जागरण संवाददाता, हिसार। पिछले कुछ दिनों में हिसार जिल में अधिक बारिश आने से मौसम में अधिक नमी बढ़ने के कारण ग्वार फसल में फंगस रोग दोबारा उभर कर आ रहा है। यह बीमारी बढ़ने से किसानों की चिन्ता होना वाजिब है। इस तरह का मौसम कई सालों बाद बना है। एचएयू से सेवानिवृत ग्वार वैज्ञानिक डा. बीडी यादव बताते हैं ग्वार की फसल में बारिश का अलग ही प्रभाव दिख रहा है। कई स्थानों पर फंगस रोग से ग्वार ग्रसित हो गई है। इसके साथ ही किसान अगर इस पर दवा स्प्रै भी कर रहे हैं तो यह फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। क्योंकि दवा खरीदने से पहले किसानों ने जानकारी ही नहीं ली कि कौन सी दवा लेनी है। 

कृषि रसायनों का प्रयोग हो सकता है नुकसानदायक

कृषि रसायनों का बैगर सिफारिश के प्रयोग करना किसानों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ग्वार फसल में कीटों व फंगस की बीमारियों के उपाय के बारे में कृषि विभाग के अधिकारियों व कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर दवाई खरीदें। नमी बहुत ज्यादा बढ़ जाने के कारण ग्वार के पत्ते काले पडऩे शुरू हो गये है, इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि जिन किसानों ने फंगस की रोकथाम के लिए कोई भी या एक स्प्रे किया उनको इस बीमारी की रोकथाम के लिए तुरंत स्प्रे करने की सलाह दी जाती है।

दवा खरीदते समय किन-किन बातों का रखे ध्यान 

विक्रेता से दवाई खरीदते समय पक्का बिल अवश्य लें तथा दवा की बोतल पर समाप्ति तिथि अवश्य जांच करें और बिल कटवाते समय बिल में दवा का बैच नम्बर अवष्य लिखवाएं। कृषि सलाहकार से जानकारी ले कर ही स्प्रे करें। ज्यादा किसान ग्वार फसल की कीटों व बीमारियां पर स्प्रे कृषि रसायन विक्रेता के कहने पर स्प्रे करते हैं और यह भी देखा गया कि काफी किसान जब बीमारी का प्रकोप बढ़ जाता है, उस समय स्प्रे करने की सोचते हैं। उस अवस्था तक किसानों का काफी नुकसान हो चुका होता है। 

जीवांणु अंगमारी बीमारी की रोकथाम कैसे करें

ग्वार विषेषज्ञ डा. बीडी यादव ने कहा जिन किसानों ने जीवाणु अंगमारी (फंगस) रोग का एक ही स्प्रे किया है तो उन किसानों को सलाह दी जाती है कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए दूसरा स्प्रे के लिए 30 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन व 400 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराईड को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। अगर इन बीमारियों के साथ हरा तेला व सफेद कीड़ों का प्रकोप हो तो उसकी पहचान करके इसके नियंत्रण के लिए 250 मि.ली. मैलाथियोन-50 ई.सी. या डाइमेथोएट (रोगोर) 30 ई.सी. प्रति एकड़ उपरोक्त घोल में मिलाकर छिड़काव तुरंत करें। जो किसान उपरोक्त दवाईयों का प्रयोग बताये गए समय पर स्प्रे करते हैं उनकी पैदावार हटकर अलग से आती है।

आल्टरनेरिया लीफ स्पोट बीमारी की रोकथाम कैसे करें

डॉ यादव ने कहा कि यह ग्वार फसल की दूसरी मुख्य बीमारी है। इस रोग में पत्तियों पर छोटे गहरे, भूरे गोल आकार के धब्बे दिखाई देने लगते है यह धब्बे आकार में तेजी से बढ़ते हैं और गहरे भूरे रंग के हो जाते हैं। सक्रंमित फलियों में भूरे रंग के छोटे एवं सिकुड़े बीज हो जाते हैं। मौसम में अधिक तापमान होने पर यह रोग आता है। इस बार के मौसम को देखते हुए इस बीमारी का अनुकूल वातावरण बनने से इस बीमारी के लक्ष्ण काफी नजर आ रहे हैं। इस रोग की रोकथाम के लिए 400 ग्राम डाइथेन एम-45 (मेन्कोजैब) दवाई को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

Edited By: Rajesh Kumar