रोहतक में ग्रामिणों ने तीन गांवों के स्कूलों में लगाया ताला, स्टाफ को निकाला दिया बाहर
हरियाणा में सरकार शिक्षा विभाग की नई पालिसी के तहत स्कूलों में अध्यापकों की संख्या कम कर रही है। वहीं जिस सरकारी स्कूल में बच्चे कम है उन स्कूलों को मर्ज किया जा रहा है। जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्र के लोगों रोष है.

रोहतक, जागरण संवाददाता। हरियाणा के शिक्षा विभाग की नई रेशनलाइजेशन पालिसी के खिलाफ बुधवार को भी जिले के तीन गांवों में तालाबंदी अभियान चला। पालिसी के कारण स्टाफ की कम सीट होने की जानकारी जब लोगों को लगी तो मायना, चुलियाना व सिंहपुरा गांव में ग्रामिणों ने स्कूलों पर ताला जड़ दिया। राजकीय कन्या वरिष्ट माध्यमिक विद्यालय चुलियाना में पढ़ने वाली छात्राएं और उनके अभिभावक भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
सड़क पर खड़े हैं स्कूली बच्चे, स्टाफ कम किए जाने पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
दरअसल सरकार द्वारा इस स्कूल के अध्यापकों की संख्या 9 से घटाकर तीन कर दी गई है। जो मौजूदा ट्रांसफ़र प्रक्रिया के बाद लागू हो जाएगी। शिक्षा विभाग के इस फैसले को लेकर गांव में काफी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि ये सरकारी स्कूलों का पतन करने वाला कदम साबित होगा। शिक्षा मंत्री की गलत नीतियां बच्चों के भविष्य को संदेह के घेरे में डाल रही हैं। बुधवार को दिए गए सांकेतिक धरने के माध्यम से चुलियाना गांव के लोगों ने हर स्तर पर इस लड़ाई को लड़ने की चेतावनी दी।
बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही सरकार : ग्रामीण
उधर, सिंहपुरा गांव में सरपंच प्रमोद की अध्यक्षता में ग्रामीण राजकीय स्कूल पर ताला जड़ने के लिए पहुंच गए। ग्रामीणों ने सुबह नौ बजे स्कूल गेट पर ताला जड़कर स्कूल के बाहर धरना शुरू कर दिया। वहीं मायना गांव में सुबह आठ बजे ही ग्रामीणों ने स्कूल गेट पर ताला लगा दिया। ग्रामीणों का कहना था कि जब यहां पर स्टाफ नहीं तो ताला खुद-ब-खुद लग जाएगा।
ऐसे में उन्होंने तय कर लिया है कि अगर स्टाफ को यहां से भेजा गया तो हरसंभव आंदोलन करेंगे। शिक्षामंत्री स्कूलों में स्टाफ की संख्या बढ़ाने की बजाए घटा रहे हैं, ऐसा प्रदेश में पहली बार हो रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि फिलहाल उन्होंने सांकेतिक तौर पर प्रदेश सरकार को अपना संदेश दिया है लेकिन अपने बच्चों के भविष्य के साथ वे खिलवाड़ नहीं होने देंगे।
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