संवाद सहयोगी,अग्रोहा : प्रदेश के लिए नारी शक्ति की मिसाल बनी किराड़ा की पूर्व महिला सरपंच बिमला सैनी पर ग्रामीणों ने एक बार फिर से अपना विश्वास जताया है। सिर पर चुन्नी बांधकर ट्रैक्टर से खेतों की जुताई करने वाली बिमला सैनी ने अपने हौसले और बेमिसाल संघर्ष से मुसीबतों के पहाड़ को बौना कर दिखाया। बिमला सन 1977 में महज 11 वर्ष की आयु में गांव सीसवाल से अग्रोहा ब्लाक के गांव किराड़ा में सजन सैनी के घर दुल्हन बन कर आईं थी। शादी के बाद बिमला को दो बेटे और तीन बेटियां हुईं। कुछ साल बाद पति की मौत हो गई और इसने बिमला के जीवन को झकझोर के रख दिया।

बिमला पढ़ी-लिखी नहीं हैं लेकिन खेती के काम से समय निकाल कर अक्षरों को जोड़-जोड़ कर पढ़ने लगीं। वह हस्ताक्षर करना सीख गईं। गांव में बेटियों की शिक्षा को बढ़ाने की बात हो, चाहे किसानों की समस्या की बात हो या बिजली, पानी आदि मूल समस्या हो, हर बात को बिमला ने जोर-शोर से उठाया। इसी बात से प्रेरित होकर गांव ने एकजुटता दिखाते हुए उसे 2010 में गांव का सरपंच बनाया था। बिमला ने गांव में हुए किसी विवाद को गांव में ही हल करवाया किसी ग्रामीण को थाने तक नहीं जाने दिया।

अब बेटे के सिर पर रखी पगड़ी

ग्रामीणों ने पूर्व सरपंच बिमला सैनी द्वारा गांव में करवाए गए विकास कार्यो के साथ सभी ग्रामीणों को साथ लेकर चलने की बात को देखते हुए एक बार फिर किराड़ा गांव के लोगों ने बिमला सैनी के बेटे अजय सैनी को सरपंच बना दिया।

विकास कार्य करेगा बेटा

पूर्व सरपंच बिमला सैनी ने बताया कि गांव में अधूरे पड़े विकास कार्यों के साथ वृद्धा पेंशन की विसंगतियां दूर करवाना,बेटियों की शिक्षा के लिए काम करना,सार्वजनिक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करवाना गांव में युवाओं को नशे के प्रति जागरूक करना,महिलाओं के समूह बनाकर उनको रोजगारपरक कौशल सीखा कर उनकी आमदनी के साधन बढ़ाना,खेत खलिहानों गांव के कच्चों रास्तों को पूरा करने सहित हर जरूरतमंद के वे सभी कार्य पूरे किए जाएंगे जो एक सरपंच की शक्ति के अधीन आएगें। वहीं नव निर्वाचित सरपंच अजय सैनी ने बताया कि वह सभी ग्रामवासियों के सहयोग से भाईचारे को कायम करते हुए सभी कामों पर निर्धारित समय में पूरा करने का प्रयास करेगा।

Edited By: Manoj Kumar

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