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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 11, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दो बेटियों ने बढ़ाया हरियाणा का मान, दुश्‍मनों से देश की रक्षा को संभाला मोर्चा

By Sunil Kumar JhaEdited By:
Published: Sun, 11 Mar 2018 10:18 AM (IST)Updated: Mon, 12 Mar 2018 03:48 PM (IST)

हरियाणा की दो बेटियों प्रीति चौधरी और वृति शर्मा ने राज्‍य का मान बढ़ा दिया है। पानीपत की प्रीति अौर ...और पढ़ें

दो बेटियों ने बढ़ाया हरियाणा का मान, दुश्‍मनों से देश की रक्षा को संभाला मोर्चा
दो बेटियों ने बढ़ाया हरियाणा का मान, दुश्‍मनों से देश की रक्षा को संभाला मोर्चा

जेएनएन, चंडीगढ़/हिसार। हरियाणा की दो बेटियों प्रीति चौधरी और वृति शर्मा ने चेन्नई में ऑफिसर ट्रेनिंग में पहले दो स्थान हासिल कर देश में प्रदेश का नाम मान बढ़ा दिया है। साथ ही अपने ख्वाबों को भी सच कर दिखाया है। 10 मार्च को चेन्नई कैंप में हुई पासिंग आउट परेड में लेफ्टिनेंट प्रीति को प्रतिष्ठित स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया है, जबकि दूसरे स्थान पर रही रोहतक की वृति शर्मा को सिल्वर मेडल मिला है।

पानीपत की प्रीति चौधरी और रो‍हतक की वृति शर्मा बनीं सेना में आफिसर

ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी के 55 साल के इतिहास में यह तीसरी बार हुआ है जब किसी महिला कैडेट को स्वॉर्ड ऑफ ऑनर अवार्ड दिया गया। सबसे पहले वर्ष 2010 में दिव्या अजीत कुमार को और उनके बाद वर्ष 2015 में एम अंजना को यह अवार्ड मिल चुका है।

चेन्नई कैंप में हुई पासिंग आउट परेड में लेफ्टिनेंट प्रीति चौधरी को मिला स्वॉर्ड ऑफ ऑनर

परिवार के साथ प्रीति चौधरी।

जागरण से फोन पर हुई मूल रूप से पानीपत जिले के गांव बिंझौल वासी प्रीति चौधरी ने बताया कि उसे पिता की वर्दी अच्छी लगती थी, लेकिन इसे पाना आसान नहीं था। इसलिए वह भी पिता कैप्टन इंद्र सिंह की तरह सेना में जाकर देश की सेवा करना चाहती थी। इसके लिए उसने पढ़ाई के दौरान एनसीसी में भाग लिया। उनकी ड्यूटी अंबाला आर्मी एयर डिफेंस में होगी। इससे पहले वर्ष 2016 में दिल्ली में राजपथ परेड में बेस्ट कैडेट चुनी गई।

दूसरे स्थान पर रही रोहतक की वृति शर्मा को सिल्वर मेडल मिला

उल्लेखनीय है कि प्रीति का परिवार फिलहाल पंजाब के जीरकपुर में रहता है। लेफ्टिनेंट प्रीति ने बताया कि सर्विस के दौरान पिता की पोस्टिंग कई जगह होने के कारण बारहवीं तक उन्होंने आठ स्कूल बदले। जहां भी पिता की नियुक्ति होती थी, वहां उनके साथ जाना पड़ता था। सेवानिवृत्ति के समय पापा चंडीगढ़ के नजदीक जीरकपुर में बस गए। लिहाजा कॉलेज की पढ़ाई गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज फॉर गल्र्स सेक्टर-11 चंडीगढ़ से पूरी की। इसके बाद एसएसबी का टेस्ट क्लीयर किया।

 देखें तस्‍वीरें: दो बेटियों ने बढ़ाया हरियाणा का मान, नाप लिया आसमान

30 किमी दौड़ बनी थी बाधा, फुटबॉल भी खेलना सीखा

प्रीति ने बताया कि उसके बैच में 40 लड़कियां और  209 लड़के थे। 30 किमी की दौड़ में उसका प्रदर्शन अच्छा नहीं था। मगर उसने कड़ा अभ्यास किया। इसके अलावा सुबह 9:30 से रात 10:30 बजे तक ट्रेङ्क्षनग के दौरान उसने फुटबॉल खेलना भी सीखा। वह शरीर को मजबूत बनाने के लिए पुशअप्स व दौड़ ज्यादा लगाती थी। इसके अलावा वह खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम व शैक्षणिक गतिविधि में खूब दिलचस्पी लेती थी।

माता-पिता और परिवार के अन्‍य सदस्‍यों के साथ प्रीति चौधरी।

वृति ने जापान में इंजीनियर की नौकरी छोड़ देश सेवा को दी प्राथमिकता

रोहतक की वृति शर्मा चेन्नई कैंप में हुई पासिंग आउट परेड में सिल्वर मेडल जीतने के साथ ही मिस ओटीए भी बनी है। वृति शर्मा ने जापान में इंजीनियर की नौकरी छोड़कर देश सेवा को चुना और उसमें सफल हुई। शनिवार देर रात वृति रोहतक के सेक्टर-14 स्थित अपने आवास पर पहुंच गई। वृति ने जागरण से विशेष बातचीत में कहा कि बेटियां कमजोर होती हैं ये बात वो समाज में सुनती आ रही थीं। ले‍किन, 2015 में जब उन्होंने विंग कमांडर पूजा को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को एस्कार्ट करते हुए देखा तो उनका नजरिया ही बदल गया।

 

रोहतक की वृति शर्मा चेन्नई कैंप में हुई पासिंग आउट परेड के बाद मिठाई खिलातीं उनकी मां।

व‍ृति ने बताया कि इसके बाद उन्होंने सेना में भर्ती होने का मन बना लिया था। उस समय वह कुरुक्षेत्र से मैकेनिकल इंजीनियरिंग कर रही थीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उनको जापान में नौकरी मिल गई, लेकिन दिमाग में हर वक्त सेना का ही ख्याल रहता था।

परिवार के सदस्‍यों के साथ वृति शर्मा।

व‍ृति ने बताया कि जापान से एग्जाम देने के लिए घर आई और फिर वापस नहीं गई और सेना में भर्ती होकर अपना सपना पूरा किया। वृति शर्मा ने कहा के उनके माता-पिता ने जिस तरह उनको प्राेत्‍साहन दिया यदि प्रत्येक लड़की को ऐसा प्रोत्साहन मिले तो बेटियां हर मुकाम हासिल कर सकती हैं।

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तीनों बहन भाई इंजीनियर

वृति ने रोहतक में दसवीं और बारहवीं की शिक्षा ग्रहण करने के बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उन कीबहन अंकिता शर्मा भी इल्केट्रिकल इंजीनियर हैं और दिल्ली मेट्रो मेंकार्यरत हैं। छोटे भाई आदित्य भी कंप्यूटर इंजीनियर हैं। वृति ने बताया कि बचपन से ही तीनों बहन भाइयों को विज्ञान में रूचि थी इसलिए पहले इसीक्षेत्र को चुना। पंजाब नेशनल बैंक में चीफ मैनेजर के पद पर कार्यरत वृति
के पिता नरेश शर्मा और विशेष बच्चों के लिए अर्पण स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत उनकी मां मधु शर्मा ने कहा कि बेटी की कामयाबी से दिल खुश हो गया है।

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पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से हो चुकी सम्मानित

वृति शर्मा इससे पहले भी उनके नाम कई उपलब्धियां रह चुकी हैं। पढ़ाई के दौरान वह स्टूडेंटस आफ द इयर चुनी गईं। इसके बाद पुणे में आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में जैव विविधता विषय पर बनाए गए उनके माडल को प्रथम चुना गया। उन्हें पूर्व राष्ट्रपति डाक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने सम्मानित किया। वृति शर्मा ने कहा उनके माता पिता की तरह अगर प्रत्येक लड़की को प्रोत्साहन मिले तो बेटियां हर मुकाम हासिल कर सकती है।