जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : ¨पजौर के ब्रह्मर्षि शिक्षण महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. स्वामी अमृता ने कहा कि भारतीय संस्कृति के मूल तत्व संस्कृत शास्त्रों में ही निहित हैं। इसलिए संस्कृत साहित्य का अध्ययन परम आवश्यक है। संस्कृत शास्त्रों की शिक्षा के आभाव में ही समाज दिग्भ्रमित हो चला है।

वे श्री जयराम विद्यापीठ कुरुक्षेत्र के गीता शोध केंद्र में हरियाणा संस्कृत अकादमी की ओर से अखिल भारतीय गीता प्रतियोगिताओं में बोल रहे थे। हरियाणा संस्कृत अकादमी के निदेशक डॉ. सोमेश्वर दत्त शर्मा विशेष तौर पर शामिल हुए। डॉ. स्वामी अमृता महाराज ने कहा कि वे शक्तिस्वरूपा हैं इसीलिए देवता भी शक्तिस्वरूपा देवी की ही स्तुति करते आए हैं। कन्याओं को अपनी शक्ति पहचाननी होगी, तभी समाज में अनाचार समाप्त होगा। डॉ. सोमेश्वर दत्त ने हरियाणा साहित्य अकादमी की गतिविधियों की जानकारी देते हुए हरियाणा सरकार द्वारा संस्कृत के प्रचार प्रसार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। कार्यक्रम के अध्यक्ष राष्ट्रपति सम्मानपत्र से सम्मानित प्रो. धर्म चंद जैन ने छात्रों को विनयभाव से शिक्षा ग्रहण करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि विनय से विद्या और विद्या से सब कुछ प्राप्त हो जाता है। गीता शोध केंद्र के निदेशक डॉ. श्री कृष्ण शर्मा ने आए हुए अतिथियों को विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी और उनका स्वागत किया। विद्यापीठ के प्राचार्य रणबीर भारद्वाज ने कार्यक्रम का संयोजन किया। इस मौके पर डॉ. प्रीत ¨सह स्नेही, डॉ. विश्मबर दास और तारा चंद शास्त्री ने प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका अदा की। चैतन्य भारती संस्कृत महाविद्यालय आशुतोष मिश्रा, ऋतू शर्मा तथा अंजलि, श्री जयराम विद्यापीठ के हर्ष और विपिन, शिक्षण महाविद्यालय कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दीपक कुमार और अंकित बहुगुणा, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के पवन कुमार, आर्य कन्या महाविद्यालय शाहाबाद की वर्षा, कन्या महाविद्यालय जालंधर की साक्षी त्रिपाठी और पूजा तथा सेठ नवरंग राय लोहिया जयराम कन्या महाविद्यालय की जया को विभिन्न प्रतियोगिताओं में पुरस्कार हासिल हुए।

इस मौके पर रोहित कौशिक, श्रवण गुप्ता, डॉ. सरला गुप्ता, डॉ. एसएन गुप्ता, प्राचार्या डॉ. रीटा गोयल, डॉ. शीला बठला, डॉ. सरोजनी जमदग्नि, डॉ. नीरज, अरुणा, जेडी भारद्वाज मौजूद थे।

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