नूंह के स्कूलों में लागू होगा 'जापानी मॉडल', ग्रीन और कार्बन न्यूट्रल बनेंगे जिले के सरकारी विद्यालय
नूंह के सरकारी स्कूलों को जापान के विद्यालयों की तर्ज पर ग्रीन और कार्बन न्यूट्रल बनाने की पहल शुरू हुई है।

जापान की शिक्षण पद्धति से नूंह के स्कूल बनेंगे कार्बन न्यूट्रल।
HighLights
जापान से लौटे डॉ. पवन यादव ने अनुभव साझा किए।
जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, कचरा प्रबंधन पर जोर दिया गया।
नूंह के स्कूलों को ग्रीन और कार्बन न्यूट्रल बनाना।
जागरण संवाददाता, नूंह। जिले के सरकारी स्कूलों को ग्रीन स्कूल और कार्बन न्यूट्रल स्कूल बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग ने अनूठी पहल शुरू की है।
इसी कड़ी में जापान टीचर्स एक्सचेंज प्रोग्राम से लौटे डॉ. पवन यादव ने शिक्षकों के साथ जापान के विद्यालयों की शिक्षण पद्धति और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अनुभव साझा किए।
जापान यात्रा शिक्षकों के लिए खास
लघु सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी सुरेंद्र बजाड़ ने कहा कि जापान यात्रा के अनुभव शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक हैं। इन्हें स्कूलों में व्यवहारिक रूप से लागू कर नूंह को ग्रीन स्कूलों के मामले में आदर्श जिला बनाया जा सकता है।
डॉ. पवन यादव ने बताया कि जापान के स्कूलों में विद्यार्थी सफाई, भोजन वितरण और कचरे के पृथक्करण जैसी जिम्मेदारियां स्वयं निभाते हैं।
जिम्मेदारी की भावना
इससे उनमें अनुशासन, सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। उन्होंने पीयर लर्निंग, समूह चर्चा और गतिविधि आधारित शिक्षण को भी प्रभावी बताया। बैठक में जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, अपशिष्ट प्रबंधन और हरित क्षेत्र विकसित करने पर जोर दिया गया।
जिला एफएलएन कोऑर्डिनेटर कुसुम मलिक ने कहा कि ग्रीन स्कूल का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र हासिल करना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को विद्यार्थियों की दिनचर्या का हिस्सा बनाना है। कार्यक्रम में जिले के 20 ग्रीन स्कूलों के शिक्षक, इको क्लब प्रभारी और पीरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि मौजूद रहे।