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    क्रायोथेरेपी से कैंसर का इलाज करने वाला हरियाणा का पहला चिकित्सा केंद्र बना हिसार अग्रोहा मेडिकल

    By chetan singhEdited By: Naveen Dalal
    Updated: Fri, 23 Sep 2022 02:00 PM (IST)

    हरियाणा के हिसार महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज में क्रायोथेरेपी से केंसर का इलाज संभव है। इस पूरी प्रक्रिया में मरीज को इलाज की पूरी सुविधा निशुल्क दी गई। पहले क्रायोथेरेपी का प्रयोग दिल्ली और चंडीगढ़ में किया जाता है।

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    अग्रोहा मेडिकल ने बिना चीरफाड़ किया केंसर का इलाज।

    हिसार/अग्रोहा, जागरण संवाददाता। हिसार के अग्रोहा में महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज के चर्म रोग विभाग ने बेसल सेल कैंसर का बिना ऑपरेशन सफल इलाज कर क्षेत्र के चिकित्सा जगत में नए कीर्तिमान को स्थापित किया है। इसके साथ ही महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज क्रायोथेरेपी के जरिए बेसल सेल कैंसर का सफल इलाज करने वाला प्रदेश पहला मेडिकल कालेज बन गया है।

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    महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि मरीज को लगभग 1 साल से बाएं गाल पर बेसल सेल कैंसर की बीमारी थी जिसकी वजह से वह काफी परेशान था। काफी उपचारों के बाद भी आराम ना मिलने पर मरीज ने महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज के चर्म रोग विभाग से संपर्क किया और क्रायोथेरेपी के जरिए चमड़ी के इस कैंसर से निजात पाई। इस थेरेपी का प्रयोग कर बिना किसी ऑपरेशन के कैंसर को पूरी तरह ठीक कर दिया गया। इलाज के बाद मरीज पूर्ण स्वस्थ होकर अपनी आम जिंदगी शुरू कर चुका है।

    क्रायोथेरेपी का प्रयोग दिल्ली और चंडीगढ़ में तो किया जाता है लेकिन हरियाणा में इस थेरेपी के जरिए सफल इलाज पहली बार महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा में ही किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में मरीज को इलाज की पूरी सुविधा निशुल्क दी गई।  

    चर्म रोग विभाग की इस उपलब्धि पर राज्यसभा सांसद जनरल डीपी वत्स, महाविद्यालय के सीईओ एयर मार्शल डॉक्टर आरके रान्याल, निदेशक डॉ अलका छाबड़ा, निदेशक प्रशासन डॉ आशुतोष शर्मा, एमएस डॉ राजीव चौहान, डॉ शमशेर मलिक ने विभाग इंचार्ज डॉ अमन गोयल, डॉ अंजलि, डॉ शुभम, डॉ पूजा व रामफल को शुभकामनाएं प्रेषित की। 

    क्या होती है क्रायोथेरेपी 

    चर्म रोग विभाग के इंचार्ज डॉ अमन गोयल ने बताया कि बेसल सेल कैंसर में रोगी की त्वचा खराब होने लगती है और यह काफी पीड़ादाई भी होता है। ऐसे में क्रायोथेरेपी ऑपरेशन की तुलना में बेहतर विकल्प है। इसमें लिक्विड नाइट्रोजन को -192° सेल्सियस पर ठंडा कर विशेष तकनीक से केंसर की कोशिकाओं को जमा दिया जाता है।

    इतने कम तापमान के कारण केंसर की कोशिकाएं मर जाती हैं जिन्हें सावधानी से मरीज के शरीर से अलग कर दिया जाता है। चूंकि यह त्वचा संबंधित प्रक्रिया है इसलिए इसमें किसी प्रकार की चीरफाड़ की आवश्यकता नहीं होती है। उन्होंने बताया कि हरियाणा में इस थेरेपी का प्रयोग पहली बार ही किया गया है।