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    दिल्ली से 80 KM दूर... टापू बना नूंह का ये गांव, बच्चों का स्कूल तक जाना छूटा; खाने के पड़े लाले

    Updated: Thu, 09 Jan 2025 10:10 AM (IST)

    राजधानी दिल्ली से 80 किलोमीटर दूर नूंह का जेवंत गांव पिछले कई महीनों से टापू बना हुआ है। आलम यह है कि बच्चों का स्कूल तक जाना छूट गया है। वहीं खाने भी लाले पड़ रहे हैं। अब ऐसे में लोगों को कहीं जाना पड़ता है तो हवा भरी ट्यूब का सहारा लेना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शासन तक समाधान की मांग की लेकिन कुछ नहीं हुआ।

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    नूंह का जेवंत गांव टापू बना हुआ है। जागरण फोटो

    मोहम्मद मुस्तफा, जागरण नूंह। देश की राजधानी दिल्ली से महज 80 किमी दूर नूंह के जेवंत गांव का यह नजारा देखिए। चारों तरफ पानी ही पानी और उसके बीच पिछले सितंबर से कटती ग्रामीणों की जिंदगी। कहीं आना-जाना हो तो ट्यूब ही सहारा है। यहां मानसून के समय जो जलभराव हुआ, उसने पूरे गांव को ही टापू में बदल दिया। 

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    हवा भरी ट्यूब का सहारा ले रहे ग्रामीण

    सड़कें पानी में डूब गईं और पड़ोसी गांव व नजदीकी शहर से गांव का संपर्क टूट गया। बच्चों का स्कूल जाना बंद हो गया। खेतों में पानी जमा होने से ग्रामीण रबी की फसल की बोआई तक नहीं कर पाए। पशुओं के लिए चारा मिलना बंद हो गया। परिवार के भरण-पोषण के लाले पड़े तो ग्रामीणों ने हवा भरी ट्यूब का सहारा लिया और पिछले तीन माह से इसी ट्यूब के सहारे वे गांव से 500 मीटर दूर मुख्य मार्ग तक पहुंचते हैं, फिर परिवार के लिए कुछ जुटा पाते हैं। 

    (यह गांव पिछले तीन महीने से टापू बना हुआ है। जागरण फोटो)

    अब तो बच्चे भी ट्यूब पर ही पानी पार कर स्कूल जाते हैं। सितंबर के अंत में वर्षा का सिलसिला तो थम गया, लेकिन ग्रामीणों का संकट खत्म नहीं हुआ। उन्होंने प्रशासन से लेकर शासन तक से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने समस्या का समाधान नहीं किया। 

    ग्रामीणों का क्या कहना?

    ग्रामीणों का कहना है कि जेवंत अन्य के मुकाबले नीचे है। इसलिए अन्य गांवों का पानी भी यहीं आकर ठहर गया। गांव में 20 से अधिक परिवार रहते हैं, लेकिन हालात ऐसे हैं कि घर से बाहर अगला कदम पानी में ही पड़ता है। 

    तीन महीने से गांव टापू में तब्दील

    लोगों ने बताया कि करीब तीन महीने से गांव टापू में तब्दील है। ऐसे में जितना भूसा जमा था, वह समाप्त हो चुका है। पशुओं के लिए चारा नहीं मिलने के कारण कुछ लोगों ने दुधारू पशुओं को औने-पौने दाम पर बेच दिए। कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जो अपना घर छोड़कर दूसरे के मकान में रहने को विवश हैं। 

    वहीं, सैकड़ों एकड़ जमीन पानी में डूबा है, इसलिए बोआई भी नहीं हो पाई। ऐसे में इस बार अनाज के भी लाले पड़ते दिखाई दे रहे हैं। जिला प्रशासन समाधान शिविर तो लगाता है, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है।

    क्या बोले उपमंडल अधिकारी

    जेवंत गांव का यह मामला अभी मेरे संज्ञान में आया है। गांव में पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया जाएगा। कोशिश करूंगा कि ग्रामीणों की समस्या का जल्द समाधान कराया जाए। - संजय कुमार, उपमंडल अधिकारी, पुन्हाना