन्य पक्षों की अपीलों पर 23 अप्रैल 2026 को खंडपीठ ने आदेश पारित किया।
1996 नीती के तहत कोई नहीं होगा नियमित
निर्देशों के अनुसार, वर्ष 1996 की नीति के तहत किसी याचिकाकर्ता को नियमित नहीं किया जाएगा। वर्ष 2003 और 2011 की नीतियों के तहत नियमितीकरण का दावा करने वाले कर्मचारियों के मामलों पर छह महीने के भीतर निर्णय लेना होगा। साल 2003 की नीति के तहत पात्र पाए जाने वाले कर्मचारियों को हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तारीख से बकाया राशि का लाभ मिल सकता है।
इसी प्रकार, वर्ष 2011 की नीति के तहत पात्र कर्मचारियों को भी याचिका दाखिल करने की तारीख से बकाया राशि का लाभ दिए जाने का निर्देश है। इन बकाया राशियों पर ब्याज नहीं मिलेगा।
वर्ष 2014 में नियुक्ति पत्र जारी करके पहले ही नियमित किए जा चुके कर्मचारियों को पिछली नियमितीकरण नीतियों का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं, वर्ष 2003 या 2011 की नीति के तहत पात्र नहीं पाए जाने वाले कर्मचारियों के दावों पर वर्ष 2024 के अधिनियम के अनुसार विचार किया जाएगा। वर्ष 2014 की नीति के तहत उनके दावों पर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद पुनर्विचार किया जाएगा।
मौजूदा स्थिति बनाए रखने के निर्देश
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक प्रत्येक कर्मचारी के दावे पर उचित आदेश पारित नहीं हो जाता, तब तक संबंधित कर्मचारियों की मौजूदा स्थिति बनाए रखी जाएगी।
नियमितीकरण के दावे पर नए सिरे से विचार करने के लिए कर्मचारी को हाई कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के दो सप्ताह के भीतर संबंधित विभाग में विस्तृत प्रतिवेदन देना होगा। मानव संसाधन विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने और जरूरत के अनुसार संबंधित कर्मचारियों को इसकी जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।
