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    22 की उम्र में सुना पौधे ही जीवन, रेगिस्‍तान में 60 सालों में 50 हजार पौधे लगा चुके 82 वर्षीय राणा राम

    By Manoj KumarEdited By:
    Updated: Sun, 25 Oct 2020 05:15 PM (IST)

    राजस्थान के जिला जोधपुर की तहसील ओशिया के एकलखोरी गांव के रहने वाले हैं। जानकर ताज्जुब होगा कि थार जैसे रेगिस्तान को हरा-भरा करने में जीवन के 60 वर्ष झोंक दिए। संघर्ष रंग लाया आज रेगिस्तान में करीब 50 हजार पौधे लहलहा रहे हैं।

    एक कार्यक्रम में पौधरोपण करते हुए टर्बन ट्री मैन राणा राम बिश्नोई।

    डबवाली (सिरसा) [डीडी गोयल]। 82 साल के राणा राम बिश्नोई। जिस उम्र में इंसान के हाथ पांव काम करने बंद कर देते हैं उस उम्र में भी वे पर्यावरण प्रहरी बने हुए हैं। मगर ये सिलसिला नया बल्कि 60 साल से चला आ रहा है। राणा राम पड़ोसी सूबे राजस्थान के जिला जोधपुर की तहसील ओशिया के एकलखोरी गांव के रहने वाले हैं। जानकर ताज्जुब होगा कि थार जैसे रेगिस्तान को हरा-भरा करने में जीवन के 60 वर्ष झोंक दिए। संघर्ष रंग लाया, आज रेगिस्तान में करीब 50 हजार पौधे लहलहा रहे हैं। रेगिस्तान खूबसूरत हरे रंग की चादर में लिपटा नजर आता है। टर्बन ट्री मैन के चर्चे राजस्थान से दिल्ली तक हैं।

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    दरअसल, जब राणा राम 22 साल के थे, तो उन्होंने सुना कि पेड़ ही सबकुछ हैं अर्थात जिंदगी हैं। घर आए तो ये शब्द कानों में गूंजता रहा। उस रात वे सो नहीं सकें। सुबह हुई तो वे उठ खड़े हुए। सूरज की तपिश के बीच रेगिस्तान को लहलहा देने का सपना देखा। कंकेडी का पौधा लगाया। टर्बन मैन के सिर पर पेड़ लगाने का जुनून सवार हो गया। फिर लगाते गए और लगाते ही रहे। वह दौर था जब पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं होता था।

    रेगिस्तान में दूर-दूर तक पानी नहीं मिलता था। पौधों को पानी देने के लिए ऊंट गाड़ी पर मटके रखकर 4 से 5 किलोमीटर चलते थे। रेत के टिले पर पानी तक पहुंचने के लिए 150-200 कदम चलकर 20 लीटर पानी से भरा मटका या फिर चमड़े के बने बैग में पानी भरकर पुन: ऊंट गाड़ी तक पहुंचते थे। पौधों को पानी डालते-डालते सुबह से शाम हो जाती थी। कंकेडी को कम पानी की आवश्यकता होती है। इसलिए पौधा जल्द विकसित हो जाता था। हिसार और सिरसा जिले में एक कार्यक्रम के दौरान पहुंचे राणा राम ने अपने अनुभव दैनिक जागरण संवाददाता से साझा किए।

    एक पौधा-एक मटका-एक माह

    टर्बन ट्री मैन बताते हैं कि मटके में भरा 20 लीटर पानी एक पौधे के लिए एक माह चलता था। ऐसे में एक माह बाद बारी आती थी। उनको देखकर गांव के युवा मुहिम से जुडऩे लगे। उनका सहयोग मिला तो धीरे-धीरे पूरा गांव हरा भरा हो गया। कंकेडी के लिए वह घर पर खुद बीज तैयार करते थे। चूंकि उस समय कोई नर्सरी तो होती नहीं थी। तैयार बीज को सब लोगों में बांट देते थे।

    असल नाम है रणजीत राम, कहते हैं राणा राम

    वैसे तो राणा राम टर्बन मैन, ट्री मैन या फिर मटका मैन के नाम से पूरे देश में विख्यात हैं। लेकिन उनका पूरा नाम कोई नहीं जानता। दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड में उनका नाम रणजीत राम बिश्नोई है। राणा उपाधि मिली हुई है। पूरा नाम है राणा रणजीत राम बिश्नोई। उनके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा फौजी है तो छोटा बेटा उनके साथ रहता है।

    अशिक्षित हैं पर अध्यापक हैं

    ट्री मैन अशिक्षित हैं। इसके बावजूद वे टीचर हैं। वे युवाओं को पेड़-पौधे लगाने के लिए अध्यापक की माफिक समझाते हैं। उन्हें बताते हैं कि पेड़ों का जिंदगी में क्या महत्व है। 60 वर्ष के संघर्ष की कहानी सुनाते हैं। उनके अनुभव फैक्टस का काम करते हैं। उनका कहना है कि पढ़ाई-लिखाई अगर बाजार में मिलती होती तो वे उसे खरीद लेते। लेकिन यह असंभव है। वे तो सिर्फ पेड़-पौधे लगाकर उन्हें बचाना जानते हैं, इसके लिए युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं।

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    आज 50001वां पौधा डबवाली की बिश्नोई धर्मशाला में लगाया है। गुरु जंभेश्वर भगवान ने कंकेडी के नीचे बैठकर तपस्या की थी। यह पौधा कम पानी में विकसित होता है, प्राण वायु यानी ऑक्सीजन देता है। मैं तो सबसे यहीं कहना चाहता हूं कि पेड़ लगाओ, उसकी देखभाल करो।

    -राणा रणजीत राम बिश्नोई, टर्बन ट्री मैन