दुष्यंत चौहान का नौकायन वर्ल्ड चैंपियनशिप में हुआ चयन, भोपाल में ले रहे ट्रेनिग
गांव कुलाना निवासी किसान के बेटे भारतीय सेना में सेवारत रोवर दु

जागरण संवाददाता, झज्जर : गांव कुलाना निवासी किसान के बेटे भारतीय सेना में सेवारत रोवर दुष्यंत चौहान ने एक बार फिर से अपना परचम लहराया है। जनवरी में हुई नेशनल रोइंग चैंपियन में दो गोल्ड मेडल जीतने के बाद दुष्यंत का नौकायन वर्ल्ड चैंपियनशिप में ओपन वेट सिगल स्कल के लिए चयन हुआ है। दुष्यंत पिछले 4 माह से भोपाल में कोच कर्मबीर सिंह चहल से ट्रेनिग ले रहे हैं। नौकायन वर्ल्ड चैंपियनशिप 27 से 29 मई तक सर्बिया के बेलगराद में होनी है, जिसके लिए रविवार को दुष्यंत अपनी 17 खिलाड़ियों की टीम के साथ सर्बिया के लिए रवाना हुए। दुष्यंत ने कहा कि उनका फोकस एशियन गेम 2022 में खेलना था, जो चाइना में सितंबर माह में होने थे। लेकिन चाइना में कोरोना की वजह से स्थगित हो गए हैं।
दुष्यंत ने कहा कि जनवरी माह में पुणे में आयोजित हुई नेशनल रोइंग चैंपियन में 2000 मीटर डबल स्कल और 500 मीटर डबल स्कल में दो गोल्ड मेडल जीते थे। साधारण किसान परिवार से संबंध रखने वाले रोवर दुष्यंत इंचियोन (कोरिया) में एशियाई खेलों में और जकार्ता (इंडोनेशिया) में एशियाई खेलों 2018 में पदक जीतकर भारत को गौरांवित कर चुके है। एशियाई खेल 2018 में पुरुषों की रोइंग सिगल्स स्पर्धा में ब्रांज मेडल जीतकर देशवासियों को गौरांवित किया था। दुष्यंत चौहान का मेडल एशियाई खेलों में रोइंग स्पर्धा में पहला मेडल भी था। कोरिया के ह्यूनसु पार्क और हांगकांग के चुन गन चियु में गोल्ड व सिल्वर मेडल जीता था। हालांकि एशियाई खेलों की रोइंग स्पर्धा में देश के लिए पहला पदक जीतने वाले दुष्यंत सिंह इस ऐतिहासिक जीत के बाद ठीक से खड़े तक नहीं हो पाए और दुष्यंत की तबीयत इतनी ज्यादा बिगड़ गई कि वो पोडियम पर भी ठीक से खड़े नहीं हो पा रहे थे। 2020 एशियाई खेलों में चोटिल होने कारण नहीं खेल पाए थे। डिस प्रोबलम होने के चलते दुष्यंत का इलाज दिल्ली के एक निजी अस्पताल में चल रहा था।
दुष्यंत सिंह ने साल 2012 रुड़की आर्मी ट्रेनिग कैंप से रोइंग की शुरुआत की थी। दक्षिण कोरिया (2014) में हुए एशियाई खेलों में उन्होंने पहली बार ब्रांज मेडल पर कब्जा जमाया। इससे पहले साल 2013 में बेस्ट रोअर का खिताब अपने नाम कर नेशनल चैंपियन बने थे। साल 2017 में दुष्यंत ने सीनियर नेशनल रोविग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था। इससे पहले साल 2015 में हुई एशियन इंडोर रोइंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। वहीं दुष्यंत ने 2012 में आर्मी में बंगाल इंजीनियरिग ग्रुप में रोइंग को चुना था। इसके ठीक दो साल बाद ही उन्होंने 2014 के एशियाई खेलों में देश का प्रतिनिधित्व किया था। दुष्यंत के बड़े भाई रणदीप भी आर्मी से सेवारत हैं। उनके पिता जगत सिंह किसान हैं और माता आशा देवी ग्रहणी हैं।
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