भूलकर भी फोन में डाउनलोड न करें रिमोट एक्सेस वाली ये एप्लीकेशन, गवां देंगे रकम
डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिला है उतनी ही तेजी से ठगी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। इनको सुलझाकर दोषियों को सजा दिलाना पुलिस के लिए भी चुनौती है। खुद को ठगों से बचाने के लिए सबसे जरूरी है जागरूकता और सतर्कता।

विनीत तोमर, रोहतक। देश में जितनी तेजी से डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिला है उतनी ही तेजी से ठगी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। इनको सुलझाकर दोषियों को सजा दिलाना पुलिस के लिए भी चुनौती है। खुद को ठगों से बचाने के लिए सबसे जरूरी है जागरूकता और सतर्कता। यदि आप स्मार्ट फोन रखते हैं तो हम आपको कुछ ऐसे एप्लीकेशन के बारे में बताएंगे जिनके माध्यम से ठग मिनटों में आपके खाते की रकम साफ कर रहे हैं।
एनी डेस्क: यह एप्लीकेशन मोबाइल और कंप्यूटर दोनों पर काम करता है। उदाहरण के तौर यदि ठग आपको विश्वास में लेकर यह एप्लीकेशन आपके मोबाइल फोन में इंस्टाल करा देते हैं तो इसका मतलब यह है कि आपने अपने मोबाइल का आपरेटिंग सिस्टम उस ठग को दे दिया।
ठग आपके फोन का पर्सनल डेटा से लेकर अन्य एप्लीकेशन का भी इस्तेमाल कर सकता है। सामान्य तौर पर इस एप्लीकेशन का इस्तेमाल आफिस या कारपोरेट कंपनियों में होता है। जहां दूर बैठा इंजीनियर आफिस में रखे कंप्यूटर को आसानी से ठीक कर सकता है, लेकिन आजकल इसका इस्तेमाल ठग कर रहे हैं।
क्विक स्पोर्ट: इस एप्लीकेशन में भी रिमोट एक्सेस है। इसका काम भी एनीडेस्क की तरह ही होता है। इस एप्लीकेशन से आप दूसरी डिवाइस को कहीं से भी इंटरनेट के माध्यम से चला सकते हैं। इसके माध्यम से फाइल ट्रांसफर, वेब कान्फ्रेंसिंग, डेस्कटाप शेयरिंग आदि काम भी कर सकते हैं।
टीम विवर: इस एप्लीकेशन का काम भी एनीडेस्क और क्विक स्पोर्ट की तरह ही होता है। हालांकि इन सभी एप्लीकेशन का इस्तेमाल करने के लिए आइडी और पासवर्ड की जरूरत होती है। इसके बाद ही यह काम करते हैं।
नोट : इनके अलावा भी कई रिमोट एक्सेस एप्लीकेशन हैं, जो ठग इस्तेमाल करते हैं।
इस तरह बनाते हैं शिकार
रोहतक साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह ने बताया कि फिलहाल ऐसे मामले आ रहे हैं कि ठग बैंक या किसी अन्य विभाग के अधिकारी बनकर काल करते हैं। वह आपसे इनमें से कोई एप्लीकेशन डाउनलोड करने के लिए कहेंगे। एप्लीकेशन डाउनलोड होने के बाद वह आपसे आइडी और पासवर्ड पूछेंगे, जो इन एप्लीकेशन में जनरेट होता है। जैसे ही आप आइडी-पासवर्ड शेयर करते हैं आपका मोबाइल फोन पर ठग का नियंत्रण हो जाता है।
खाते में रुपये आने के लिए नहीं होती ओटीपी की जरूरत
साइबर ठगों से बचने के लिए जरूरी है कि आपको पता हो कि किन चीजों के लिए ओटीपी जरूरी है। हमेशा याद रखें कि हमारे खाते से दूसरे के खाते में रुपये भेजने के लिए हमें ओटीपी की आवश्यकता होती है। यदि कोई अन्य व्यक्ति आपके पास रुपये भेजता है तो उसके लिए आपको ओटीपी बताने की जरूरत नहीं है। ठग अक्सर इसी का फायदा उठाकर शिकार बनाते हैं।
साइबर ठगी के केस लगातार बढ़ रहे हैं। इन पर शिकंजा कसने के लिए सभी जिलों में साइबर थाने खोले जा रहे हैं। इनमें ऐसे स्टाफ को तैनात किया गया है जिन्हें साइबर की अच्छी जानकारी है। उन्हें समय-समय पर ट्रेनिंग भी कराई जा रही है। साइबर ठगी को लेकर पुलिस काफी अलर्ट है। फिर भी साइबर ठगों से बचने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। यदि व्यक्ति जागरूक है तो वह साइबर ठगों का शिकार होने से बच सकता है।
- ममता सिंह, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रोहतक रेंज
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