Bahadurgarh: विवादों के घेरे में ईएसआइ डिस्पेंसरी, तीन लाख परिवारों पर एक डाक्टर
बहादुरगढ़ में ईएसआइ डिस्पेंसरी में परेशानियों का अंबार लगा हुआ है। एक तो यह डिस्पेंसरी छोटे से भवन में चल रही है और इसका किराया मोटा है। दूसरा यहां पर महज एक डाक्टर हैं। जिसके कारण लचर व्यवस्था से कामगार परिवारों की पीड़ा बढ़ रही है।

बहादुरगढ़, जागरण संवाददाता। बहादुरगढ़ के शहर के सेक्टर-छह में चल रही ईएसआइ डिस्पेंसरी में परेशानियों का अंबार लगा हुआ है। एक तो यह डिस्पेंसरी छोटे से भवन में चल रही है और इसका किराया मोटा है। दूसरा यहां पर महज एक डाक्टर हैं और यहां से बीमित कर्मचारी 62 हजार जुड़े हुए हैं। इन परिवारों की औसत आबादी तीन लाख से ज्यादा बनती है। मगर सरकार की ओर से इस तरफ ध्यान हीं नहीं दिया जा रहा है। सरकारी उदासीनता और लचर व्यवस्था से कामगार परिवारों की पीड़ा बढ़ रही है।
बुनियादी सुविधाओं की कमी
बहादुरगढ़ में इस समय हजारों उद्योग चल रहे हैं। यहां पर कई राज्यों के कामगार काम करते हैं। उनके परिवार भी शहर और आसपास के गांवों में रहते हैं। मगर बड़ी संख्या में इन कामगारों के लिए सरकार की ओर से बुनियादी स्वास्थ्य सेवा मुहैया नहीं कराई जा रही है। कई साल पहले सरकार की ओर से शहर में ईएसआइ अस्पताल बनाने की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक यह घोषणा हकीकत के धरातल पर नहीं आई है। इतना ही नहीं शहर में ईएसआइ के अंतर्गत जो तीन डिस्पेंसरी है उनमें भी पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। इसी कारण कामगार परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किराया ईएसआइ के मुकाबले आधा
डिस्पेंसरी किराये के भवनों में चल रही हैं। ये भवन छोटे-छोटे हैं। जबकि इनका किराया कहीं ज्यादा। ऊपर से डाक्टरों की कमी। अगर सेक्टर-छह में स्थित ईएसआइ डिस्पेंसरी की ही बात की जाए तो इतने छोटे भवन में है कि स्टाफ के बैठने तक के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। ऊपर से यहां पर बहुत सारा रिकार्ड रखना होता है। दवाइयां और दूसरी चीजें रखनी होती है। इस भवन का किराया लगभग 40 हजार है। यहां के स्टाफ का कहना है कि सेक्टर-छह में ही सीजीएचएस के अंतर्गत डिस्पेंसरी भी चलती है। उस भवन में ईएसआइ डिस्पेंसरी के भवन के मुकाबले तीन गुना ज्यादा जगह है और किराया ईएसआइ के मुकाबले आधा है।
एक डाक्टर से नहीं मिल पाता इलाज, वापस लौटते हैं मरीज
ईएसआइ डिस्पेंसरी की हालत यह है कि यहां पर एक ही डाक्टर है। उनके पास ही एसएमओ का भी चार्ज है। ज्यादा मरीजों के कारण डाक्टर सभी का चेकअप नहीं कर पाते। ऐसे में बहुत से मरीज वापस लौटते हैं। इस डिस्पेंसरी से जुड़े कामगार मोहन कुमार, रामराज, प्रवेश कुमार ने बताया कि यह डिस्पेंसरी ऐसी जगह पर है कि मरीजों को ले जाना आसान नहीं है। पूरा सेक्टर पार करके जाना पड़ता है। वहां तक कोई भी सवारी वाहन नहीं जाते। मरीज को ले जाने के लिए या तो वाहन किराये पर लो या फिर निजी वाहन लेकर जाओ। हर माह वे सरकार को ईएसआइ सुविधा के लिए वेतन से निर्धारित राशि भी अदा करते हैं, इसके बावजूद सुविधा नहीं मिल पा रही है।
डा. संजय कुमार के अनुसार
ईएसआइ डिस्पेंसरी के एसएमओ डा. संजय कुमार ने बताया कि ईएसआइ डिस्पेंसरी में और डाक्टरों की तैनाती के लिए पत्र लिखा गया है। साथ ही डिस्पेंसरी को किसी अन्य बड़े और सही जगह पर स्थित भवन में शिफ्ट करने के लिए भी पत्र लिखा गया है। यहां पर किराया ज्यादा है और जगह कम।
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