सूक्ष्म सिचाई से होती है पानी और खाद की बचत
विभाग सूक्ष्म सिचाई पर और तालाबों पर 85 प्रतिशत अनुदान दे रहा है। सूक्ष्म सिचाई से न केवल पानी की बचत होती है बल्कि खाद व दवा की भी बचत होती है। उक्त जानकारी किसानों के खेतों में लगाई गई प्रदर्शनी प्लांट में फसल निरीक्षण के दौरान मिकाडा विभाग के प्रशासक डा. सतबीर सिंह कादयान ने दी।
जागरण संवाददाता,नारनौल: विभाग सूक्ष्म सिचाई पर और तालाबों पर 85 प्रतिशत अनुदान दे रहा है। सूक्ष्म सिचाई से न केवल पानी की बचत होती है बल्कि खाद व दवा की भी बचत होती है। उक्त जानकारी किसानों के खेतों में लगाई गई प्रदर्शनी प्लांट में फसल निरीक्षण के दौरान मिकाडा विभाग के प्रशासक डा. सतबीर सिंह कादयान ने दी।
उन्होंने बताया कि किसानों को कृषि की समय पर सही जानकारी देने के उद्देश्य से उत्तम कृषि क्रियाओं का किसान जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। कपास, धान व गन्ने की फसल पर किसानों के खेतों में प्रदर्शनी प्लांट लगाकर किसानों को उनके खेतों पर ही उनके परिणाम दिखा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों ने गांव मांडोला में ड्रिप, मिनी फव्वारा व फव्वारा विधियों पर प्रदर्शनी प्लांट लगाया गया, जिससे किसानों को कपास की फसल के बारे में जानकारी मिल सके।
मिकाडा विभाग से उपनिदेशक डा. मोहिदर सिंह ने बताया कि कपास में जल प्रबंधन और पोषक तत्व प्रबंधन से कृषि में लगाने वाले खर्च को बहुत हद तक सीमित किया जा सकता है। इस बार अच्छी वर्षा हुई है तथा फसलों की बढ़वार अच्छी चल रही है। किसानों को अगर सफेद मक्खी का प्रकोप दिखे तो 300 एमएल डिमिथोएट 30 ईसी या मेटासिस्टाक्स 25 ई सी का 250 लीटर पानी के साथ स्प्रे करें। अगस्त में हरा तेला व सूंडियों का प्रकोप ज्यादा होता है। इस दिशा में 600 से 700 एमएल परफेनोफोस 50 ईसी या 75 एमएल स्पिनोसैड 45 एससी का प्रयोग करें। अगर खेतों में मिलीबग का आक्रमण हो तो तीन एमएल परफेनोफोस 50 ईसी का स्प्रे करें। बरसात के मौसम में 60 से 80 एमएल सर्फेक्टेंट यानी चिपकाने व स्क्रैप फैलाने वाले पदार्थ का प्रयोग अवश्य करें।
एसडीओ विजेंद्र सिंह ने बताया कि अगर किसानों को फसल प्रबंधन व जल प्रबंधन की कोई भी जानकारी लेनी हो तो मिकाडा विभाग में संपर्क कर सकते हैं। निबेहड़ा एक्सटेंशन पाइप लाइन पर बलाना जैनपुर, व नांगल माला में कार्य शुरू हो चुका है ताकि किसानों को सिचाई के लिए पानी की समस्या से जल्द निजात मिल सके।
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