जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़ : मार्च के हर दूसरे बृहस्पतिवार को विश्व गुर्दा दिवस मनाया जाता है। इस बार यह 12 मार्च को है। निसंदेह इसका मकसद लोगों को शरीर के इस महत्वपूर्ण अंग के प्रति सचेत और जागरूक करना ही है। मगर आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और खानपान के असंतुलन से जाने-अंजाने इस अंग को बीमारियों ने घेर लिया है। यहीं से दूसरे रोग भी पनप रहे हैं। क्षेत्र के यूरोलोजिस्ट एवं ट्रासप्लाट सर्जन डॉ. विकास अग्रवाल मानते है कि यदि इसान संतुलित दिनचर्या अपनाए तो गुर्दे (किडनी) की बीमारियों से बचा जा सकता है।

इसकी जानकारी शायद हर किसी को है कि शरीर में दो गुर्दे होते है, जो रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ पेट के पिछले भाग में होते है। मूल रूप से गुर्दे हमारे शरीर में उत्पन्न हुए जहर को बाहर निकालकर खून की सफाई का काम करते है। आज जबकि रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर और शूगर की बीमारी बढ़ रही है तो उससे गुर्दो के लिए भी परेशानी बढ़ गई है। इन दोनों रोगों का गुर्दो पर सबसे ज्यादा विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। स्वाभाविक है कि जब गुर्द ठीक से काम नहीं करेंगे तो इससे शरीर में रोगों की संख्या भी बढ़ती जाती है। यदि शरीर में लगातार ऐसी स्थिति बनी रहती है तो एक समय के बाद गुर्दे काम करना बंद कर देते है। दरअसल गुर्दे हमारे शरीर में फिल्टर का काम करते है। इससे शरीर में पानी व नमक की मात्रा नियंत्रित रहती है। गुर्दे फिल्टर के अलावा खून की कमी को भी दूर करते है और हड्डियों को मजबूत रखते है। यदि गुर्दो में दिक्कत होती है तो फिर शरीर के दूसरे अंग भी ठीक तरह से काम नहीं करते।

गुर्दो में पनपते है कई रोग : पथरी के अलावा गदूद बनना, पेशाब में संक्रमण व रूकावट, कैंसर जैसे रोग गुर्दे में पनपते है। वैसे तो आज अत्याधुनिक पद्धति से इलाज के चलते गुर्दे के रोगों का इलाज भी काफी हद तक संभव हो रहा है लेकिन सावधानी और जागरूकता से इन रोगों से बचाव भी हो सकता है।

ये है गुर्दे की बीमारी के लक्षण

1. पेशाब में खून आना

2. पेशाब में जलन होना और बार-बार आना

3. पैरों व आखों में सूजन आना

4. शीघ्र थकान महसूस होना

5. ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होना

6. पेशाब की मात्रा में कमी होना

इस तरह हो सकती है जाच

गुर्दे की बीमारी का शीघ्र पता चलने पर इसमें पूर्ण इलाज संभव है और बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि ब्लड प्रेशर व शूगर की नियमित जाच कराई जाए। खून की मात्रा और प्रोटीन की जाच के अलावा खून में यूरिया, किडनी की पथरी, रुकावट, गदूद व कैंसर की बीमारी की भी नियमित जाच कराएं। साथ ही पेशाब की मात्रा व धार की भी जाच जरूरी है।

ऐसे बचा जा सकता है किडनी की बीमारी से

1. नियमित व्यायाम करे

2. रोजाना तीन से चार लीटर पानी पीएं

3. धूम्रपान, शराब के सेवन और फास्ट फूड से बचें

4. खाने में नमक की मात्रा कम रखें

5. दर्द की गोलियों का अनावश्यक सेवन न करे

6. ब्लड प्रेशर व शूगर की नियमित जाच कराएं

7. 35 वर्ष की उम्र के बाद खून व पेशाब की जाच अवश्य कराएं

समय रहते ही बेहतर उपचार संभव

यूरोलोजिस्ट एवं ट्रासप्लाट सर्जन डॉ. विकास अग्रवाल का कहना है कि गुर्दे व पेशाब के संक्रमण को उपयुक्त दवाईयों से मूल कारण को ठीक करके बीमारी से निजात मिल सकती है। आजकल गुर्दे की पथरी का दूरबीन व लेजर से इलाज बिना चीर-फाड संभव है। ब्लड प्रेशर व शुगर की बीमारी से गुर्दे को समय रहते बचाया जा सकता है। इसके बावजूद कई बार लोग गुर्दे फेल होने की अवस्था में पहुच जाते है। उन्हे डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। समय रहते गुर्दा ट्रासप्लाट से नई जिंदगी भी शुरू हो सकती है। बेहतर यही है कि इंसान बचाव के तरीकों पर ध्यान दें।

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