Haryana News: 101 दिन की हुई नायब सरकार, जानिए वो 10 बड़े फैसले; जिन्होंने खींचा लोगों का ध्यान
Haryana News नायब सैनी की सरकार जब 12 मार्च को सत्ता में आई थी तब उसके पास 90 सदस्यीय विधानसभा में 48 विधायकों का समर्थन हासिल था। बाद में कई मौके ऐसे आए जब विधानसभा में विधायकों की संख्या को लेकर उतार चढ़ाव आता रहा। नायब सरकार की स्थिरता पर फिलहाल संकट नहीं। नायब सरकार 101 दिनों की हो गई है।

अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के 101 दिन शुक्रवार को पूरे हो गए हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व में जहां लोकसभा चुनाव लड़ा गया, वहीं उन्होंने करनाल विधानसभा सीट से उपचुनाव भी लड़ा और जीत हासिल की। मुख्यमंत्री के तौर पर नायब सैनी के करीब एक दर्जन फैसले ऐसे हैं, जो उन्हें दूसरे मुख्यमंत्रियों से अलग करने के साथ ही निर्णय लेने में मजबूत साबित करते हैं।
नायब सिंह सैनी की सरकार की स्थिरता पर फिलहाल कोई संकट दिखाई नहीं पड़ रहा है। भाजपा के अध्यक्ष एवं कुरुक्षेत्र के तत्कालीन सांसद नायब सिंह सैनी ने 12 मार्च को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी। उसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने नायब सिंह सैनी के लिए करनाल विधानसभा सीट छोड़ दी थी।
आचार संहिता में बंधे रहे हाथ
नायब सैनी के मुख्यमंत्री बनने के चार दिन बाद ही 16 मार्च को केंद्रीय चुनाव आयोग ने 18वीं लोकसभा के आम चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम घोषित कर दिया था, जिसके फलस्वरूप न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई, जो ढ़ाई माह से अधिक समय तक चली। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि राज्य में सातवें चरण में लोकसभा चुनाव हुए।
एक के बाद लिए एक फैसले
इसी माह पांच जून को चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने के बाद आचार संहिता हटते ही मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एक के बाद एक कई ऐसे फैसले लिए, जिनकी प्रदेश के लोगों ने सराहना की है। मुख्यमंत्री ने सबसे बड़ी पहल राज्य के लोगों के लिए सीएम हाउस के दरवाजे खोलकर की।
अब राज्यभर से मिलने के लिए लोग सीएम हाउस आते हैं। चुनाव से पहले नए जिले, उपमंडल व तहसीलों और उप तहसीलों के लिए कृषि मंत्री कंवरपाल गुर्जर के नेतृत्व में कमेटी का पुनर्गठन किया।
खिलाड़ियों को आरक्षण की व्यवस्था
हिसार एयरपोर्ट से 10 हजार मीटर रनवे सहित करीब 550 करोड़ रुपये की 28 परियोजनाएं जनता को समर्पित की। प्रदेश में जमीनों के कलेक्टर रेट बढ़ाने संबंधी राजस्व विभाग की फाइल को वापस लौटा दिया।
पूर्व सीएम मनोहर लाल के साथ मिलकर कांग्रेस नेत्री किरण चौधरी व उनकी बेटी श्रुति चौधरी को भाजपा में शामिल कराया। खिलाड़ियों को तृतीय श्रेणी की नौकरियों में तीन प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था लागू की है।
पेंशन में बढ़ोतरी के संकेत
परिवार पहचान पत्र और प्रापर्टी आइडी में सुधार के लिए हर जिले में सुबह नौ बजे से 11 बजे तक समाधान शिविर लगाने की पहल भी सीएम नायब सैनी ने की है।
सरकारी नौकरियों में सामाजिक और आर्थिक आधार पर दिए गए अंकों को खारिज करने के हाई कोर्ट के फैसले के विरुद्ध नायब सरकार सुप्रीम कोर्ट में पहुंची है। राई खेल स्कूल का नियंत्रण विवि के अधीन सौंप दिया, जबकि पेंशन में बढ़ोतरी के संकेत भी दिए हैं।
ये फैसले रहे ध्यान खींचने वाले
- जितनी बिजली खर्चेंगे, उतना ही देना होगा बिल। दो किलोवाट तक स्वीकृत लोड के घरेलू उपभोक्ताओं को न्यूनतम मासिक शुल्क देय नहीं होगा।
- शहरों में नो ड्यूज सर्टिफिकेट के बिना खरीदी बेची जाएगी कृषि भूमि। प्रापर्टी टैक्स और विकास शुल्क नहीं लगेगा।
- हिसार से चंडीगढ़ समेत पांच राज्यों के लिए उड़ान हेतु हरियाणा सरकार और एलायंस एयर एविएशन कंपनी के बीच समझौता।
- सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और आश्रितों के उपचार के लिए कैशलेस स्कीम।
- हरियाणा में बड़े प्लाटों का पंजीकरण अब टुकड़ों में संभव।
- अनुसूचित जाति के छात्रों को दाखिले के साथ ही पोस्ट मैटिक छात्रवृत्ति।
- करीब 20 हजार वंचित दलित वर्ग के लोगों को सौ-सौ वर्ग गज के प्लाटों पर कब्जा और जिन्हें कब्जा नहीं, तो उनके खातों में एक-एक लाख रुपये।
- प्रदेश में एससी-बीसी चौपालों की मरम्मत के आदेश।
- राज्य में करीब 50 हजार सरकारी भर्तियों की घोषणा।
- प्रदेश के सरपंचों के माध्यम से जिला परिषद के कार्यों को मंजूरी।
अल्पमत में होने का आरोप
मुख्यमंत्री नायब सैनी की सरकार जब 12 मार्च को सत्ता में आई थी, तब उसके पास 90 सदस्यीय विधानसभा में 48 विधायकों का समर्थन हासिल था। बाद में कई मौके ऐसे आए, जब विधानसभा में विधायकों की संख्या को लेकर उतार चढ़ाव आता रहा।
वर्तमान 87 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में मौजूदा 101 दिन पुरानी नायब सैनी सरकार बहुमत या अल्पमत में है, यह केवल विधानसभा सदन में सरकार द्वारा फ्लोर टेस्ट के पश्चात अर्थात विश्वासमत हासिल करने या नहीं कर पाने के आधार पर ही साबित हो सकता है। लेकिन सरकार बहुमत में होने का दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस इसके अल्पमत में होने की बात कह रहे हैं।
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