बहादुरगढ़ में विभागों की तकरार में खाली हुए जलघर, नहर पर पंपों की संख्या डेढ़ गुना बढ़ाई
बहादुरगढ़ की कालोनियों से ज्यादा जल संकट सेक्टरों में बना हुआ है। प्राधिकरण का जलघर तो माइनर के आखिरी छोर पर है। ऐसे में वहां तक पानी आम दिनों में ही कम पहुंचता है। पिछले सप्ताह में पानी और कम हो गया। हालात अब ये हैं

बहादुरगढ़, जागरण संवाददाता। बहादुरगढ़ में जलापूर्ति को लेकर सरकारी विभागों के बीच तकरार ने एक बार फिर शहर में पानी के लिए हाहाकार की स्थिति पैदा कर दी। जिन पंपों के जरिये जलघराें तक पानी पहुंचाया जा रहा है, उनकी सुरक्षा को लेकर सिंचाई विभाग की ही दो शाखाओं में तकरार हो गई। नतीजा हुआ कि बीच में दो पंप बंद कर दिए गए। इससे जलघरों तक पानी कम पहुंचा। ऐसे में कालोनियों से लेकर सेक्टरों तक में लोग पानी को तरस गए। अब नहर पर पंपों की संख्या डेढ़ गुना करने का कवायद शुरू की गई है। इसके बाद भी कम से कम तीन दिनों में जलघरों में पर्याप्त पानी एकत्रित होने की उम्मीद है। वह भी तब होगा, जब आपूर्ति बढ़ेगी।
यह है मौजूदा व्यवस्था
शहर में जन स्वास्थ्य विभाग और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के जलघरों को जिस बीडब्ल्यूएस माइनर से पानी मिलता है। उसका पुनर्निर्माण होना है। इसके लिए साथ लगती सिंचाई माइनर के जरिये जलघरों तक पानी पहुंचाया जा रहा है। इस माइनर को गुरुग्राम वाटर सप्लाई नहर से पानी मिलता है। माइनर के मुहाने पर कुल आठ लिफ्टिंग पंप लगाए गए हैं। इनमें से सात चलाए गए हैं। एक पंप को वैकल्पिक तौर पर रखा गया है।
इस वजह से पानी की आपूर्ति हुई कम
जलघरों तक पानी पहुंचाने का जिम्मा तो सिंचाई विभाग की दिल्ली डिवीजन का है, लेकिन पंपों के रखरखाव का कार्य विभाग की मैकेनिकल शाखा द्वारा किया जाता है। पिछले दिनों नहर पर लगाए गए पंपों में से एक पंप की मोटर फुंक गई। इसके बाद मैकेनिकल विंग की ओर से वहां पर जाल लगवाने के लिए कहा गया। पंपों की सुरक्षा की दृष्टि से ऐसा किया जाना था। मगर जाल न लगने से मैकेनिकल शाखा की ओर से दो पंपों को बंद कर दिया गया। इसी कारण माइनर से जलघरों तक कम पानी पहुंचा। ऊपर से जिस माइनर में से फिलहाल जलघरों तक पानी पहुंचाया जाता है, वह खेती कार्य के लिए है। ऐसे में इस माइनर से खेतों की सिंचाई के लिए भी पानी ले लिया गया। यही कारण रहे कि जलघरों तक पानी कम पहुंचा और शहर में आपूर्ति के कारण वे खाली होते चले गए। अब जाल लगवाकर पंप चालू किए गए हैं।
संकट दूर होने में लगेंगे कई दिन
फिलहाल शहर की कालोनियों से ज्यादा जल संकट सेक्टरों में बना हुआ है। प्राधिकरण का जलघर तो माइनर के आखिरी छोर पर है। ऐसे में वहां तक पानी आम दिनों में ही कम पहुंचता है। पिछले सप्ताह में पानी और कम हो गया। हालात अब ये हैं कि सेक्टरों के एक हिस्से में घरों की सप्लाई देने के बाद तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। प्राधिकरण के जेई आशीष कुमार ने बताया कि जब पानी एकत्रित होता है तब दूसरे हिस्से में सप्लाई दी जाती है। सेक्टर-9,9ए के अलावा शहर की कालोनी में भी पानी न मिलने के कारण लोगो को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आमजन भी पानी व्यर्थ न बहाए
निवर्तमान पार्षद जसबीर सैनी ने माइनर पर जाकर आपूर्ति का जायजा लिया। सैनी ने बताया कि छह मोटर पंप चालू मिले। सैनी ने बताया की शहर के लिए माइनर से तो पर्याप्त पानी छोड़ा जा रहा है, लेकिन इसमें से आधा पानी तो बीच में आने वाले औद्योगिक एरिया में दिया जा रहा है। ऊपर से पानी चोरी भी हो रहा है। शहर तक बेहद कम पानी पहुंच रहा है। इसी कारण समस्या बनी हुई है। बहादुरगढ़ को नहरों से मिलने वाले पानी की मात्रा बढ़ाई जाए, ताकि गर्मी में परेशानी न आए। आमजन भी पानी व्यर्थ न बहाए।
चार पंप और लगाए जाएंगे : एसडीओ
सिंचाई विभाग के एसडीओ विनोद कुमार ने बताया कि फिलहाल आठ पंप लगाए गए हैं। इनमें से सात चालू हैं। यहां पर चार पंप और लगाने के लिए मैकेनिकल शाखा को बोल दिया है। एक पंप से चार क्यूसिक तक पानी मिलता है। चार पंप और लगेंगे तो 40 क्यूसिक से ज्यादा पानी माइनर के जरिये जलघराें तक पहुंचाया जाएगा।
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