हिसार [वैभव शर्मा] छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में पाया जाने वाला कालीमासी काले रंग वाले यानी कड़कनाथ मुर्गों को हरियाणा नई पहचान देने की कोशिश कर रहा है। भारतीय नस्ल का यह मुर्गा पहले से ही गुणों से भरा हुआ है। मगर अब इसकी नस्ल में कुछ परिवर्तन कर इसे और गुणों से लैस बनाया जा रहा है। इस कार्य को हिसार स्थित लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के पशु अनुवांशिकी एवं प्रजनन विभाग के विज्ञानियों द्वारा किया जा रहा है। यहां विज्ञानी कड़कनाथ मुर्गे की नस्ल में जेनेटिक सुधार कर उसे जल्द बड़ा होने वाला, वजनदार और ज्‍यादा अंडे देने की क्षमता वाला बना रहे हैं।

इसमें विज्ञानियों को काफी सफलता भी मिली चुकी है। विज्ञानियों के शोध और अनुवांशकीय परिवर्तन से कड़कनाथ प्रजाति की नई पीढ़ी के मुर्गे व मुर्गी का वजन भी बढ़ा और अंडा उत्पादन क्षमता में भी बढ़ोतरी मिल रही है। इसके साथ ही हरियाणा, पंजाब सहित अन्य राज्यों से भी इस मुर्गे के लिए मांग विश्वविद्यालय में आती रहती है। यह कार्य पशु अनुवांशिकी एवं प्रजनन विभाग के अध्यक्ष डा. अभय सिंह यादव की देखरेख किया जा रहा है। वहीं, इस कार्य काे प्राेफेसर और पोल्ट्री फार्म इंचार्ज डा. देवेंद्र दलाल कर रहे हैं।

जेनेटिक सुधार के बाद कड़कनाथ मुर्गे में यह हुआ बदलाव

डा. देवेंद्र दलाल बताते हैं कि भारतीय मुर्गों की नस्लों में कड़कनाथ सबसे उत्तम नस्ल है। इसमें बीमारियों से लड़ने की क्षमता है। बैकयार्ड पोल्ट्री यानि छोटे किसानों के लिए कड़कनाथ मुर्गी पालन अपनी आय बढ़ाने का काफी अच्छा तरीका है। जब विज्ञानियों ने कड़कनाथ मुर्गे में जेनेटिक सुधार किए तो उन्होंने इसके मीट का वजन बढ़ाया है और अंडा उत्पाद भी बढ़ा है। कड़कनाथ मुर्गा की नई पीढ़ी और असरदार हो गई है। पहले यह 40 सप्ताह में 59 अंडे देती थी मगर नस्ल सुधार के बाद यह 66 अंडे दे रही हैं। यह वर्ष में 120 अंडे देती है। पहले 20 सप्ताह में यह 900 ग्राम वजन का होता था अब 1200 ग्राम का किया जा चुका है।

50 रुपये का बिकता है एक अंडा, अस्पतालों में भी किया जाता है प्रयोग

विज्ञानी बताते हैं कि पहले यह 600 रुपये प्रति किलोग्राम तो अब 800 रुपये तक बिक जाता है। इसके साथ ही कड़कनाथ मुर्गी का एक अंडा 50 रुपये में बिकता है। इसका प्रयोग अस्पतालों में भी होता है, क्योंकि यह कई बीमारियों से लड़ने में हमारी मदद करता है। यह मुर्गा 40 सप्ताह डेढ़ किलोग्राम का हो जाता है और अधिकतम ढाई किलोग्राम का इसका वजन अभी रिकॉर्ड किया है। इसके साथ ही कड़कनाथ मुर्गी 24 सप्ताह में अंडा देने युक्त हो जाती है।

इसलिए है कड़कनाथ की महत्ता

प्रोटीन---

कड़कनाथ - 25 फीसद

सामान्य मुर्गा- 18 फीसद

फैट----

कड़कनाथ - 0.7321.03 फीसद

सामान्य मुर्गा- 13 फीसद

कोलेस्ट्रोल----

कड़कनाथ - 184 एमजी प्रति 100 ग्राम

सामान्य मुर्गा- 218 एमजी प्रति 100 ग्राम

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कड़कनाथ मुर्गे की प्रजाति में यह हैं विशेषताएं

कड़कनाथ मुर्गा काफी गुणवत्ता युक्त होता है। कड़कनाथ मुर्गा के मीट में पाए जाने वाले लौह तत्व, कई विटामिन और प्रोटीनयुक्त मीट के कारण यह प्रसिद्ध हो चुका है। इसके अंडे भी काफी प्रोटीनयुक्त होते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस मुर्गे का मीट एनीमिया, तनाव और विटिलिगो (त्वचा संबंधी समस्याएं) में तो बहुत ही कारगर है। इसके सभी पंख काले होते हैं और खून का रंग भी काला होता है। इसके साथ ही अंडे का रंग काला और भूरा हो सकता है। इसके साथ ही यह नस्ल किचन की गंदगी और सब्जियों को कचरा भी खाकर गुजार कर लेते हैं।

---डा. गुरदयाल सिंह, कुलपति, लुवास हिसार ने कहा कि लुवास के विज्ञानी देसी नस्लों में सुधार कर रहे हैं, ताकि हमारे किसानों की आय में इजाफा हो। देसी गाय और मुर्गों की देसी नस्लें भी इस कार्यक्रम का हिस्सा हैं। कड़कनाथ मुर्गे में नस्ल सुधार कार्यक्रम काफी अच्छी प्रगति पर है। छोटे किसान इसे अपनाएं तो काफी लाभ कमा सकते हैं।

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