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    स्वदेशी स्मार्ट स्ट्रिप से पैकेटबंद मिठाई की पता चलेगी गुणवत्ता, Karnal के राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान ने की नई खोज

    By Jagran News Edited By: Shoyeb Ahmed
    Updated: Sun, 24 Dec 2023 06:04 PM (IST)

    पैकेटबंद मिठाई की गुणवत्ता अब पलभर में पता की जा सकेगी और इसको लेकर राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) ने नवोन्मेष किया है। संस्थान के विज्ञानियों ने एक स्मार्ट पेपर स्ट्रिप तैयार की है जिससे दूध से बनी मिठाई की गुणवत्ता रियल टाइम में परखी जा सकेगी। इस स्ट्रिप का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन सुगम बनाकर दूध से बनी मिठाइयों के निर्यात को प्रोत्साहित करना भी है।

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    करनाल स्थित एनडीआइआई में मिठाई की पैकिंग पर लगी स्मार्ट स्ट्रिप टैगिंग

    पवन शर्मा, करनाल। Strip Invented For Checking Quality Of Sweets Packaged: पैकेटबंद मिठाई की गुणवत्ता अब पलभर में पता की जा सकेगी। यह संभव होगा राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के नवोन्मेष से।

    संस्थान के विज्ञानियों ने एक स्मार्ट पेपर स्ट्रिप तैयार की है, जिससे दूध से बनी मिठाई की गुणवत्ता रियल टाइम में परखी जा सकेगी। इस स्ट्रिप का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन सुगम बनाकर दूध से बनी मिठाइयों के निर्यात को प्रोत्साहित करना भी है।

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    भारत की सबसे प्रमुख मिठाई है मिल्ककेक

    भारत कई देशों को दुग्ध उत्पादों से बनी मिठाइयां निर्यात करता है। इसमें मिल्ककेक सबसे प्रमुख मिठाई है। जिसके निर्यात में विश्व में तुर्किये के बाद भारत का दूसरा स्थान है। उल्लेखनीय है कि दुग्ध उत्पादन में भारत का विश्व में पहला स्थान है, लेकिन तकनीकी मदद के अभाव में दूध या इससे बने उत्पादों के निर्यात में अभी पूर्ण सहजता नहीं है।

    डिब्बे में होगी स्ट्रिप

    एनडीआरआई में विकसित की गई स्मार्ट पेपर स्ट्रिप डिब्बे के भीतर लगेगी, लेकिन मिठाई से स्पर्श नहीं करेगी। मिठाई खराब होने की स्थिति में यह स्ट्रिप रंग बदलना आरंभ कर देगी जिसे डिब्बे के ऊपरी हिस्से पर बने पारदर्शी स्थान से स्पष्ट देखा जा सकेगा।

    इसमें रंग परिवर्तन के माध्यम से उत्पाद फ्रेश, गुड, रिस्की और स्प्वाइल्ड यानी खराब की स्थिति में होने का संकेत मिलेगा। फिलहाल एनडीआरआई अपने उत्पादों में इस स्ट्रिप का प्रयोग कर रहा है। जल्द इसे बाजार में उतारा जाएगा।

    स्ट्रिप का होगा ये उपयोग  

    इस स्ट्रिप के प्रयोग के बाद मिठाई की गुणवत्ता जांचने के लिए डिब्बा खोलकर देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। तकनीक का उपयोग बड़ी कंपनियों के अलावा स्थानीय मिठाई विक्रेता भी सरलता से कर सकेंगे।

    यह तकनीक खाद्य पदार्थों के प्रसंस्करण में बेहद कारगर साबित हो सकती है। अभी पैकेटबंद मिठाई पर एक्सपायरी डेट लिखना अनिवार्य है, लेकिन यह स्ट्रिप इस तिथि से पहले भी खाद्य सामग्री के खराब होने की स्थिति में ग्राहकों का स्वास्थ्य सुरक्षित रखेगी।

    ऑक्सीजन मिलते ही बदलती है रंग

    विशेषज्ञों के अनुसार पैकेज्ड फूड की गुणवत्ता कायम रखने के लिए जरूरी है कि उसमें रखे पदार्थ को आक्सीजन न मिले। पराबैंगनी प्रकाश सक्रिय आक्सीजन संकेतक की मदद से डेरी उत्पादों में आक्सीजन की उपस्थिति या अंतरग्रहण का पता रंग परिवर्तन से लगाना संभव है।

    यह स्ट्रिप इसी सिद्धांत पर तैयार की गई है। जैसे ही मिठाई में आक्सीजन की मात्रा पहुंचेगी, सेंसर उसका पता लगाकर स्ट्रिप का रंग बदल देगा। एनडीआरआई के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. पी. नरेंद्र राजू बताते हैं कि यह तकनीक काफी उपयोगी है।

    स्ट्रिप बाजार में उपलब्ध कराने के प्रयास हैं जारी

    विक्रेता की ओर से उचित तापमान पर न रखने अथवा भंडॉरण के समय हुई गड़बड़ी भी इससे पता चल सकती है। डॉ. राजू कहते हैं कि फल और मांसाहारी उत्पादों के लिए इस तरह की तकनीक विदेश में उपलब्ध है, लेकिन भारत के मिठाई उद्योग में इसका उपयोग काफी खर्चीला साबित होगा।

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    इसी कारण एनडीआरआई ने यह स्वदेशी स्ट्रिप विकसित की है जो कम कीमत में भारतीय कंपनियों और मिठाई विक्रेताओं को उपलब्ध हो सकेगी। कंपनियों से लेकर स्थानीय मिठाई विक्रेताओं तक के लिए यह अच्छी तकनीक है। तकनीकी हस्तांतरण के बाद ये स्ट्रिप बाजार में उपलब्ध कराने के प्रयास जारी हैं।

    ये तकनीकें भी कारगर

    • एनडीआरआई में विकसित एक अन्य स्ट्रिप दूध में डॉलने पर तीन मिनट बाद पीले रंग की हो जाती है तो पता चलता है कि दूध में माल्टोडेक्सट्रिन (सफेद स्टार्चयुक्त पाउडर) की मात्रा कितनी है। यह परीक्षण दूध में 0.15 प्रतिशत तक माल्टोडेक्सट्रिन की मिलावट पता लगा सकता है।
    • डेरी फार्म में दूध में एंटीबायोटिक अवशेष पता लगाने के लिए जीवाणु, दूध व संकेतक को तीन घंटे तक 64 डिग्री सेल्सियस पर उष्मामान किया जाता है। बैंगनी से पीले रंग में परिवर्तन एंटीबायोटिक अवशेषों की अनुपस्थिति दर्शाएगा जबकि बैंगनी रंग परिवर्तित न होना अवशेषों की एमआरएल स्तर पर उपस्थिति इंगित करेगा।
    • दूध में डिटर्जेंट की मात्रा का पता लगाने के लिए 400 मिलीलीटर दूध को एक परखनली में विकसित अभिकर्मक के साथ अच्छी तरह मिलाया जाता है। निचली परत में दूध का रंग बैंगनी हो तो यह शुद्धता दर्शाता है। जबकि नीला रंग डिटर्जेंट की उपस्थिति का द्योतक है। इससे मात्र सौ सेकंड में सौ मिलीलीटर शुद्ध दूध के अंतर्गत 20 मिलीग्राम डिटर्जेंट की मिलावट जांची जा सकती है।

    • दूध में न्यूट्रलाइजर्स पता लगाने के लिए डुबोई गई स्ट्रिप का रंग मिलावट के अनुरूप हरा या गहरा नीला हो जाता है। जबकि शुद्ध दूध की स्थिति में स्ट्रिप अपना मूल पीला रंग बरकरार रखती है। सामान्य तापमान पर इस स्ट्रिप की शेल्फ लाइफ छह माह से अधिक है।

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