कक्षा आठवीं से ही झज्जर एएसपी भारती डबास ने अखबार पढ़ने की डाली आदत, फिर बन गई पुलिस अधिकारी
झज्जर एएसपी भारती डबास ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर पहले प्रयास में ही हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा को पास किया था। वे उस वक्त 22 वर्ष की थी। एएसपी भारती डबास ने बताया कि उन्होंने ठान लिया था कि वह एक पुलिस अधिकारी बन कर रहेंगी।

जागरण संवाददाता, झज्जर : हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा में हर साल लाखों बच्चे अपना भविष्य आजमाते हैं। मगर सफलता कुछ को ही प्राप्त होती है। इस परीक्षा को पास करने के लिए कई छात्र कोचिंग का सहारा लेते हैं तो कई सेल्फ स्टडी के दम पर परीक्षा को उत्तीर्ण कर जाते हैं। मौजूदा झज्जर एएसपी भारती डबास ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर पहले प्रयास में ही हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा को पास किया था। भारती डबास ने जब एचपीएससी का एग्जाम दिया था तो उस वक्त उम्र करीब 22 वर्ष थी।
एएसपी भारती डबास ने बताया कि उन्होंने पहले ही मन में ठान लिया था कि वह एक पुलिस अधिकारी बन कर रहेंगी। भारती डबास के पिता हारट्रोन में डिप्टी इंजीनियर और मां डीएवी स्कूल अंबाला में एक अध्यापिक हैं। घर में पढ़ाई का माहौल पहले से ही था। एक दिन उनके माता-पिता ने करियर को लेकर पूछा की वह करना चाहती हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उन्हें एक पुलिस अधिकारी बनना है। उस दौरान वह कालेज में पढ़ती थी। भारती डबास अंबाला के जीएमएम कालेज से बीए कर थी।
कालेज के दिनों में ही उन्होंने अपना लक्ष्य सोच लिया था। उसके बाद वह कड़ी मेहनत से रात दिन पढ़ाई में जुट गई। दिन में वह कालेज में अपने विषय की पढ़ाई किया करती थी। फिर दोपहर 3 बजे के बाद कालेज की लाइब्रेरी में बैठकर किताबें पढ़ती थी। कालेज की पढ़ाई खत्म होने के बाद मास्टर आफ साइकोलजी, पंजाब यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। मास्टर्स की पढ़ाई करते वक्त उन्होंने 2009 में अपना पहला अटेंप्ट दिया। परीक्षा क्लीयर होने के बाद 2010 में इंटरव्यू हुआ। 2011 में उनका हरियाणा पुलिस सर्विस में चयन हुआ।
पूरे दिन में 6 से 7 घंटे होती थी पढ़ाई
भारती डबास मास्टर्स और एचपीएससी की तैयारी एक साथ कर रही थी। उन्होंने बताया कि फिलहाल दोनों ही एक साथ करने में थोड़ी बहुत दिक्कत तो होती थी। मगर पूरा ध्यान एचपीएससी की परीक्षा पास करने पर था। वह पूरे दिन में 6 से 7 घंटे पढ़ाई पर देती थी। भारती डबास ने बताया कि जब उनके एचपीएससी के पेपर चल रहे थे, उस वक्त एमए के भी पेपर साथ में ही दे रही थी। मगर कभी भी दबाव को अपने ऊपर हावी होने नहीं दिया। हर परिस्थितियों से डटकर सामना किया।
डबास पहले से ही पढाई में थी अव्वल
भारती डबास पहले से ही पढ़ाई में काफी होशियार थी। उन्होंने 12वीं कक्षा भी उस समय काफी अच्छे नंबरों से पास की थी। कालेज के दिनों में ही उन्होंने एनसीसी ज्वाइन की हुई थी। इससे भी उन्हें काफी फायदा मिला। उसके बाद उनका चयन थल सेना कैंप में हुआ। जहां पर उनकी एक से डेढ़ महीना तक ट्रेनिंग चली। बता दें कि थल सेना कैंप में बहुत ही कम छात्र चुने जाते हैं। थल सेना कैंप में उन्हीं छात्रों को मौका मिलता है जिनमें अच्छी प्रतिभा होती है। उस वक्त हरियाणा की तरफ से केवल दो से तीन छात्र चुने गए थे, जिनमें भारती भी शामिल थी।
पति हैं आईआरएस अधिकारी
भारती डबास की शादी 2012 में हुई थी। उनके पति सुदीप डबास 2014 में आईआरएस अधिकारी बने। वहीं, ससुर एडीजीपी होमगार्ड पद से रिटायर्ड हैं।
युवाओं को दिया अखबार पढ़ने का संदेश
एग्जाम की तैयारी कर रहे युवाओं को संदेश देते हुए भारती डबास ने कहा है कि उन्होंने आठवीं कक्षा से ही अखबारों को पढ़ना आरंभ कर दिया था। कुछ समय के लिए ही अखबार पढ़ती थी। मगर अखबार को पढ़ने की अहमियत वह पहले ही समझ चुकी थी। उन्होंने एग्जाम की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए कहा है कि जितना हो सके वह करंट अफेयर्स और जनरल नालेज पर ध्यान दें। क्योंकि जितना ज्यादा मौजूदा समय से अवगत रहेंगे उतना ही फायदा एग्जाम में भी होगा। मैगजीन और अखबारों को पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। मौजूदा समय में इंटरनेट मीडिया भी पढ़ने के लिए कारागार सिध्द हो रहा है। इंटरनेट मीडिया में कई यूट्यूब चैनल काफी अच्छा पढ़ाते हैं। इनके माध्यम से भी लाभ उठा सकते हैं।
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