जागरण संवाददाता, हिसार: व्यस्त जीवनशैली में समय से खान-पान न हो पाना, तनाव होने और एक्सरसाइज न करने से पैरालाइसिस यानि लकवे के मरीज लगातार बढ़ते जा रहे है। अधिकतर लोगों में उपरोक्त कारणों की वजह से और शुगर की समस्या के कारण बीपी की समस्या उत्पन्न हो जाती है। जिससे लकवा हो जाता है। चिकित्सकों के अनुसार लकवा होने से अपने आप को बचाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए अपनी जीवनशैली में सुधार करने की जरुरत होती है।

लकवा सिर की नसों में खून की सप्लाई सुचारु न होने से होता है। सिर के अंदर खून का संचार करने वाली नसों में खून के थक्के जमने शुरु हो जाते है। जिससे खून का संचार सुचारु तरीके से नहीं हो पाता। ऐसे में सिर के अंदर नसें फट जाती है। जिससे इंटरनल ब्लीडिंग स्टार्ट हो जाती है। इससे शरीर के अन्य हिस्सों को सिग्नल भेजने वाली नसें ब्लाक हो जाती है। जिस हिस्से में सप्लाई नहीं पहुंचती वह एरिया पैरालाइज हो जाता है। उम्र बढ़ने के कारण भी नसें कमजोर हो जाती है। वहीं कई बार चोट लगने से भी यह समस्या आती है।

लकवा के तीन प्रकार -

लकवा तीन प्रकार का हैं। सामान्य लकवा होने पर इसमें चेहरे का एक साइड का हिस्सा लकवाग्रस्त हो जाता है। चेहरे के एक तरफ से जीभ बाहर निकल आना, मुुंह से पानी आना, हकलाना आदि लक्षण सामने आते है। कई बार सोने पर चेहरे के एक तरफ अधिक दबाव पड़ने से भी यह समस्याएं सामने आती है। वहीं पैराप्लेजिया लकवा होने से एक साइड का पूरा शरीर काम करना बंद कर देता है और एमीप्लीजीया में पूरा शरीर ही लकवाग्रस्त् होकर चलने-फिरने लायक नहीं रहता।

इससे बचाव के लिए करें -

- बीपी कंट्रोल करें, बीपी की टेबलेट नियमित रूप से ले, सैर करें, तनाव दूर करने के लिए एक्साइज की जा सकती है। चोट लगने पर चिकित्सक से संपर्क करें।

- पैरालाइसिस के लक्षण मिलने पर अंधविश्वास में नहीं पड़़ना चाहिए और चिकित्सक से संपर्क करें।

- शुगर वाले मरीजों में भी पैरालाइसिस होता है। शुगर में बीपी मरीज को भी समस्या आती है।

-----पैरालाइसिस ठीक हो जाता है लेकिन इसके लिए लगातार चिकित्सक से उपचार संबंधी जानकारी लेनी चाहिए। 50 से अधिक उम्र के लोगों में पैरालाइसिस यानि लकवा के अधिक मामले देखने को मिल रहे है।

डा. साेनू फौगाट, मदर अस्पताल, हिसार।

Edited By: Manoj Kumar