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    निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करना ही है भलाई

    By JagranEdited By:
    Updated: Thu, 12 Nov 2020 06:06 AM (IST)

    भलाई का अर्थ है दूसरों की निस्वार्थ भाव से सहायता करना या उनका भला करना। यह व्यक्ति को न केवल सदाचारी बनाता है बल्कि ताकतवर भी बनाता है क्योंकि ताकत कभी जीतने से नहीं आती।

    निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करना ही है भलाई

    ईश्वर ने मनुष्य को संसार का सबसे बुद्धिमान प्राणी बनाया है। ईश्वर ने प्रकृति की रचना ही इस प्रकार से की है कि भलाई को उसके केंद्र में रखा है। भलाई मानवीय के साथ दैवीय गुण भी है। यह एक ऐसा गुण है जो इंसान को ऊंचा उठाकर देवताओं के स्तर तक ले जाता है। भलाई का अर्थ है दूसरों की निस्वार्थ भाव से सहायता करना या उनका भला करना। यह व्यक्ति को न केवल सदाचारी बनाता है, बल्कि ताकतवर भी बनाता है, क्योंकि ताकत कभी जीतने से नहीं आती। ताकत हमेशा लोगों की भलाई करने से आती है। ताकतवर लोग भी वही हैं जो अपनी ताकत का प्रयोग दूसरों की भलाई के लिए करते हैं, न कि उनको पीड़ा देने या उनका शोषण करने के लिए।

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    ताकत से प्राप्त की गई जीत अल्पकालीन होती है, जबकि भलाई से प्राप्त की गई जीत दीर्घकालीन व स्थाई होती है। भलाई में इतनी ताकत होती है कि यह एक इंसान को फरिश्ता बना सकती है। इसकी ताकत से कोई शत्रु भी मित्र बन सकता है। जो व्यक्ति निस्वार्थ होकर किसी की भलाई करता है, वह व्यक्ति संत या उत्तम पुरुष की उपाधि पा लेते हैं। जिस प्रकार शोषण दमन करने वाले और शोषित दोनों को पीड़ा देता है, उसके बिल्कुल विपरीत भलाई करने वाला और भलाई पाने वाला दोनों को संतोष का अनुभव होता है।

    भलाई करने से न केवल इस संसार को बेहतर व आनंददायक बनाया जा सकता है, बल्कि अपने आपको भी अच्छा बनाया जा सकता है। भलाई करने से मानसिक रूप से शांति मिलती है, जो हमारे स्वास्थ्य में सुधार करती है और हमारे जीवन काल में वृद्धि करती है। भलाई से एक व्यक्ति को परम शांति अनुभव होती है जो मनुष्य व समाज को अनेक प्रकार की बीमारियों व कुरीतियों से बचाती है।

    - सुनीता कुमारी, प्रिसिपल, स्वामी सर्वानंद मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, धमाना