बागवनी से बदलेगी रेतीले क्षेत्र की काया
कृषि मंत्री जेपी दलाल ने सतनाली में आयोजित समारोह में 21 अगस्त को भिवानी जिले के उपमंडल लोहारू के गांव खरखड़ी में होने वाले क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के शिलान्यास के लिए क्षेत्र की जनता को निमंत्रण दिया। इस मौके पर पूर्व शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा भी मौजूद थे।
संवाद सहयोगी, महेंद्रगढ़: कृषि मंत्री जेपी दलाल ने सतनाली में आयोजित समारोह में 21 अगस्त को भिवानी जिले के उपमंडल लोहारू के गांव खरखड़ी में होने वाले क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के शिलान्यास के लिए क्षेत्र की जनता को निमंत्रण दिया। इस मौके पर पूर्व शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा भी मौजूद थे।
जेपी दलाल ने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल भिवानी जिले के गांव खरखड़ी में बागवानी केंद्र का शिलान्यास करेंगे तथा बागवानी फसलों पर आयोजित होने वाली संगोष्ठी में हिस्सा लेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री लाला लाजपत राय पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान विश्वविद्यालय के हरियाणा पशुविज्ञान केंद्र बहल का भी शिलान्यास करेंगे।
यह क्षेत्र अत्यधिक भौगोलिक परिस्थितियों से चिन्हित है, जो बेर, आंवला, अनार, नींबू, खजूर, प्याज, बेल वाली फसलें, खीरा, आलू आदि फलों-सब्जियों के उत्पादन के लिए बहुत अनुकूल है। इनके अलावा लहसुन, हल्दी, मिर्च और मसाले जैसे जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी आदि की भी इस क्षेत्र में अच्छी पैदावार ली जा सकती है।
उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, खरकड़ी में बागवानी उत्पादन से संबंधित सभी विषयों पर अनुसंधान कार्य होगा। इसमें देश व विदेश की सभी जगहों पर उपलब्ध फलों, सब्जियों, औषधीय और सुगंधित पौधों, मसालों की किस्मों का संग्रह भी शामिल होगा। फलों, सब्जियों, औषधीय व सुगंधित पौधों, मसालों की उन्नत व संकर किस्मों का विकास जो कीटों और रोगों के प्रतिरोधी पर कार्य होगा। बागवनी से रेतीले क्षेत्र की काया बदल जाएगी। इस मौके पर देवेंद्र यादव खातोद, अमित मिश्रा, अमित माधोगढ़, पार्षद देवेंद्र, पार्षद सोनू, पार्षद निखिल तनेजा, सतवीर सिंह व दिनेश खेरवाल के अलावा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
लंपी वायरस के लिए वैक्सीन तैयार: कृषि मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि पशुओं में होने वाली लंपी वायरस की बीमारी के लिए हरियाणा सरकार ने एक नई वैक्सीन तैयार की है। यह वैक्सीन सभी जिलों में भिजवा दी गई है। जल्द ही और वैक्सीन भी ही भिजवा दी जाएंगी। हरियाणा में यह बीमारी सीमित पशुओं में है। इसके लिए पशुपालकों को घबराने की जरूरत नहीं है। पशुपालन एवं डेरी विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जिन पशुओं में इस बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं उन पशुओं को समय पर वैक्सीन लगाई जाए ताकि इस बीमारी को यही रोका जा सके।
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