जागरण संवाददाता, हिसार। इस वर्ष गृहस्थियों द्वारा पितरों के पूजन, तर्पण, हवन एवं श्राद्ध कर्म का पावन हरियाणवी बोली के अुनसार कनागत एवं श्राद्धपक्ष 20 सितंबर से 7 अक्टूबर, 2021 तक मनाया जाएगा। शास्त्रीय परम्परानुसार पितृ पूजन, हवन, तर्पण एवं श्राद्ध करने से पितरों की तृप्ति, मुक्ति होगी। इसके साथ ही पितरों का अखण्ड आशीर्वाद प्राप्त होगा। आश्विन, कृष्ण पक्ष (पितृ पक्ष) में किए जाने वाले सभी श्राद्ध पार्वण-श्राद्ध कहलाते हैं। पितरों के निमित्त किए जाने वाले मृत्यु तिथि अनुसार सभी श्राद्ध अपरान्ह व्यापिनी तिथि में करने की शास्त्रज्ञा है। इस वर्ष आश्विन, कृष्ण षष्ठी तिथि 26 सितंबर को 1:05 से प्रारंभ होकर 27 सितंबर, 2021 को 3:44 तक रहेगी। 26 सितंबर, 2021 को अपराह्न काल लगभग 1:28 से 3:51 तक रहेगा। अगर इस दिन (26 सितंबर, 2021) षष्ठी तिथि दोपहर के लगभग पूर्ण काल को व्याप्त कर रही है।

26 सितंबर को तिथि श्राद्ध नहीं रहेगा

आचार्य पवन बताते हैं कि शास्त्र नियम अनुसार यदि दोनों दिन मृत्यु तिथि अपराह्न के एकदेश को असमानता से अर्थात एक दिन अधिक और दूसरे दिन कम व्याप्त करे, तो वहां अधिक व्याप्ति वाले दिन श्राद्ध होता है। परंतु यदि मृत्यु तिथि दोनों दिन दोपहर को समान रूप से व्याप्त करे तब यदि श्राद्ध तिथि का मान 60 घड़ी से अधिक हो तो श्राद्ध दूसरे दिन होगा। इसलिए स्पष्ट है कि षष्ठी तिथि का मान 60 घड़ी से अधिक होने तथा अपराह्न काल की लगभग पूर्ण व्याप्ति के कारण षष्ठी तिथि का श्राद्ध 27 सितंबर सोमवार को होगा। इसलिए 26 सितंबर को कोई भी तिथि श्राद्ध नहीं होगा।

श्राद्ध पक्ष में श्राद्ध तिथि विवरण:---

20-9-2021= पूर्णिमा

21-9-2021= एकम (प्रतिपदा)

22-9-2021= दूज (द्वितिया)

23-9-2021= तीज (तृतीया)

24-9-2021= चौथ (चतुर्थी

25-9-2021= पांचम (पंचमी)

26-9-2021= श्राद्ध नहीं होगा

27-9-2021= छठ (षष्ठि)

28-9-2021= सातम (सप्तमी)

29-9-2021= आठम (अष्टमी)

30-9-2021= नौवमी (नवमी)

1-10-2021= दशमी (दशमी)

2-10-2021= ग्यारश (एकादशी)

3-10-2021= दवाश (द्वादशी)

4-10-2021= तेरश (त्रयोदशी)

5-10-2021= चोदश (चतुर्दशी)

6-10-2021= अमावस्या

7-10-2021= नाना, नानी का श्राद्ध

Edited By: Manoj Kumar