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    नई शिक्षा नीति लागू करने पर वर्कलोड के साथ शैक्षणिक कैलेंडर में आएगा बदलाव : चौधरी

    By JagranEdited By:
    Updated: Fri, 17 Jun 2022 06:38 PM (IST)

    कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. मंजुला चौधरी ने कहा कि नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद वर्कलोड के साथ-साथ शैक्षणिक कैलेंडर में बदलाव आएगा।

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    नई शिक्षा नीति लागू करने पर वर्कलोड के साथ शैक्षणिक कैलेंडर में आएगा बदलाव : चौधरी

    - कुवि में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए आयोजित कार्यशाला का समापन - 58 महाविद्यालयों के 149 प्रतिभागियों ने कार्यशाला में लिया हिस्सा जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. मंजुला चौधरी ने कहा कि नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद वर्कलोड के साथ-साथ शैक्षणिक कैलेंडर में बदलाव आएगा।

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    इससे विश्वविद्यालय का शैक्षणिक परि²श्य पूरी तरह बदल जाएगा। इतना ही नहीं नई शिक्षा नीति के लागू होते की बेरोजगारी की बजाय रोजगार के लिए सक्षम युवा न मिलने की बड़ी समस्या का भी समाधान हो जाएगा। वह शुक्रवार को इंस्टिट्यूट आफ इंटिग्रेटिड एंड आनर्स स्टडीज (आइआइएचएस)

    की ओर से सीनेट हाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर आयोजित कार्यशाला के समापन अवसर पर संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वरूप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत है। आइआइएचएस के प्राचार्य प्रो. संजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि एनईपी 2020 का उद्देश्य श्रम की गरिमा को बढ़ाना और पूरे समाज को शिक्षण संस्थानों के साथ जोड़ना है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला अपने आप में पूरी तरह से सफल रही है। इस कार्यशाला में 58 महाविद्यालयों 149 प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। कार्यशाला की को-आर्डिनेटर प्रो. अनीता दुआ ने कहा कि एनईपी का आने वाले समय में अत्यंत सकारात्मक प्रभाव होगा और युवा पीढ़ी कुशल, शिक्षित और संस्कारित बनेगी। डीन आफ कालेजिज प्रो. अनिल वोहरा ने कहा कि एनईपी छात्र एवं शिक्षक दोनों के लिए उपयोगी है। आज विज्ञान एवं वर्चुअल युग में युवा का चितन भी बदल रहा है। इसके माध्यम से युग एवं उद्योग के अनुरूप सक्षम युवा पीढ़ी का निर्माण होगा।

    प्रथम सत्र में परीक्षा नियंत्रक प्रो. अंकेश्वर प्रकाश ने एनईपी के एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट (एबीसी) के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इसके माध्यम से छात्र के क्रेडिट डिजिटल बैंक में सुरक्षित हो जाएंगे। एक वर्ष के बाद वह अपने क्रेडिट के आधार पर दूसरे संस्थान में भी प्रवेश लेकर वहां से डिग्री ले सकता है। उन्होंने कहा कि क्रेडिट ट्रांसफर और रिडंपशन दो रजिस्टर्ड संस्थान में ही होगा। सत्र की अध्यक्षता डा. जसविदर संधु ने की। कार्यक्रम का संचालन प्रो. विवेक चावला ने किया। इस अवसर पर प्रो. अश्वनी कुश, प्रो. परमेश कुमार, डा. दीपक राय बब्बर, डा. रामचंद्र और डा. वंदना शर्मा मौजूद रही।