Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    रावण दहन कार्यक्रम में रखा जाएगा दो गज की दूरी का ध्यान

    By JagranEdited By:
    Updated: Sun, 25 Oct 2020 06:31 AM (IST)

    सेक्टर-19 के पार्ट दो में आयोजित होने वाले रावण दहन कार्यक्रम में दो गज की दूरी का ध्यान रखा जाएगा। इस कार्यक्रम का आयोजन पहले भाई उदय सिंह किला में किया जाना था लेकिन वहां पर भीड़ अधिक होने की आशंका के चलते कार्यक्रम को सेक्टर 19 में करने की योजना बनाई गई है।

    रावण दहन कार्यक्रम में रखा जाएगा दो गज की दूरी का ध्यान

    जागरण संवाददाता, कैथल : सेक्टर-19 के पार्ट दो में आयोजित होने वाले रावण दहन कार्यक्रम में दो गज की दूरी का ध्यान रखा जाएगा। इस कार्यक्रम का आयोजन पहले भाई उदय सिंह किला में किया जाना था, लेकिन वहां पर भीड़ अधिक होने की आशंका के चलते कार्यक्रम को सेक्टर 19 में करने की योजना बनाई गई है। कार्यक्रम में महज 300 लोगों के आने की अनुमति दी गई है। जबकि अन्य लोग दूर से खड़े होकर ही कार्यक्रम को देख सकेंगे।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    बता दें कि कैथल दशहरा उत्सव समिति की ओर दशहरा पर्व पर भव्य आयोजन किया गया था, लेकिन इस बार कोरोना के कारण बड़े आयोजन की मंजूरी जिला प्रशासन की ओर से नहीं दी गई है। जिसके चलते परंपरा का निर्वहन करते हुए 21 फीट के रावण के पुतले का दहन सेक्टर 19 में किया जाएगा।

    समिति के अध्यक्ष अभिषेक गोयल ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण बहुत छोटा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में पुतले के पास किसी भी व्यक्ति को आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वह केवल दूर से ही पुतला दहन का कार्यक्रम देख सकेंगे। जो भी यहां लोग पहुंचेंगे, वह रावण दहन दूर खड़े होकर ही देख सकते हैं।

    रावण राजा के साथ एक वीर और कुशल पंडित थे : गौड़

    कैथल : ज्योतिषाचार्य एवं संगीतकार श्याम सुंदर शर्मा गौड़ ने दशहरा पर्व पर कहा कि रामायण में बहुत से पात्र हैं, रावण उनमें से एक है। रामलीला में रावण के विषय में जो दिखाया जाता है वास्तव में वह वैसे नहीं थे। रावण पोलतस्य ऋषि का पौत्र और विश्वसद्वा के पुत्र थे। कहते हैं कि रावण जैसा मैं हुआ और ना ही कभी होगा। रावण चारों वेदों के ज्ञाता थे और एक बहुत महान विद्वान थे। उसने रावण संहिता और संगीत पर एक अमूल्य पुस्तक भी लिखी थी। उसने शिव तांडव स्त्रोत भी लिखा था जो एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। बताया कि रावण लंका का सशक्त राजा था उसके आगे किसी की भी बोलने की हिम्मत नहीं होती थी। ऐसा कहा जाता था कि उसने शनि को भी अपनी कैद में डाल रखा था। धनकुबेर भी उसके अधीन था और वह मृत्यु से नहीं डरता था। किसी समय रावण भगवान विष्णु के द्वारपाल था। जय विजय के रूप में शत्रुता रखने पर तीन जन्म में मोक्ष और मित्रता रखने पर सात जन्म में। रावण राजा के साथ-साथ एक वीर योद्धा भी थे। उसने राम के साथ युद्ध किया। मरते दम तक हार नहीं मानी। राम के साथ समझौता नहीं किया और न ही सीता लौटाई। ऐसा बताया जाता है कि रावण ने शिव की घोर तपस्या की थी अपने 10 शीशों को काटकर शिव को अर्पित कर दिया था। शिव ने उन्हें वरदान दिया था कि अमृत कुंड जब तक नहीं सूखेगा, तब तक उसकी मृत्यु नहीं होगी। दक्षिण भारत में उनकी पूजा आज भी की जाती है क्योंकि वह सर्वगुण संपन्न थे।