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किसान आंदोलन: टीकरी बॉर्डर पर सड़क खोदकर लगाई कीलें व सरिया, बैरिकेडिंग पर लगाए ब्‍लेडनुमा तार

किसान आंदोलन को लेकर दिल्ली पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था काे बॉर्डरों पर और भी मजबूत कर दिया गया है। किल सरिया तार के अलावा बॉर्डर पर रोड रोलर भी खड़े कर दिए हैं ताकि किसान अगर दिल्ली में घुसने का प्रयास करें तो उन्हें रोका जा सके।

By Manoj KumarEdited By: Mon, 01 Feb 2021 05:23 PM (IST)
दिल्‍ली बॉर्डर पर सड़क खोदकर लगाई गई कीलें व सरिया

बहादुरगढ़, जेएनएन। टीकरी बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी गई है। पहले यहां पर सीसी की दीवार बनाई गई थी। सात लेयर में बैरिकेडिंग कर रखी थी, मगर अब सड़क खोदकर उसमें लंबी-लंबी कीलें व नुकीले सरिया लगा दिए गए हैं। दिल्ली पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था काे यहां पर और भी मजबूत कर दिया गया है। बॉर्डर पर रोड रोलर भी अब खड़े कर दिए गए हैं  ताकि किसान अगर दिल्ली में घुसने का प्रयास करें तो उन्हें रोकने के लिए रोड रोलर को सड़क पर खड़ा किया जा सके।

यहां पर कई लेयर की सुरक्षा व्यवस्था बॉर्डर पर ही थी। इसके बाद टीकरी कलां गांव तक जगह-जगह बैरिकेडिंग की दीवार खड़ी कर दी थी। टीकरी बॉर्डर पर ही दिल्ली पुलिस की ओर से सीसी की दीवार बना दी गई थी। चार फीट मोटी यह दीवार बनाई गई है। इसके 10 कदम पर दिल्ली की तरफ एमसीडी टोल के पास बॉर्डर पर ही सड़क खोद कर उसकी जगह पर सीमेंट में लोहे की कीलें लगवा दी गई हैं। साथ ही लोहे के सरिया नुकीले बनवाकर यहां पर लगवा दिए गए हैं, ताकि कोई भी वाहन यहां से गुजर ना सके। यहां से लोगों के आने-जाने में भी काफी परेशानी होगी।

कीलों से गुजरने में वाहन का पंक्चर हो जाएगा। पूरा टायर ही खराब हो जाएगा। यहां से निकलना अब मुश्किल होगा। बॉर्डर पर सुरक्षा बलों की 15 कंपनियां पहले से ही तैनात हैं। गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसक घटनाओं के बाद यहां हर रोज सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है। इसी कड़ी में लोहे की कीलें लगाई गई हैं। दिल्ली पुलिस का कहना है कि यहां से किसी भी किसान को दिल्ली जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यह सुरक्षा व्यवस्था इसलिए बढ़ाई जा रही है ताकि कोई भी किसान यहां से निकलकर दिल्ली की सीमा में घुस सके। उधर, हर रोज बढ़ी रही सुरक्षा व्यवस्था व बैरिकेडिंग से किसानों में भी डर फैल रहा है। किसानों का कहना है कि देश के अन्नदाता को रोकने के लिए ऐसे इंतजाम किए जा रहे हैं, जैसे कि हम किसान नहीं बल्कि कोई आतंकवादी हों।