नारनौल में दिखा भक्ति का अद्भुत संगम, दो अलग-अलग संगठनों की प्रभात फेरियों से गूंजा राधे-राधे
नारनौल में दो अलग-अलग धार्मिक संगठनों द्वारा निकाली गई प्रभात फेरियों ने भक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। 'राधे-राधे' के जयकारों से शहर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भजन गाए, नृत्य किया और भगवान कृष्ण के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। प्रभात फेरियों ने एकता और सद्भाव का संदेश दिया।
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राधा कृष्ण प्रभात फेरी संगठन की ओर से आयोजित प्रभात फेरी में राधा नाम में झूमते भक्तजन । सौ- संगठन
जागरण संवाददाता, नारनौल। रविवार की सुबह नारनौल भक्ति रस से सराबोर रहा। संयोगवश शहर में दो अलग-अलग धार्मिक संगठनों की प्रभात फेरियों ने वातावरण को राधे-राधे के संकीर्तन से ऐसा गुंजायमान किया कि गलियों में मानो वृंदावन उतर आया हो। दोनों आयोजनों में सैकड़ों भक्तों ने शिरकत की और पुष्प वर्षा, ढोल-मर्दंग तथा जयकारों से सुबह पूरी तरह भक्तिमय हो गई। दोनों प्रभात फेरियों ने नारनौल की सुबह को आध्यात्मिक आभा से भर दिया और पूरे शहर में राधे-राधे के संकीर्तन की गूंज देर तक सुनाई देती रही।
श्री राधा कृष्ण प्रभात फेरी संगठन की 150वीं फेरी
गोवत्स श्री राधा कृष्ण महाराज की प्रेरणा से शुरू हुए श्री राधा कृष्ण प्रभात फेरी संगठन की 150वीं प्रभात फेरी रविवार सुबह सात बजे भव्य उत्साह के साथ निकली। यजमान महेश चंद पुजारी ने परिवार सहित उपस्थित भक्तों का चंदन तिलक कर अभिनंदन किया। ठाकुर जी की आरती के बाद फेरी यजमान के निवास से प्रारंभ होकर जेठू बाबा मंदिर व नरसिंह मंदिर तक पहुंची।
ढोल-मर्दंग, मंजीरों और संकीर्तन से पूरा मार्ग राधे नाम से गुंजता रहा। महिलाओं ने नृत्य कर और बच्चों ने ढोलक-मंजीरे बजाकर भक्ति का आनंद बढ़ाया। रास्ते में श्रद्धालुओं ने छतों और गलियों से फूल बरसा कर स्वागत किया। राधा संकीर्तन रथ के साथ चलते भक्तों की टोली में उल्लास देखने योग्य था। फेरी का समापन सनातन जयकारों और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। अगली प्रभात फेरी महावीर चौक स्थित विजेंद्र संघी व रानी संघी के निवास स्थान से निकलेगी।
गीता जयंती पर प्रभात फेरी संगठन की 169वीं फेरी
गीता जयंती के उपलक्ष्य में प्रभात फेरी संगठन की 169वीं प्रभात फेरी रविवार सुबह 6.30 बजे पुरानी मंडी नजदीक जलमहल गेट से आरंभ हुई। यजमान विजय सिंह यादव ने परिवार सहित आरती कर प्रभात यात्रा को प्रारंभ कराया। ढोल-नगाड़ों की मधुर ताल पर ‘राधे-राधे’ नाम का जाप करते भक्त पुरानी मंडी की गलियों से आगे बढ़ते रहे। जैसे ही संकीर्तन रथ गुजरता, लोग घरों से बाहर आकर और छतों से फूल बरसाकर स्वागत करते रहे।
माहौल इतना भक्तिमय था कि श्रद्धालुओं ने इसे वृंदावन जैसा अनुभव बताया। संगठन गो सेवा व समाज सेवा कार्यों से भी जुड़ा है। समय-समय पर गोशाला में दवाइयां, गो सवामणी और अन्य सेवाएं की जाती हैं। फेरी का समापन सनातन जयकारों और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। श्रद्धालुओं को गीता जयंती की शुभकामनाएं भी दी गईं।

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