करनाल, पवन शर्मा। यूं तो इस नाम का मतलब है सांझ का समय, लेकिन यह बेटी है जागरूकता की नई सुबह। पांच वर्ष की अवस्था में घर में ही बेटे-बेटी का भेदभाव महसूस करने वाली संजोली ने हरियाणा के करनाल से लेकर आस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा तक नारी सशक्तिकरण की प्रेरक परिभाषा लिखी है। अपने बुद्धि-कौशल के बूते महज डेढ़ वर्ष में तीन अंतरराष्ट्रीय सम्मान हासिल कर संजोली ने यह साबित कर दिखाया कि यकीनन हमारी बेटियां किसी से कम नहीं। वर्ष 2016 में 12वीं में हरियाणा में टापर बनीं संजोली विश्व की आठवीं रैंकिंग वाली नेशनल यूनिवर्सिटी कैनबरा में पढ़ रही हैं। माता गगन और पिता मिहिर बनर्जी शिक्षक हैं।

...देखा, भोगा और किया आत्मावलोकन

बचपन में ही संजोली ने महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव की गहरी यंत्रणा झेली। शायद इसी दौरान यह पीड़ाजनक अनुभव उसकी शख्सियत में ऐसा सशक्त भाव जगा गया,जिसकी बदौलत वह पूरी दुनिया की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। संजोली ने पांच साल पहले करनाल के गांव दरड़ में मोबाइल स्कूल सुशिक्षा शुरू किया था। बेटियों को आज उनकी टीम हर सप्ताह चार घंटे तक नियमित शिक्षा देने के साथ मासिक धर्म,स्वच्छता और अन्य विषयों के प्रति जागरूक करती है। अभियान बुलंद के माध्यम से स्कूलों की 1,100 लड़कियों को 6,600 सैनेटरी पैड बांटे।

पहली बार मनाई बेटियों के नाम लोहड़ी

संजोली बताती हैं कि अनन्या के जन्म के बाद वर्ष 2004 में लोहड़ी आई तो माता-पिता संग यमुनानगर के एक गांव में समारोह आयोजित कर गांव की हर बेटी को 51-51 रुपये का शगुन दिया ताकि इस त्योहार को सिर्फ बेटों से जोड़कर देखने की सोच बदले। यह अपने किस्म की अनूठी पहल थी। जिसके बाद देश-प्रदेश में जगह-जगह यह पर्व बेटियों के नाम मनाया जाने लगा। सात वर्ष की उम्र में संजोली को हरियाणा सरकार ने बाल पुरस्कार दिया।

सोच को दुनिया ने किया सलाम

23 वर्षीय संजोली को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित डायना पुरस्कार मिल चुका है। यह पुरस्कार प्रिंसेज आफ वेल्स डायना की स्मृति में दिया जाता है। जर्मनी में यंग ग्लोबल चेंज मेकर अवार्ड के साथ ही भारत में युवा व खेल मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की ओर से वालंटियर अवार्ड भी मिल चुके हैं। उन्हें ये पुरस्कार समानता,महिला सशक्तिकरण, कन्या भ्रूण हत्या, पर्यावरण संरक्षण, उत्तम व सर्वसुलभ शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वच्छता सहित विभिन्न क्षेत्रों में सक्रियता के लिए मिले हैं। संजोली को 20 वर्ष की आयु में आस्ट्रेलियाई की फेडरल संसद में एक दिन की पार्लियामेंट सदस्य बनने का गौरव भी मिल चुका है।

Edited By: Sanjay Pokhriyal

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