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    Uranium News: नारनौल के ढोसी पहाड़ पर यूरेनियम के भंडार की तलाश, जल्द आएगी सर्वे रिपोर्ट

    परमाणु ऊर्जा के मुख्य स्नोत यूरेनियम की तलाश लंबे समय से चल रही है। राजस्थान उत्तर पूर्व सहित कई राज्यों में इसके भंडार मिले है। हरियाणा जिले के नारनौल में बड़ा भंडार मिलने के संकेत के बाद परमाणु ऊर्जा विभाग ने सर्वे शुरू किया है। सर्वे 30 अप्रैल तक चलेगा।

    By Sanjay PokhriyalEdited By: Updated: Fri, 09 Apr 2021 12:41 PM (IST)
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    यह चांदी से 40 गुना अधिक और सोने से 500 गुना अधिक मात्रा में उपलब्ध है।

    बलवान शर्मा, नारनौल। परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा यूरेनियम की संभावनाओं को लेकर किया जा रहा हेलीबोर्न सर्वे पिछले एक पखवाड़े से लगातार जारी है। नारनौल के ढोसी के पहाड़ व आस-पास के इलाके में दो हेलीकाप्टर की मदद से एक सप्ताह तक सर्वे किया गया। परमाणु ऊर्जा विभाग की टीम इस दौरान इसी एरिया में टेंट लगाकर जमी रही।

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    टीम ने अब राजस्थान के झुंझनू व खेतड़ी एरिया में सर्वे शुरू कर दिया है। विभाग के अधिकारी जमीन के स्तर से 60 मीटर की ऊंचाई से हेलीबोर्न सर्वे कर रहे हैं। फिलहाल यह सर्वे 30 अप्रैल तक लगातार चलेगा। हालांकि इसके बाद मौसम के हालातों को देखते हुए कार्य किया जाएगा। सूत्रों की मानें तो नारनौल के ढोसी के पहाड़ व आस-पास के एरिया में यूरेनियम प्रचुर मात्रा में मिल सकता है। इस क्षेत्र में कितना यूरेनियम है और इसकी गुणवत्ता क्या है, यह तो सर्वे पूरा होने के बाद ही पता चल सकेगा। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सर्वे से संबंधित तमाम डाटा परमाणु ऊर्जा विभाग के मुख्यालय हैदराबाद में उपलब्ध करवा दिया जाएगा। सर्वे में कितनी सफलता मिली, इसकी जानकारी भी हैदराबाद से ही मिल सकेगी।

    यूरेनियम: पांच तथ्य

    यह चांदी से 40 गुना अधिक और सोने से 500 गुना अधिक मात्रा में उपलब्ध है।

    पृथ्वी में इतनी मात्रा में है कि दशकों तक उससे नाभिकीय संयंत्र चलाए जा सकते हैं।

    यूरेनियम तत्व की उत्पत्ति 6.6 अरब वर्ष पूर्व सुपरनोवा तारों के विस्फोट के दौरान हुई। यह पृथ्वी पर हर जगह मिलता है।

    खोज जर्मन रसायनशास्त्री र्माटिन हेनरिख क्लापरोथ ने वर्ष 1789 में की थी। यूरेनियम ऑक्साइड का प्रयोग सिरामिक टाइलों और कांच को रंगने के लिए किया जाता था। क्लापरोथ ने यूरेनियम की खोज इसके अयस्क पिचब्लेंड में की।

    परमाणु बम में यह चेन रिएक्शन अनियंत्रित गति से आगे बढ़ती जाती है. इससे अत्यधिक ऊर्जा निकलती है और विस्फोट होता है। हिरोशिमा पर गिराए गए बम की शक्ति 15 किलोटन यूरेनियम के विस्फोट के समान थी।

    इन इलाकों में तलाशी जा रही है यूरेनियम की संभावनाएं:

    हरियाणा के लोहारू, महेंद्रगढ़ व नारनौल एरिया में यूरेनियम होने की संभावना है। इनके अलावा राजस्थान के खेतड़ी, नीम का थाना, उदयपुरवाटी, खंडेला, श्रीमाधोपुर, रामगढ़, मकराना, पीसांगन, ब्यावर, राजसमंद, नाथद्वारा से सादड़ी, सोजत,बिलारा, मेड़ता सिटी, डिडवाना, सीकर, नवलगढ़, झुंझुनू, चिड़ावा, पिलानी एरिया में यूरेनियम होने की संभावना है।

    धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है ढोसी का पहाड़: नारनौल का ढोसी के पहाड़ का जिक्र श्रीमदभागवत में भी है। महर्षि च्वयन ने इसी पहाड़ पर तपस्या की थी और दुनिया को सबसे पहले च्वयनप्राश बनाने वाले ये ही ऋषि माने जाते हैं।

    60 मीटर ऊंचाई से करेंगे सर्वे: हेलीकॉप्टर टीम इंचार्ज सूर्यवीर सिंह ने बताया कि क्षेत्र में 60 मीटर ऊंचाई से सर्वे किया जा रहा है। तकनीक सहयोग हमारी टीम कर रही है। लेकिन इस बारे में आपको हम इससे ज्यादा कुछ नहीं बता सकते।

    परमाणु ऊर्जा विभाग के सर्वे इंचार्ज अभिनव कुमार ने बताया कि हमारा कार्य सर्वे करना है। फिलहाल 30 अप्रैल तक यह कार्य चलेगा। इससे आगे मौसम पर काफी कुछ निर्भर करेगा। इसको लेकर हम मीडिया से कोई बात नहीं कर सकते हैं। सर्वे रिपोर्ट हैदराबाद मुख्यालय में दे दी जाएगी।