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    भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके पिता रणबीर सिंह को हराने वाले चौधरी हरिचंद का 101 वर्ष की आयु में निधन

    By Manoj KumarEdited By:
    Updated: Sun, 17 Apr 2022 10:26 AM (IST)

    भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके पिता रणबीर सिंह हुड्डा को चुनाव में हराने वाले स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के निकट रहे हरिचंद हुड्डा का एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। चौधरी हरिचंद 1977 में रणबीर सिंह हुड्डा और 1982 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को हराकर विधायक बने थे।

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    चौधरी हरिचंद हुड्डा ने 1977 के चुनाव में चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा को हराया, 1982 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को

    जागरण संवाददाता, रोहतक। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके पिता रणबीर सिंह हुड्डा को चुनाव में हराने वाले, स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के निकट रहे हरिचंद हुड्डा का एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। चौधरी हरिचंद 1977 में रणबीर सिंह हुड्डा और 1982 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को हराकर विधायक बने थे। 101 साल पांच महीने और 28 दिन की जिंदगी जीने वाले चौधरी हरिचंद हुड्डा हरियाणा के सबसे बुजुर्ग पूर्व विधायक थे। कभी बीमार नहीं पडे, कोई व्यसन नहीं किया।

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    सन 1982 के चुनाव में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को किलोई विधानसभा क्षेत्र से हराने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु समय-समय पर चौधरी हरिचंद हुड्डा से मिलने उनके आवास पर जाते रहते थे।

    खीर चूरमा के दम पर कोरोना को दे दी थी मात

    चौधरी हरिचंद ने खीर और चूरमा को भोजन में शामिल करना जीवनभर नहीं छोड़ा। 19 अक्टूबर 1920 को रोहतक के चमारियां गांव में पैदा हुए चौधरी हरिचंद ने कोरोना को भी महज पांच दिन में मात दे दी थी। उस दौरान चिकित्सक भी हैरान रह गए थे कि इतनी उम्र में कोरोना को कैसे मात दी। चिकित्सकों ने उनके खान-पान की जानकारी ली तो उन्हें पता चला कि नियमित खीर-चूरमा खाते थे।

    सेना और रेलवे में भी दी सेवा

    हरिचंद हुड्डा ने राजकीय महाविद्यालय से एमए किया। इसके बाद सेना में भर्ती हो गए। बाद में सेना की नौकरी छोड़कर रेलवे में भर्ती हो गए। 1964 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की। इसी दौरान वह किसानों को गन्ने का उचित दाम दिलाने के लिए आंदेालन में शामिल हुए और अनशन भी किया। इसके बाद राजनीति में सक्रिय हुए। वह आपातकाल के दौरान जेल में भी रहे। चौधरी चरण सिंह ने उनको एक जनसभा में चुनावी खर्च के लिए 30 हजार रुपये दिए थे,जिनमें से उन्होंने तीन हजार रुपये रखकर बाकी वापस लौटा दिए थे। आपातकाल में जेल में बंद रहने के दौरान कई किताबें भी उन्होंने लिखीं।