रोहतक, जागरण संवाददाता। रोहतक के  महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय हाट और स्टूडेंट एक्टीविटी सेंटर परिसर चल रही कैंटीन व कैफे सहित अन्य फूड प्वाइंट्स बंद हैं। कोरोना काल में स्टूडेंट एक्टीविटी सेंटर में चल रही कैंटीन को कोरोना काल में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा खुलवाया गया था, अब उसे भी बंद कर दिया गया है। कैंटीन-कैफे व अन्य खाद्य पदार्थों के बूथ बंद किए जाने से विश्वविद्यालय को प्रति माह करीब पांच लाख रुपये की चपत लग रही है, जो साल में 50 लाख से अधिक है। उधर, विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक, गैर शिक्षक अन्य अन्य आगंतुकों को भी विश्वविद्यालय में खाद्य सामग्री नहीं मिलने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

विश्वविद्यालय में खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं

विश्वविद्यालय में दाखिला प्रक्रिया चल रही है। इसलिए काफी संख्या में विद्यार्थियों का विश्वविद्यालय में आना-जाना रहता है। शोधार्थी और लैब में करने वाले विद्यार्थी भी नियमित रूप से आ रहे हैं। कुछ विभागों में विद्यार्थी भी प्राध्यापकों से सिलेबस व अन्य शैक्षणिक कार्यों के लिए पहुंच रहे हैं, जिसके कारण पूरा दिन परिसर में चहल-पहल रहती है। लेकिन इसके बड़े विश्वविद्यालय में खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। स्टूडेंट्स एक्टीविटी सेंटर परिसर में कैंटीन, कैफे व अन्य शाप खुली रहती थी, जहां खाने-पीने की वस्तुएं उपलब्ध रहती थी। लेकिन करीब दो माह से कैंटीन को विश्वविद्यालय प्रशासन ने बंद करवा दिया। अब ऐसी कोई स्थान नहीं, जहां खाद्य सामग्री खरीद सके। कोरोना महामारी के दौरान विश्वविद्यालय में आर्थिक संकट भी आया, जिसके कारण नए प्रोजेक्ट शुरु नहीं हो सके। आमदनी के साधन विवि तलाश रहा है, लेकिन जहां से पहले ही आमदनी हो रही थी, उसे बंद करवा दिया गया।

राजनीतिक दखल की आ रही बूं

स्टूडेंट एक्टीविटी सेंटर परिसर में जो कैंटीन चल रही थी, उसे बंद करवाने में राजनीतिक दखल भी बताया जा रहा है। राजनीतिक पहुंच के चलते ही इसे बंद करवाया गया और किसी चहेते व्यक्ति को इसका ठेके देने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि इस कैंटीन को बंद छात्र संगठन के विरोध के चलते किया गया था क्योंकि उन्होंने पहले से बंद बूथ को खुलवाने की मांग की थी। बूथ नहीं खोलने पर कैंटीन को भी बंद करने की मांग कुलपति से की थी।

क्वार्टर की तरफ बूथ को लेकर उठे सवाल

विश्वविद्यलय में एक तो सभी फूड प्वाइंट्स बंद कर दिए गए। लेकिन पीजीआइ की तरफ जाने वाले रास्ते पर एक बूथ प्वाइंट खुला हुआ है। इस बूथ पर चुनिंदा खाद्य सामग्री बेचने की मंजूरी है। लेकिन उससे अधिक सामग्री यहां पर बेची जा रही है। विवि परिसर में अन्य कैंटीन, कैफे व बूथ बंद होने से इस बूथ पर खूब चांदी कूटी जा रही है। विवि में इसको लेकर भी तरह-तरह से सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यह भी बताया जा रहा है कि बूथ किसी राजनीतिक पहुंच वाले व्यक्ति ने खोल रखा है।

कोरोना में घर-घर पहुंचाई थी खाद्य सामग्री, अब अचानक करवा दी बंद : मोहन

स्टूडेंट एक्टीविटी सेंटर परिसर में कैंटीन संचालक मोहन भारद्वाज ने बताया कि कोरोना काल में लाकडाउन के दौरान विवि प्रशासन ने कैंटीन खोलने के लिए बोला था। विवि में विदेशी विद्यार्थियों के अलावा प्राध्यापक व कर्मचारियों के परिवार रहते हैं, जिनको घर-घर तक खाद्य सामग्री पहुंचाई गई। अब दो माह से कैंटीन को बिना कोई कारण बताए बंद कर दिया, जिससे उसे कर्मियों को खाली बैठाकर तनख्वाह दी जा रही है। इससे तीन लाख से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।

रोहतक एमडीयू के स्टूडेंट वेलफेयर के डीन प्रो. राजकुमार के अनुसार

कैंटीन बंद होने से विवि को आर्थिक नुकसान हुआ है। कैंटीन खुलवाने को लेकर खुद विवि प्रशासन को लिख चुके हैं। ई-आक्शन करवाने की बात सामने आई है, लेकिन जब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक कैंटीन खुलनी चाहिए। विवि को इससे अच्छी-खासी आमदनी हो रही थी, जल्दी से दोबारा खुलवाने का प्रयास किया जाएगा।

Edited By: Naveen Dalal