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    थायराइड बीमारी का इलाज आयुर्वेदिक चिकित्सा से संभव : डाक्टर राजीव गौड़

    By JagranEdited By:
    Updated: Wed, 02 Mar 2022 07:40 PM (IST)

    थायराइड की बीमारी से दुनिया भर के लोग प्रभावित हैं। भारत भी इस बीमारी से अछूता नहीं है।

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    थायराइड बीमारी का इलाज आयुर्वेदिक चिकित्सा से संभव : डाक्टर राजीव गौड़

    जागरण संवाददाता, नारनौल: थायराइड की बीमारी से दुनिया भर के लोग प्रभावित हैं। भारत भी इस बीमारी से अछूता नहीं है। थायराइड रोग पर हुए विभिन्न अध्ययनों एवं सर्वे से पता चलता है कि भारत में लगभग 42 मिलियन लोग थायराइड रोगों से पीड़ित हैं। रिपोर्ट की माने तो भारत में हर दस में से एक आदमी थायराइड की चपेट में है। थायराइड मानव शरीर की एक ग्रंथी है। जब इस थायराइड की ग्रंथी में कुछ परेशानी आ जाती है तो यह ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में थायराइड हार्मोन का उत्पादन नहीं करती है। जिससे थायराइड की बीमारी उत्पन्न होती है। हाइपरथायरायडिज्म (ओवर एक्टिव थायराइड) तब होता है। जब आपकी थायराइड ग्रंथि अधिक मात्रा में थायरोक्सिन हार्मोन का निर्माण करने लगती है। वहीं हाइपोथायरायडिज्म तब होता है, जब आपका शरीर पर्याप्त मात्रा थायराइड हार्मोन बनना बंद कर देता है। थायराइड एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि है जो गर्दन में होती है। यह आपके शरीर की ऊर्जा को नियंत्रित करके उसे जरूरत के हिसाब से खर्च करने का कार्य करती है। हाइपोथायरायडिज्म की बीमारी अधिक उम्र की महिलाओं में अधिकांश देखने को मिलती है।

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    थायराइड के लक्षण

    शरीर के वजन में अचानक से वृद्धि होने लगती है तथा शरीर में सूजन भी आने लगती है, शरीर का तापमान कम होने लगता है। बहुत ज्यादा थकावट महसूस होने लगती है, स्मरण शक्ति तथा सोचने की क्षमता में कमी आने लगती है। शरीर में तापमान सहने की समर्थता बिल्कुल भी नही रह जाती है, आंखों में जलन होना तथा आंख से संबंधित अन्य समस्याएं होने लगती है, कुछ लोगों के हाथ तथा पैरों की अंगुलियों में कंपन की समस्या भी देखने को मिलती है, चिड़चिड़ाहट होने की भी समस्या आ सकती है। ----

    थायराइड के कारण :

    भोजन में नमक की अधिक या फिर बहुत ही कम मात्रा के कारण थायराइड की बीमारी हो सकती है। तनाव को अधिकांश बीमारियों की जड़ मानी जाती है, उसी प्रकार थायराइड की बीमारी भी तनावपूर्ण जीवन जीने से होती है। थायराइड में आनुवांशिक कारणों की बहुत बड़ी भूमिका होती है। यदि परिवार में माता-पिता को थायराइड की बीमारी है तो बच्चों में भी होने संभावना रहती है। गर्भवती महिलाओं में जब हार्मोन परिवर्तन होता है तो उस समय भी थायराइड की बीमारी होने की संभावना बन सकती है। यदि आप अपनी डाइट में अधिक मात्रा में सोया से निर्मित अधिक खाद्य पदार्थों का सेवन करते है तो यह भी थायराइड का कारण बन सकता है।

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    थायराइड का आयुर्वेद में उपचार :

    डाक्टर राजीव गौड़ ने बताया कि आयुर्वेदिक चिकित्सा में थायरॉइड का सबसे अच्छा उपचार उपलब्ध है। आयुर्वेद के अनुसार थायरॉइड रोग की उत्पत्ति वात, पित्त तथा कफ दोष के असंतुलन के कारण होती है। आयुर्वेदिक उपचार के द्वारा त्रिदोष (वात दोष, पित्त दोष तथा कफ दोष) का निवारण करके थायरॉइड की बीमारी से छुटकारा दिलाया जाता है। इसके अतिरिक्त आयुर्वेद की पंचकर्म थेरेपी की मदद से शरीर का शुद्धिकरण करके शीघ्र ही थायरॉइड की बीमारी का निदान किया जाता है। पंचकर्म की वमन थेरेपी उपचार से पेट की सफाई करके शरीर के विषाक्त पदार्थ निकाल दिए जाते है, जिससे कफ व पित्त का निवारण हो जाता है और थायराइड की बीमारी में आराम मिल जाता है। इसके अलावा पंचकर्म में विरेचन थेरेपी भी उपलब्ध है, जिससे शरीर में जमे बलगम, पित्त रस तथा फैट से निजात मिल जाती है। इस सभी थेरेपी के अलावा स्वेदन, रसायन, लेप जैसी आयुर्वेदिक चिकित्सा है, जो थायराइड को जड़ से पूरी तरह खत्म करने में सक्षम है।

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    थायराइड की आयुर्वेदिक दवा:

    थायराइड की जांच एवं लक्षणों के आधार पर आयुर्वेद में कुछ ऐसी हर्बल जड़ी बुटी एवं औषधियां हैं। आयुर्वेद में ऐसे बहुत सारे काढे (क्वाथ) हैं, जिनके द्वारा बीमारी को बहुत ही जल्दी नियंत्रित किया जाता है। इसमें अश्वगंधा निर्गुंडी, वच, कचनार, गुग्गल का काढ़ा शामिल है।

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    थायराइड होने पर क्या करें और क्या न करें :

    डाक्टर राजीव गौड़ ने बताया कि अपने भोजन में मोटा अनाज (बाजरा, गेहू, जौ, मूंग दाल) को शामिल करें। नियमित रूप से योग एवं व्यायाम करें, दिन में सोने से बचें। समुद्री नमक में पर्याप्त मात्रा में गुण पाए जाते हैं, इसलिए अपने भोजन में समुद्री नमक को जगह दें। हरी सब्जियां, छाछ तथा ऐसे खाद्य पदार्थों को अपने खानपान में शामिल करें, जिनसे कम कफ बनाता हो। तैलीय भोजन, रिफाइंड से निर्मित खाद्य पदार्थ, चना, मटर, आलू का ज्यादा सेवन न करें। बेकरी खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा न करें। एक ही स्थान पर बहुत अधिक समय तक बैठने से बचे। अधिक ठंडा और अधिक गर्म लेने से बचें।