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    United Punjab: हरियाणा का कस्बा डबवाली संजोए हुए है संयुक्त पंजाब की निशानियां, जो दे रही इतिहास की गवाही

    By Naveen DalalEdited By:
    Updated: Sun, 31 Oct 2021 06:46 PM (IST)

    डबवाली में करीब 75 साल पहले अंग्रेजों के जमाने में श्री दुर्गा मंदिर बना था। उस समय अंग्रेजों की घोड़ा फौज वहां रुकती थी। शहर के कुछ लोगों ने हिंदू बारात घर की स्थापना करके वहां जयपुर से निर्मित दुर्गा की मूर्ति स्थापित की थी।

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    संयुक्त पंजाब के समय बनाया गया मैटरनिटी अस्पताल।

    डबवाली, (सिरसा), जागरण संवाददाता। पंजाब सीमा पर बसा हरियाणा का कस्बा डबवाली संयुक्त पंजाब का इतिहास संजोए हुए है। यह ऐसा शहर है, यहां दोनों प्रदेशों की असली तस्वीर नजर आती है। कुछ कदम चलते ही कब पंजाब शुरू हो जाए, इसका पता नहीं चलता। तो सीमा पर बसे कई घर ऐसे हैं, जिसकी मुख्य दरवाजा तो हरियाणा में खुलता है, शेष घर पंजाब में। रसोई पंजाब में है तो लोग हरियाणा में बैठकर खाना खाते हैं। समय के साथ-साथ दोनों प्रदेशों की यह निशानियां मिटती जा रही हैं। इसके अलावा भी डबवाली में बहुत कुछ है जो संयुक्त पंजाब की देन है। अर्थात वर्ष 1966 में हरियाणा बनने के बाद वो चीजें डबवाली में रह गई। हम इसे विरासत कह सकते हैं। इसे संभालने तथा सहेजने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ी इतिहास से रूबरू हो सकें। उनका ज्ञानवर्धन हो सकें।

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    संयुक्त पंजाब के समय सुरक्षित मातृत्व के प्रयास आरंभ हो गए थे। उस समय डिलीवरी हट या फिर प्रसूति गृह शब्द का प्रयोग नहीं होता था। म्युनिसिपल बोर्ड प्रसूता गृह बनाता था। करीब छह दशक पहले डबवाली में प्रसूता गृह बनाया गया था। जिससे बनने में तीन वर्ष लगे थे। वर्ष 1955 में संयुक्त पंजाब के शिक्षा, स्वास्थ्य तथा यातायात मंत्री लाला जगत नारायण ने आधारशिला रखी थी। 21 जुलाई 1958 को संयुक्त पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार प्रताप सिंह कैरों ने शुभारंभ किया था। आज भी भवन में दोनों नेताओं के नाम अंकित हैं। खास बात यह है कि विकास के साथ-साथ धार्मिकता की निशानी है।

    दरअसल, स्थानीय उन्नति विकास नामक योजना के तहत प्रसूतिका भवन बनाया गया था। शिलापट्ट पर दोनों ओर ओम अंकित हैं। चूने में बना यह भवन नक्काशी का बेहतरीन उदाहरण है। कमरों की छत काफी ऊंची बनाई गई हैं तो वहीं वेंटिलेशन की अच्छी व्यवस्था है। सभी कमरे एक-दूसरे से सिमटे हुए हैं। बीच में गैलरी बनी हुई है। एक कमरे से दूसरे कमरे में झांका नहीं जा सकता। गैलरी के दोनों हिस्सों को बंद कर दें तो पूरा भवन सुरक्षित नजर आता है। वर्तमान में यहां नगरपरिषद कार्यालय चल रहा है।

    राजनीतिकों ने चालबाजी से छीन लिया फाजिल्का

    संयुक्त पंजाब के समय वर्ष 1957 में अबोहर विधानसभा से विधायक रहे डबवाली के गांव सकताखेड़ा निवासी 100 वर्षीय सही राम धारणियां का कहना है कि उस जमाने में फाजिल्का तहसील हुआ करता था। अधिकतर हिंदी भाषा बोलने वाले लोग रहते थे। वर्ष 1966 में पंजाब-हरियाणा में सीमाएं खिंच गई। फाजिल्का हरियाणा में होना चाहिए था। पूर्व उपप्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल भी यही चाहते थे। लेकिन पंजाब के राजनीतिकों ने ऐसा नहीं होने दिया।

    व्योवृद्ध पूर्व विधायक के मुताबिक राजस्थान की सीमा से बसे गांव गुंजाल तथा पन्नीवाली। यहां पंजाबी भाषा बोलने वाला एक परिवार नहीं रहता था, पंजाब के राजनीतिकों ने दबाव बनाकर सर्वे करवाया। भाषा लिखी गई हिंदी-बागड़ी, पंजाबी-हिंदी, पंजाबी-बागड़ी। इस प्रकार से सर्वे में पंजाबी भाषा को ज्यादा वोट मिले, तो फाजिल्का पंजाब से जुड़ गया। हालांकि उस समय फाजिल्का ऐसा इलाका था, यहां पर राजस्थान से आकर बसने लोग ज्यादा थे। ऐसे में बोलचाल की भाषा हिंदी होने के कारण वे हरियाणा से जुडऩा चाहते थे। वहीं देवीलाल राजनीतिक शक्ति बढ़ाने के लिए फाजिल्का को हरियाणा से मिलाना चाहते थे।

    दुर्गा मंदिर से जुड़ा स्वर्णिम इतिहास

    डबवाली में करीब 75 साल पहले अंग्रेजों के जमाने में श्री दुर्गा मंदिर बना था। उस समय अंग्रेजों की घोड़ा फौज वहां रुकती थी। शहर के कुछ लोगों ने हिंदू बारात घर की स्थापना करके वहां जयपुर से निर्मित दुर्गा की मूर्ति स्थापित की थी। वर्ष 1946-47 के समय जब अंग्रेजों की ताकत कमजोर होने लगी तो लोगों ने प्रयास करके घोड़ा पुलिस को वहां से खदेड़ दिया था। गोरीवाला गांव के नंद राम मंदिर में पहले पुजारी थे।

    महापंजाब का ऐसा सरकारी स्कूल : यहां से निकले दो राज्यों के मुख्यमंत्री

    डबवाली स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय महापंजाब के समय की विरासत नजर आती है। बताते है कि इस विद्यालय ने हरियाणा को ओमप्रकाश चौटाला तो पंजाब को प्रकाश सिंह बादल के रूप में मुख्यमंत्री दिया। दोनों भारत देश की राजनीति में पगड़ी बदल भाई कहलाते हैं। विद्यालय की बात करें तो करीब 131 साल पुराना इतिहास है। वर्ष 1890 के करीब अंग्रेजों ने मदरसे के रूप में इसकी स्थापना की थी। जो आज केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त विद्यालय बन चुका है। यह विद्यालय 1946 में जिला बोर्ड के अधीन आया था। 1953 में नगरपालिका तो 1957 में राज्य सरकार के तहत हो गया था।

    पंजाब में स्थित है जलघर

    संयुक्त पंजाब के समय की निशानियों की बात करें तो डबवाली की आधी आबादी को जिस जलघर से पेयजल की आपूर्ति होती है वह पंजाब में स्थित है। देखरेख, निर्माण कार्य हरियाणा का जनस्वास्थ्य विभाग करवाता है।