थैलेसीमिया के रोगियों में आयरन की मात्रा को कम करने के लिए हिसार नागरिक अस्पताल में पहुंची 20 हजार टेबलेट
थैलेसीमिया के रोगियों में आयरन की मात्रा को कम करने के लिए दवा उपलब्ध हो पाएगी। यहां पिछले करीब तीन महीने से दवा नहीं थी जिस कारण थैलेसीमियो के मरीज और उनके तीमारदार दवाओं के लिए नागरिक अस्पताल के चक्कर काट रहे थे

जागरण संवाददाता, हिसार: हिसार के नागरिक अस्पताल में अब थैलेसीमिया के रोगियों में आयरन की मात्रा को कम करने के लिए दवा उपलब्ध हो पाएगी। यहां पिछले करीब तीन महीने से दवा नहीं थी, जिस कारण थैलेसीमियो के मरीज और उनके तीमारदार दवाओं के लिए नागरिक अस्पताल के चक्कर काट रहे थे, कई बार मामले में सीमओ डा. रत्नाभारती से भी गुहार लगा चुके थे। वहीं संबंधित अधिकारी भी सीएमओ को इस बारे में लिख चुके थे। सीएमओ ने दवाओं के लिए पंचकूला मुख्यालय को 20 हजार टेबलेट की डिमांड भेजी थी, जिसके बाद अब जाकर विभाग की तरफ से टेबलेट भेजी गई है।
गौरतलब है कि थैलेसीमियो के रोगियों को खून चढ़ाने की जरुरत पड़ती है। खून चढ़ाते समय होल ब्लड थैलेसीमियों के मरीजों को चढ़ाया जाता है। जिस कारण थैलेसीमियों के रोगियों के खून में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है। आयरन की मात्रा बढ़ने से शरीर में कई तरह की एलर्जी हो जाती है, आयरन की अधिक मात्रा बढ़ने से जान भी जा सकती है। खून में आयरन की मात्रा को कम करने के लिए ‘डेसिफर’ नाम की दवा देकर आयरन की मात्रा को सामान्य स्तर पर लाया जाता है।
यह होता है थैलेसीमिया
सामान्य रूप से शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र 120 दिन होती है, लेकिन थैलेसीमिया के कारण इनकी उम्र घटकर 20 दिन रह जाती है। नागरिक अस्पताल से पीडियाट्रिशियन डा. मंजू ने बताया कि इसका सीधा प्रभाव हीमोग्लोबीन पर पड़ता है। हीमोग्लोबीन की मात्रा कम होने से शरीर कमजोर हो जाता है और व्यक्ति हमेशा किसी न किसी बीमारी से ग्रसित रहने लगता है। यह बीमारी बच्चों को ज्यादा होती है। उचित समय पर उपचार न होने से बच्चे की मौत भी हो सकती है। इस रोग से ग्रसित बच्चे को बचाने के लिए औसतन तीन सप्ताह में एक बोतल खून देना अनिवार्य हो जाता है। लेकिन खून चढ़ाने से उनके आयरन की मात्रा भी बढ़ जाती है। आयरन की मात्रा बढ़ने से भी शरीर में विपरीत प्रभाव पड़ते है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।